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सेवानिवृत कर्मियों को स्मार्ट कार्ड देने की योजना अधर में

Updated at : 08 Nov 2019 2:25 AM (IST)
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सेवानिवृत कर्मियों को स्मार्ट कार्ड देने की योजना अधर में

कोल इंिडया स्वास्थ्य लाभ के लायी थी स्कीम सांकतोड़िया : ईसीएल सहित कोल इंडिया के दूसरी सहायक कंपनियों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्मार्ट कार्ड से इलाज सुविधा देने की योजना अधर में अटकी है. तमाम दावे के बाद भी पुरानी व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त कामगारों को इलाज कराना पड़ रहा है. ईसीएल सूत्रों ने बताया […]

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कोल इंिडया स्वास्थ्य लाभ के लायी थी स्कीम

सांकतोड़िया : ईसीएल सहित कोल इंडिया के दूसरी सहायक कंपनियों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्मार्ट कार्ड से इलाज सुविधा देने की योजना अधर में अटकी है. तमाम दावे के बाद भी पुरानी व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त कामगारों को इलाज कराना पड़ रहा है. ईसीएल सूत्रों ने बताया कि नई स्कीम से प्रबंधन ने इलाज तो शुरू कर दिया है, लेकिन ट्रस्ट नहीं बनने और दूसरे अन्य कारणों से अब तक स्मार्ट कार्ड जारी नहीं किया है. ऐसे में गंभीर बीमारियां या असीमित खर्च के दायरे में आने वाली बीमारियों का जल्द इलाज कराना मुश्किल हो रहा है.
दो साल बाद भी कर्मियों को इसका पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पाया है. दरअसल, कोल इंडिया के कर्मियों को नई व्यवस्था के तहत कैशलेस मेडिकल सुविधा दी जानी है. इसके लागू होने के बाद स्मार्ट कार्ड से इलाज की सुविधा रहेगी. कर्मियों को कंपनी मुख्यालय के चक्कर काटने से निजात मिलेगी. प्रबंधन अपने कर्मचारियों को स्मार्ट हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराएगी.
डॉक्टरों को कार्ड नंबर से ही पूरी जानकारी ऑनलाइन मिल जाएगी. इसी तरह मेडिकेयर स्कीम के तहत रिटायर कर्मियों को भी स्मार्ट कार्ड से इलाज की सुविधा दी जानी है, लेकिन प्रक्रिया अब भी अधर में लटकी है. कोल इंडिया ने मेडिकेयर स्कीम तैयार की है. इसमें कर्मियों को रिटायरमेंट के बाद भी आजीवन स्वास्थ्य लाभ और इलाज की सुविधा मिलेगी. देश भर में 8 लाख तक के खर्चे पर इलाज करा सकते हैं.
पहले यह राशि 5 लाख थी, जिसे बढ़ाकर 8 लाख कर दिया गया है. गंभीर बीमारियों पर इलाज के लिए असीमित राशि खर्च की जा सकेगी. बताया गया है कि श्रमिक संगठनों ने पहले भी वेलफेयर बोर्ड के साथ हुई मीटिंग में इस मुद्दे को प्रबंधन के समक्ष उठाया था और सेवानिवृत्त कर्मियों को इलाज के लिए चिकित्सा बुक की जगह स्मार्ट कार्ड देने की मांग रखी थी.
चिकित्सा विभाग की ओर से प्रस्ताव कार्यकारी निदेशकों समक्ष प्रेषित करने के निर्देश दिए थे. स्मार्ट कार्ड से कर्मियों के इलाज में सुविधा होगी. कागजी कार्रवाई के नाम पर वसूली पर रोक लगेगी. इलाज के लिए लगने वाली राशि सीधे संस्था को भुगतान होगी. ऐसे में भ्रष्टाचार पर रोक लगेगा. पैनल में शामिल अथवा अनुबंधित अस्पतालों से स्मार्ट कार्ड से इलाज कराना आसान होगा. हेल्थ स्मार्ट कार्ड में कर्मियों का डेटा बेस रहेगा.
केंद्रीय श्रम संगठनों ने कहा कि दो साल पहले इस पर सहमति बनी थी तो लग रहा था कि सेवानिवृत्त कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी. लेकिन योजना अधर में लटकी है. ट्रस्ट गठन के अभाव में चिकित्सा सुविधा का लाभ पूरी तरह नहीं मिल रहा. प्रबंधन ने इसे लटका दिया है. कोयला कर्मियों को स्मार्ट कार्ड के माध्यम से मेडिकल सुविधा देने के मुद्दे पर जेबीसीसीआई की सब-कमेटी में सहमति बनी थी. स्मार्ट कार्ड सुविधा देने के साथ ट्रस्ट गठन की बात भी शामिल थी.
स्मार्ट कार्ड आधार से लिंक होगा. इससे स्मार्ट कार्ड के जरिए इलाज कराने में आसानी होगी. कोल वर्क्स फेडरेशन सीटू के सचिव वीएम मनोहर ने कहा मेडिकेयर स्कीम के लिए ट्रस्ट नहीं बना है. ट्रस्ट बनने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. पहले स्मार्ट कार्ड देना था, पर कार्ड के दुरुपयोग की आशंका पर तकनीकी रूप से इसमें सुधार करना है. इसके लिए अन्य व्यवस्थाएं करनी होंगी. ट्रस्ट जल्दी बनने से यह काम भी जल्दी होगा.
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