नेपाली भाषा के व्यवहारिक प्रयोग पर जोर देना चाहिए

Published at :31 Aug 2019 1:31 AM (IST)
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नेपाली भाषा के व्यवहारिक प्रयोग पर जोर देना चाहिए

नेपाली भाषा की संवैधानिक मान्यता को लेकर बैठक आयोजित सोनादा डिग्री कॉलेज में भाषा मान्यता दिवस पर अतिथियों ने रखे विचार दार्जिलिंग : नेपाली भाषा के दीर्घकालीन संघर्ष के बाद भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में संवैधानिक मान्यता प्राप्त करने पर व्यावहारिक रूप से प्रयोग में न लाना कमजोरी है. इसलिए हम सभी नेपाली […]

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नेपाली भाषा की संवैधानिक मान्यता को लेकर बैठक आयोजित

सोनादा डिग्री कॉलेज में भाषा मान्यता दिवस पर अतिथियों ने रखे विचार

दार्जिलिंग : नेपाली भाषा के दीर्घकालीन संघर्ष के बाद भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में संवैधानिक मान्यता प्राप्त करने पर व्यावहारिक रूप से प्रयोग में न लाना कमजोरी है. इसलिए हम सभी नेपाली भाषा को व्यावहारिक प्रयोग में लाने पर जोर देना चाहिए. उक्त बातें गुरुवार को सोनादा डिग्री कॉलेज के नेपाली विभाग द्वारा आयोजित कॉलेज के प्रेक्षागृह में प्राचार्य डॉ. एलपी गुप्ता की अध्यक्षता में सम्पन्न नेपाली भाषा मान्यता दिवस तथा भानु स्मरण समारोह में सुवास सोतांग ने विचार व्यक्त करते हुए कही.

उन्होंने कहा कि नेपाली भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलना ही भारत में रह रहे नेपाली भाषी गोर्खा के असली भारतीय होने का अपने आप में प्रमाण है. इससे गोरखाओं को बार-बार विदेशी का लांछन लगाने वालों का बड़ा झटका हो सकता है. देश में संविधान के ऊपर कोई भी नही हो सकता. इसलिए नेपाली भाषा का संवैधानिक मान्यता प्राप्त होने के बाद गोरखाओं की सुरक्षा के लिए भाषा को भूलना नहीं चहिए. नेपाली भाषा को संवैधानिक मान्यता मांगने के साथ ही भारत सरकार ने नहीं दिया है. इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ा.

इतिहास को आगे रखते हुए विद्यार्थियों को अपने भाषा-साहित्य, संस्कृति का इतिहास पहचानने का आह्वान किया. नेपाली भाषा ने संवैधानिक मान्यता के 28 वर्ष होने के बाद भी भाषा के व्यावहारिक प्रयोग में शिथिलता आने का कारण अपने आप में भाषा के प्रति जागरूकता एवं श्रद्धा नहीं होना है. अधिक भाषा जानने के कारण अपनी मातृ भाषा को सदैव उपर करने का आह्वान किया. संवैधानिक मान्यता प्राप्त किया हुआ सम्पूर्ण सहुलियत का उपभोग करने का सभी का दायित्व है. भाषा के साथ भानु के प्रसंग जोड़कर नेपाली भाषा के माध्यम से भानुभक्त ने नेपालियों को एक सूत्र में बांधा गया.

आज भाषा के संवैधानिक मान्यता मिले 28 वर्ष होने पर भी जोड़ने के बजाए टूटता जा रहा है. हमें जोड़ने तथा बचाने पर एक ही हमारा नेपाली भाषा होने से हमलोगों को भाषा को माध्यम बनाकर एक सूत्र में बंधना तथा अपना अधिकार को खोजना अनिवार्य है. उक्त बातें सोतांग ने अवगत कराया.

सुवास सोतांग द्वारा लिखित भाषा आन्दोलन के इतिहास तथा उपलब्धि नामक पुस्तक का समीक्षात्मक टिप्पणी प्रो.मेघनाथ छेत्री ने किया. नेपाली भाषा के संवैधानिक मान्यता का आन्दोलन का इतिहास को प्रायः सम्पूर्ण रूप में समेटा गया. यह पुस्तक एक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में सदैव सुरक्षित रहने का बात कही. प्रो.पर्वत रसाईली द्वारा संचालित समारोह में वार्ताकार सुवास सोतांग को कॉलेज की तरफ से अभिनन्दन किया गया.

इस अवसर पर डा. एलपी गुप्ता, डॉ. एनसी राय, डॉ. रागिनी थापा व उत्तमा सुन्दास द्वारा माल्यार्पण व अभिनन्दन पत्र प्रदान किया गया. अभिनन्दन पत्र का पाठन प्रो.अनिल विश्वकर्मा ने किया. समारोह को सम्बोधित करते हुए डॉ. एनसी रॉय ने नेपाली भाषा को भारत का एक समृद्धशाली भाषा बताते हुए इसे अपनी भाषा को छोड़कर अन्य भाषा में पारंगत नहीं हो सकता. समारोह का औचित्य को समझाते हुए डॉ. रागिनी थापा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया.

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