जान हथेली पर लेकर नदी पार करते हैं यात्री

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हुगली. तेलिनीपाड़ा-श्यामनगर फेरीघाट पर जान हथेली पर लेकर यात्री हर रोज नदी पार कर रहे हैं. नदी मेंं भाटा के दौरान लगभग दो-तीन घंटे यह फेरी घाट बंद रह रहा है. ऐसे में लोग मछली मरनेवाले डेंगी से नदी पार करने के लिए मजबूर हो रहे हैं. डेंगीवाले उनसे नदी पार होने के लिए औने-पौने […]

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हुगली. तेलिनीपाड़ा-श्यामनगर फेरीघाट पर जान हथेली पर लेकर यात्री हर रोज नदी पार कर रहे हैं. नदी मेंं भाटा के दौरान लगभग दो-तीन घंटे यह फेरी घाट बंद रह रहा है. ऐसे में लोग मछली मरनेवाले डेंगी से नदी पार करने के लिए मजबूर हो रहे हैं. डेंगीवाले उनसे नदी पार होने के लिए औने-पौने किराया ले रहे हैं.

यहां से पार नहीं करने पर यात्रियों को मजबूरन सात किलोमीटर दूर चंदननगर के ढबड़बिया घाट या फिर भद्रेश्वर के कंगाली घाट और बाबूघाट से नदी पार होना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी रोजाना इस घाट से पार करनेवाले नियमति यात्रियों को हो रही है. पिछले हफ्ते नदी में तेज ज्वार आने से लगभग 40-50 मीटर लंबी लकड़ी की जेटी का कुछ हिस्सा सामने से टूट जाने के कारण तेलिनीपाड़ा-श्यामनगर फेरीघाट पार करनेवाले हजारों साधारण यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. भाटा के दौरान लगभग तीन से चार घंटे हर रोज घाट बंद रह रहा है. हुगली जिला परिषद इस फेरीघाट की देखभाल करती है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस घाट की लीज के तीन वर्ष की मियाद जनवरी 2015 में खत्म हो जाने के बावजूद यह फेरीघाट अवैध रूप से कुछ अज्ञात कुछ लोगों द्वारा चलाया जा रहा है. इस फेरीघाट की निलामी हुगली जिला परिषद ने जनवरी व मार्च में दो बार निविदा आमंत्रित की. आरोप है कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से तकनीकी त्रुटि का हवाला देते हुए दोनों टेंडरों को को रद्द कर दिया गया. यात्रियों का आरोप है कि पिछले साल नवंबर में घाट का प्रति यात्रियों का किराया एक झटके में ढाई रुपये से बढ़ा कर चार रुपये कर दिया गया.

किराया बढ़ाये जाने के बाद भी यात्री परिसेवा व सुरक्षा के इंतजाम दिनोदिन असुरिक्षत होते जा रहे हैं. यात्रियों ने आरोप लगाया कि बीते साल 12 जुलाई को इस फेरीघाट में नौका डूबने से एक छात्र सहित दो यात्रियों की मौत हो गयी थी. फिर भी घाट प्रबंधन ने पिछली घटना से कोई सीख नहीं ली. आरोप यह भी है कि साल 2004 में तीन वर्षो के लिए 42 लाख रु पये में नीलाम होनेवाली इस फेरीघाट की नीलामी की रकम साल 2011 में राज्य के सबसे महंगी नीलामी की राशि लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये हो गयी व यात्री किराया भी डेढ़ रुपये से बढ़ कर ढ़ाई रुपये कर दिया गया था, जो अब चार रुपये कर दिया गया है.

हुगली जिला परिषद के सभाधिपति हाजी शेख महबूब रहमान ने बताया कि उनकी तरफ से फेरीघाट के दोनों तरफ पत्थर के स्थायी जेटी के निर्माण के लिए राज्य सरकार के परिवहन व नगर विकास विभाग को विशेष रूप से लिखित अनुरोध किया गया है और जल्द ही इसकी व्यवस्था की जायेगी. उन्होंने बताया कि साल 2013 में हुगली जिला परिषद द्वारा लाखों रुपये की लागत से लकड़ी के जेटी का निर्माण किया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में इसे नुकसान होता जा रहा है. 19 मई को फेरीघाट की नये सिरे से नीलामी की तिथि निर्धारित की गयी है.
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