जीटीए ने दो रोप-वे परियोजनाओं को किया रद्द

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सिलीगुड़ी : सुरक्षा के प्रश्न पर पहाड़ पर दो रोप-वे परियोजनाओं को रद्द करने का फैसला गोरखा क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) ने लिया है. मिरिक से सौरिनी एवं कर्सियांग से मिरिक- इन दोनों परियोजनाओं पर अब काम नहीं होगा. लेकिन पर्यटकों की मांग के अनुसार मिरिक के गिद्दा पहाड़ से रोहिणी रोप-वे परियोजना को अवश्य पूरा […]

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सिलीगुड़ी : सुरक्षा के प्रश्न पर पहाड़ पर दो रोप-वे परियोजनाओं को रद्द करने का फैसला गोरखा क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) ने लिया है. मिरिक से सौरिनी एवं कर्सियांग से मिरिक- इन दोनों परियोजनाओं पर अब काम नहीं होगा.
लेकिन पर्यटकों की मांग के अनुसार मिरिक के गिद्दा पहाड़ से रोहिणी रोप-वे परियोजना को अवश्य पूरा किया जायेगा. गिद्दा पहाड़ से रोहिणी तक रोप-वे परियोजना के लिये टेंडर भी जारी किया जा चुका है. इसके अलावा दार्जिलिंग के जामूनि में एक नया पर्यटन केंद्र बनाने की योजना भी जीटीए ने बनायी है.
जीटीए के सदस्य अरूण सिग्ची ने बताया कि दो रोप-वे परियोजनाओं को रद्द करने का फैसला जीटीए ने लिया है. उन्होंने बताया कि मिरिक से सौरिणी तक रोप-वे परियोजना में प्रस्तावित मार्ग के बीच में कई मोबाइल फोन टावर व बिजली के हाईटेंशन लाइन टावर के आने की वजह से ही इस परियोजना को रद्द किया जाने का निर्णय लिया गया है.
इसके अलावा कर्सियांग से मिरिक के प्रस्तावित रोप वे मार्ग का नक्शा अंग्रेजी के वी अक्षर जैसा बना था. इसमें कर्सियांग से बहुत नीचे उतरकर फिर ‍ऊपर उठना पड़ता, जिस वजह से इस मार्ग पर दुर्घटना की अधिक आशंका थी. इन्हीं कारणों से इन दोनों रोप वे परियोजना को रद्द करने का फैसला जीटीए की ओर से लिया गया.
इधर गिद्दा पहाड़ से रोहिणी तक के रोप वे का काम जल्द शुरू किया जायेगा. इधर जीटीए के पर्यटन विभाग के सचिव भास्कर मोक्तान ने बताया कि किसी भी रोप-वे को रद्द करने की जानकारी मेरे पास नहीं है. लेकिन दार्जिलिंग के जामूनी में एक पर्यटन केंद्र बनाया रहा है. टॉय ट्रेन की तरह ही पहाड़ पर रोप-वे पर्यटकों के लिये एक आकर्षण का केंद्र है.
वर्तमान में दार्जिलिंग के सिंघीमारी से तकवर तक करीब आठ किलोमीटर पहाड़ी इलाके में रोप वे परिसेवा चालू है. पर्यटकों की मांग के अनुसार और भी पांच रोप वे परियोजना शुरू करने के लिये जीटीए ने कदम आगे बढ़ाया था. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस पांच रोप वे परियोजना करीब सौ करोड़ रुपये का खर्च करने की योजना थी. तकवर से जामूनी, कालिंपोंग से जेलो, गिद्दा पहाड़ से रोहिणी, मिरिक से सौरिनी व कर्सियांग से मिरिक रोप-वे बनाने का निर्णय जीटीए ने किया था.
ये परियोजनाएं करीब दो वर्ष पहले की हैं एवं चर्चा के समय रोप-वे के मार्ग में किसी भी प्रकार की कोई बाधा नहीं थी.उस समय मिरिक से सौरिनी रोप-वे के प्रस्तावित मार्ग में कोई भी टावर नहीं था, लेकिन विगत दो वर्षों में इस मार्ग में एकाधिक मोबाइल टावर लगाये गये हैं. टावर के बगल से रोप-वे को ले जाना कतई संभव नहीं. लेकिन प्रश्न अब यह खड़ा हो रहा है कि जीटीए द्वारा रोप-वे के लिये प्रस्तावित मार्ग में मोबाइल टावर लगाने की अनुमति किस आधार पर दी. लेकिन इस विषय पर जीटीए के एक भी अधिकारी मुंह खोलने को राजी नहीं हैं.
दूसरी ओर कर्सियांग से मिरिक रोप-वे के लिये जो नक्शा तैयार किया गया था, उसमे रोप-वे में चढ़कर लोग काफी नीचे उतरते, फिर काफी ऊपर चढ़ते. इस नक्शे पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर काफी प्रश्न उठा. इसी वजह से रोप-वे के इस मार्ग को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इन दो रोप-वे परियोजना के रद्द होने से 40-45 करोड़ का खर्च कम हो जायेगा.
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