रसमती पर्यटन केंद्र में गैंडा छोड़े जाने की योजना

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पुंडिबाड़ी : सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो आगामी नवंबर महीने के दूसरे सप्ताह में पातलाखावा वनांचल के रसमती पर्यटन केंद्र में वन विभाग की ओर से गैंडा छोड़ा जायेगा. जलदापाड़ा व गोरुमारा जंगल से एक नर व दो मादा गैंडा छोड़े जाने की योजना है. वन विभाग के कूचबिहार के विभागीय वनाधिकारी विमान विश्वास ने कहा […]

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पुंडिबाड़ी : सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो आगामी नवंबर महीने के दूसरे सप्ताह में पातलाखावा वनांचल के रसमती पर्यटन केंद्र में वन विभाग की ओर से गैंडा छोड़ा जायेगा. जलदापाड़ा व गोरुमारा जंगल से एक नर व दो मादा गैंडा छोड़े जाने की योजना है.

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वन विभाग के कूचबिहार के विभागीय वनाधिकारी विमान विश्वास ने कहा कि रसमती जंगल में गैंडे के निवास के लिए अनुकूल माहौल तैयार है. एक नर व दो मादा गैंडा नवंबर महीने में रसमती झील के समीप जंगल में लाने पर विचार विमर्श किया जा रहा है.
कूचबिहार 2 नंबर ब्लॉक के पतलाखावा वनांचल क्षेत्र में रसमती पर्यावरण पर्यटन केंद्र है. उस जंगल में गैंडे का भोजन पुरंडी घास लगाया गया है. गैंडे के विचरण वाले इलाके को सौर बिजली की बाड़ से घेरा गया है. इससे निर्धारित इलाके के बाद गैंडे नहीं निकल पायेंगे व जंगल के आसपास के रिहायशी इलाके सुरक्षित रहेंगे.
गैंडे के विचरण के लिए लगभग 60 हेक्टेयर जमीन पर बिजली का बाड़ लगाया गया है. पांच साल पहले से चल रही इस योजना के काम में वन विभाग का लगभग 12 करोड़ रुपए की लागत आयेगी. सौर बिजली के बाड़ लगाने में लगभग 7 लाख रुपए खर्च हुए है. गोरुमारा, जलदापाड़ा के बाद अब पातलाखावा जंगल में गैंडे के तीसरे आवास बन जाने से इस जंगल में भी पर्यटकों की भीड़ बढ़ेगी. यह जानकारी वन विभाग की ओर से दी गयी है.
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