शहर की देखरेख करनेवाला ही अनदेखी का शिकार

By Prabhat Khabar Digital Desk
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दो दशक पहले बना नगर निगम भवन हो गया है जर्जर

कई जगह पड़ीं दरारें, दुर्घटना की आशंका

अग्निशमन की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं
मेयर ने राज्य सरकार से सहयोग का रोना रोया
सिलीगुड़ी : इसे ही कहते हैं दीपक तले अंधेरा. जिस सिलीगुड़ी नगर निगम पर पूरे शहर की देख रेख की जिम्मेदारी है,वही नगर निगम अपने भवन की देखरेख नहीं कर पा रहा है. नगर निगम का भवन काफी जर्जर हो चला है और इसकी मरम्मत की पहल नहीं की गयी है.निगम में वाम मोर्चा बोर्ड ने इसके लिए राज्य सरकार पर सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाया है.
जबकि विरोधी तृणमूल का कहना है कि राज्य सरकार ने भवन की मरम्मत के लिए पैसे दिये,जबकि नगर निगम इसे खर्च ही नहीं कर पायी. भवन की मरम्मत के लिए आये करोड़ों रुपये वापस लौट गये. दूसरी ओर हर रोज नगर निगम के सैकड़ों कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर वहां काम कर रहे हैं.
सिलीगुड़ी नगर निगम की अपनी दो-मंजिला भवन है. पिछले दो दशकों से यह भवन सिलीगुड़ी के विकास का साक्षी रहा है. इस भवन में विभिन्न पार्टियों के मेयर समय-समय पर सिलीगुड़ी के लिए कार्य करते रहे. सभी मेयरों की भूमिका बदलते सिलीगुड़ी में काफी महत्वपूर्ण रही. इसी भवन में कई जरुरी विभाग के दफ्तर भी हैं.
सिलीगुड़ी शहर वर्तमान में इतना बड़ा हो गया है कि सिर्फ इस भवन के बदौलत विकास कार्यों को संचालित कर पाना संभव नहीं है. इस भवन में जगह की कमी है. हर रोज सिलीगुड़ी नगर निगम में हजारों की संख्या में लोगों का आना जाना लगा रहता है. लोगों के अनुसार कभी-कभी ट्रेड लाइसेंस तथा अन्य जरुरी विभागों में भीड़ बढ़ जाने के चलते खड़ा रहने तक की जगह नहीं होती. ऊपर से बिल्डिंग की हालत ऐसी कि कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है. नगर निगम के वर्षों पुरानी इस बिल्डिंग में कई जगहों पर दरारें देखी गई हैं.
कई जगहों पर तो बिल्डिंग का ज्वाइंट भी अलग हो गया है यहां आने वाले लोगों के मन में हर वक्त किसी दुर्घटना का डर बना रहता है.दूसरी ओर सिलीगुड़ी के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने भवन को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है. उन्होंने बताया कि नगर निगम में वाम मोर्चा बोर्ड रहने के कारण उन्हें राज्य सरकार से कोई फंड नहीं मिल रहा है. उन्होंने बताया कि चोरों तरफ गेट तथा भवनों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन सिलीगुड़ी शहर इन सब से अछूता है. तृणमूल कांग्रेस के सत्ता से हटाने के बाद ही सिलीगुड़ी में विकास संभव है.
दूसरी ओर नगर निगम में विरोधी दल नेता रंजन सरकार ने बताया कि मेयर को झूठ बोलने की आदत है.राज्य सरकार द्वारा नगर निगम बिल्डिंग मरम्मत के लिए दो करोड़ रुपये दिये गये थे. लेकिन यह रकम बिना खर्च किये वर्ष 2018 के मार्च-अप्रैल महीने में वापस चला गया. श्री सरकार का आरोप है कि मेयर उन पैसों को खर्च नहीं कर पाये. इसके बाद भी राज्य सरकार की ओर से नगर निगम के नये बिल्डिंग के लिए साढ़े चार करोड़ दिये गये, लेकिन आज तक उन पैसों को खर्च नहीं किया गया.
उन्होंने बताया कि अब तक मेयर के कमरे में दो बार आग लग चुकी है. इसके बावजूद नगर निगम के बिल्डिंग में फायर सेफ्टी की कोई खास व्यवस्था नहीं की गई है. उन्होंने बताया कि बिल्डिंग किसी भी वक्त टूट कर गिर सकती है. हर वक्त वहां आग लगने का खतरा बना रहता है. ऐसी स्थिति में नगर निगम कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि मेयर वहां काम करने वाले लोगों के साथ शहरवासियों की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं.श्री सरकार ने सिलीगुड़ी नगर निगम के माकपा बोर्ड एवं मेयर पर शहर के लोगों को नागरिक परिसेवा देने में पूरी तरह से विफल बताया.
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