कच्चू साग खाकर दिन गुजार रहे बंद बागान के श्रमिक
Updated at : 01 Sep 2019 2:14 AM (IST)
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बंद मधु बागान के श्रमिकों को पांच माह से नहीं मिल रहा फाउलाई का भी पैसा 2014 में बागान बंद होने से 950 श्रमिक परिवार हुए बेरोजगार कालचीनी : विगत पांच महीने से फाउलाई का पैसा नहीं मिलने से भूख के मारे कच्चू साग खाकर दिन गुजार रहे हैं डुआर्स के बंद मधु चाय बागान […]
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बंद मधु बागान के श्रमिकों को पांच माह से नहीं मिल रहा फाउलाई का भी पैसा
2014 में बागान बंद होने से 950 श्रमिक परिवार हुए बेरोजगार
कालचीनी : विगत पांच महीने से फाउलाई का पैसा नहीं मिलने से भूख के मारे कच्चू साग खाकर दिन गुजार रहे हैं डुआर्स के बंद मधु चाय बागान के चाय श्रमिक. प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 2014 के सिंतबर माह में अलीपुरद्वार जिले के कालचीनी ब्लॉक स्थित मधु चाय बागान के 950 श्रमिक परिवार बेरोजगार हो गए थे.
जबकि बागान बंद हो जाने पर वहां के कुछ श्रमिक देश के अन्य हिस्सों में काम के चले गए. कुछ लोग भारत-भूटान सीमावर्ती शहर जयगांव में जाकर दिहाड़ी मजदूरी का काम करने लगे. इसके पश्चात वहां निवास करने वाले श्रमिकों को सरकारी अनुदान फाउलाई रकम प्रदान की जा रही थी.
लेकिन विगत अप्रैल माह से वहां के श्रमिकों को फाउलाई पैसा मिलना भी बंद हो गया. ज्ञात होगा कि विगत कुछ महीने पहले लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ, जिससे पहले बंद मधु चाय बागान में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पहुंचे थे. जिनके द्वारा वहां के श्रमिकों को आश्वासन दिया गया था कि बागान चुनाव से पहले खुल जाएगा. हालांकि चुनाव के पश्चात बागान खुलना तो दूर वहां के श्रमिकों को जो फाउलाई का पैसा मिलता था. वह भी विगत पांच महीने से मिलना बंद हो गया है. वर्तमान स्थिति में बाध्य होकर बंद मधु चाय बगान के श्रमिक दिन गुजारने के लिए कच्चू साग, ढेकी साग जैसे अन्य साग खाकर जीवन-यापन करने को विवश है.
इस विषय पर बंद मधु चाय बागान के श्रमिकों ने बताया कि विगत 2014 से हमारा बागान बंद पड़ा है. जिसके बाद हमारी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गयी. तभी सरकारी अनुदान के अनुसार हमें फाउलाई पैसा मिलना प्रारम्भ हुआ. श्रमिकों ने कहा चुनाव से पहले हमें नेताओं द्वारा बागान खुलने का आश्वासन मिला था. लेकिन बागान खोलना तो दूर की बात है हमे जो फाउलाई पैसा मिलता था वो भी विगत पांच माह से प्राप्त नहीं हो रहा. हमें सरकारी जीआर राशन जितनी मिलती है, उससे पूरे महीने हमारे घर का खुराक नहीं चल पाता है. इसीलिए बाध्य होकर हम पेट की ज्वाला को बुझाने के लिए कच्चू साग, ढेकी साग खाकर दिन गुजारने को विवश हैं.
श्रमिकों ने कहा कि अब तो हमारे इलाके में साग भी दिन प्रतिदिन खत्म होता जा रहा है. इसके बाद हम किस तरह पेट की ज्वाला बुझायेंगे. यह सोचकर हम बेहद चिंतित हैं. बंद मधु चाय बागान के श्रमिकों को फाउलाई का पैसा क्यों श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा, इस विषय में अलीपुरद्वार जिला परिषद के सभाधिपति शीला दास सरकार ने बताया कि मैं इस विषय को देखती हूं. वहीं इस विषय पर कालचीनी बीडीओ भूषण शेरपा ने बताया कि फाउलाई का पैसा तो सीधे केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है. फिर भी मैं अपने उच्च अधिकारियों से बातचीत करके इस विषय पर जवाब दे पाऊंगा.
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