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अनुसूची दिवस पर याद किये सुवास घीसिंग

Updated at : 07 Dec 2019 1:48 AM (IST)
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अनुसूची दिवस पर याद किये सुवास घीसिंग

कर्सियांग स्थित पार्टी कार्यालय में गोरामुमो ने किया कार्यक्रम आयोजित घीसिंग ने राजनीतिक चेतना के जागरण हेतु शुरू किया था संघर्ष : कमला कर्सियांग : दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र के विभिन्न इलाकों की भांति कर्सियांग में भी गोरामुमो के कर्सियांग नगरपालिका शहर कमेटी के तत्वावधान में शुक्रवार को 14वां छठी अनुसूची समझौता दिवस पर कार्यक्रम का […]

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कर्सियांग स्थित पार्टी कार्यालय में गोरामुमो ने किया कार्यक्रम आयोजित

घीसिंग ने राजनीतिक चेतना के जागरण हेतु शुरू किया था संघर्ष : कमला

कर्सियांग : दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र के विभिन्न इलाकों की भांति कर्सियांग में भी गोरामुमो के कर्सियांग नगरपालिका शहर कमेटी के तत्वावधान में शुक्रवार को 14वां छठी अनुसूची समझौता दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कर्सियांग स्थित गोरामुमो के पार्टी कार्यालय में आयोजित समारोह की अध्यक्षता पार्टी के वरिष्ठ सदस्य कमला राई ने की. समारोह के आरंभ में गोरामुमो के संस्थापक अध्यक्ष सुवास घीसिंग का स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किया गया.

इस दौरान समारोह के औचित्य के बारे में जानकारी देते हुए उपस्थित सदस्यों को कमला राई ने बताया कि छठी अनुसूची समझौता दिवस मनाकर जनता को संदेश देने का कार्य किया जाता है. सुवास घीसिंग ने राजनैतिक चेतना का जागरण लाने हेतु संघर्ष आरंभ किया था. हमारा संघर्ष अभी भी समाप्त नहीं हुआ है. आज भी हमें पूर्ण रूपसे राजनैतिक अधिकार नहीं मिला है.

उन्होंने कहा कि सुवास घीसिंग ने 1986 में मैदान में उतरकर आंदोलन किया था. दागोपाप चलाकर उन्होंने राज्य व केन्द्र सरकार बीच एक मिशाल पेश किया था. दागोपाप चलाने के साथ-साथ वे लक्ष्य प्राप्ति के लिए भी कार्य करते थे. उन्होंने गोरखालैंड शब्द का सृजन किया था. यह शब्द पवित्र है. इस शब्द में संपूर्ण गोरखाओं की आस्था समावेश है.

6 दिसंबर-2005 के दिन छठी अनुसूची के मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट में हस्ताक्षर हुआ था. परंतु विपक्षी पार्टी के विरोध से यह कार्यान्वयन नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि छठी अनुसूची के माध्यम से ही गोरखालैंड प्राप्ति का रास्ता साफ होगा. पूर्व में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि छठी अनुसूची लागू होने से एनआरसी से कुछ फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने सुवास घीसिंग के संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि सुवास घीसिंग गोरखालैंड के पवित्र शब्द के बीच युग पुरूष के रूप में जी रहे हैं.

राजनीति समझाने व चेतना जगानेवाले सुवास घीसिंग को बताते हुए उन्होंने कहा कि गोरखाओं की इच्छा व आकांक्षा को पूर्ण करने के लिए सुवास घीसिंग ने एक बूंद खून बहाये बगैर छठी अनुसूची पर ऐतिहासिक समझौता किया था. परंतु पहाड़ की गलत राजनीति के कारण यह कार्यान्वयन नहीं हो सका. गोरखालैंड तक पहुंचने का सहज मार्ग वर्तमान परिस्थिति के बीच छठी अनुसूची बताते हुए उन्होंने कहा कि छठी अनुसूची में कानून बनाने की क्षमता है.

इसे प्राप्त करने के लिए सभी को एकबद्ध होने का आह्वान भी उन्होंने किया. समारोह में पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों में सुधा सुब्बा, कुमारी शर्मा, शांति लामा, प्रणिता गुरूंग, माया गुप्ता, मीना गुप्ता, प्रदीप बल, पेम्बा तामंग, बुकेश तामंग, अशोक सुब्बा, कुंदन तामंग, संजिता सुब्बा, उमा लामा व सुधा सेवा आदि की उपस्थिति थी. इस आशय की जानकारी गोरामुमो कर्सियांग नगरपालिका शहर कमेटी के अध्यक्ष संजय छेत्री ने एक मुलाकात के दौरान दी.

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