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रायगंज विवि के प्रोफेसर के शोध में भारतीय पाकिस्तान

Updated at : 04 Dec 2019 1:23 AM (IST)
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रायगंज विवि के प्रोफेसर के शोध में भारतीय पाकिस्तान

शिक्षा-स्वास्थ्य-संपर्क व्यवस्था से वंचित यहां के निवासी आदिवासी बहुल इलाके को प्रकाश में लाकर की मदद की अपील रायगंज : पूर्णिया जिले का छोटा सा गांव पाकिस्तान. आजादी के बाद इस गांव के मुसलमान पाकिस्तान चले गये. लेकिन उनकी याद में इस गांव का नाम पाकिस्तान रख दिया गया. अब यह नाम हीं समस्या का […]

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शिक्षा-स्वास्थ्य-संपर्क व्यवस्था से वंचित यहां के निवासी

आदिवासी बहुल इलाके को प्रकाश में लाकर की मदद की अपील

रायगंज : पूर्णिया जिले का छोटा सा गांव पाकिस्तान. आजादी के बाद इस गांव के मुसलमान पाकिस्तान चले गये. लेकिन उनकी याद में इस गांव का नाम पाकिस्तान रख दिया गया. अब यह नाम हीं समस्या का कारण बन गया है. आरोप है कि पाकिस्तान गांव के लोग आज भी सरकारी सुविधाओं से वंचित है. इस आदिवासी बहुल गांव के निवासियों का कहना है कि उनका गांव शिक्षा-स्वास्थ्य व संपर्क व्यवस्था जैसी मूलभूल सुविधाओं से वंचित है.

ग्रामीण अपने गांव को पाकिस्तान नाम से छुटकारा दिलाना चाहते हैं. क्योंकि उनका मानना है कि इस नाम के कारण ही आज के दौर में भी शिक्षा, स्वास्थ्य यहां तक की संपर्क व्यवस्था में भी पिछड़ा है. आदिवासी समाज के विकास को लेकर षोध कर रहे रायगंज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. तापस पाल हालहीं में पूर्णिया जिले के श्रीनगर ब्लॉक अंतर्गत सिंधिया ग्राम पंचायत के पाकिस्तान गांव पहुंचे. उस दौरान उन्होंने गांव की तमाम जानकारियों के साथ ही गांववालों की समस्या व परेशानियों को सुना व लोगों को इससे रुबरु करवाना शुरू किया. उनका कहना है कि इस गांव के लोग गांव को पाकिस्तान कहलाना पसंद नहीं करते हैं.

इसलिए ग्रामीणों ने गांव का नाम विरसा नगर रख लिया है. इन आदिवासियों में अपने समुदाय के प्रति जितनी श्रद्धा है, देश के प्रति भी उनका उतना हीं प्यार है. इलाके में 18 परिवारों में कुल 200 सदस्य हैं. जनसंख्या का 35 फीसदी साक्षर है. हालांकि इलाके में कोई स्कूल नहीं है. यह गांव नदी किनारे बसे दरीद्रता की जीवंत तस्वीर है. स्कूली शिक्षा के लिए यहां तीन किलोमीटर दूर सिंधिया गांव जाना पड़ता है. हंस मुर्गी या मवेशी पालन, खेतीबारी, मछली पालन, पक्षी शिकार कर गांव के लोग जीवन यापन करते हैं.

पाकिस्तान गांव में आज तक स्वच्छ भारत मिशन के शौचालय निर्माण या सरकारी आवाज योजनाओं के तहत घर बनाने का काम नहीं पहुंचा है. इस गांव में एक भी स्वास्थ्यकेंद्र नहीं है. प्रोफेसर तापस पाल अपने 23 शिक्षार्थियों के साथ उनके सहयोगी प्रोफेसर संजीव कुमार, प्रोफेसर जयजीत देवनाथ, प्रोफेसर विपुल प्रमाणिक व षोधकर्ता प्रह्लाद मंडल के साथ पहुंचे. उन्होंने कहा कि गांव की दरीद्रता व दूर्दशा को दूर करने के लिए आदिवासी बहुल इस इलाके की तस्वीर देश व समाज के सामने रख रहे है. इसके जरिए वह सरकार से गांववालों की मदद की अपील करना चाहते हैं.

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