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अंधेरे में रहने को मजबूर बागान के बाबू स्टाफ कर्मचारी

Updated at : 13 Apr 2019 12:48 AM (IST)
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अंधेरे में रहने को मजबूर बागान के बाबू स्टाफ कर्मचारी

ग्रासमोर चाय बागान के 16 कर्मचारियों के परिवार का जीवन बना हुआ है नारकीय नागराकाटा : एक तरफ जहां रुग्ण चाय बागानों के श्रमिकों की दशा सोचनीय है उसी तरह वहां के कर्मचारियों की स्थिति भी उनसे अलग नहीं है. ग्रासमोर चाय बागान के 16 कर्मचारियों को बीते कई माह से अंधेरे में ही रहना […]

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ग्रासमोर चाय बागान के 16 कर्मचारियों के परिवार का जीवन बना हुआ है नारकीय

नागराकाटा : एक तरफ जहां रुग्ण चाय बागानों के श्रमिकों की दशा सोचनीय है उसी तरह वहां के कर्मचारियों की स्थिति भी उनसे अलग नहीं है. ग्रासमोर चाय बागान के 16 कर्मचारियों को बीते कई माह से अंधेरे में ही रहना पड़ रहा है. वजह है कि वाणिज्यिक कनेक्शन होने से उनके मोटी रकम वाले बिल बकाया रहने के बाद पश्चिमबंग विद्युत वितरण कंपनी ने कनेक्शन काट दिये हैं. ये कर्मचारी सीधे तौर पर अपने नाम से कनेक्शन के लिये आवेदन को तैयार हैं.

जबकि बिजली विभाग का कहना है कि चाय बागान के नियमों के अनुसार कर्मचारी सीधे तौर पर कनेक्शन लेने के हकदार नहीं हैं. इसी तकनीकी असुविधा के चलते वह इन कर्मचारियों को कनेक्शन नहीं दे पा रहे हैं. नतीजा है कि इन कर्मचारियों को बच्चों को पढ़ाई लिखाई के लिये काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है. शुक्रवार को इन 16 कर्मचारियों ने अपने बाल बच्चों के साथ जलपाईगुड़ी स्थित बिजली विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी से बात की. लेकिन इनकी समस्या का कोई निदान नहीं निकला.

उल्लेखनीय है कि बीते 23 जुलाई को ग्रासमोर चाय बागान श्रमिक-प्रबंधन के बीच के विवाद के चलते पहली बार बंद हुआ. उस समय बिजली के बिल बकाया रहने से विभाग ने कनेक्शन काट दिया था. बाद में हालांकि मास्टर सिस्टम के जरिये बाबु स्टाफ और सब स्टाफ के आवासों में बिजली की आपूर्ति बहाल की गयी. लेकिन यह कनेक्शन वाणिज्यिक होने से इसके बिल काफी ज्यादा हो गये थे. इस बीच बीते अगस्त में इन कर्मचारियों ने कर्मचारियों के 16 परिवारों ने शुल्क समेत उनके व्यक्तिगत कनेक्शन के लिये बिजली विभाग के समक्ष आवेदन किये. उसके बाद 14 जनवरी को दूसरी बार प्रबंधन के लोग बागान छोड़कर चले गये.

उसी समय से इन कर्मचारियों के बिजली के कनेक्शन काट दिये गये. उसके बाद एक मार्च को बागान के खोले जाने को लेकर समझौता होने के बावजूद बकाया भुगतान की मांग को लेकर श्रमिक काम पर नहीं जा रहे हैं. इससे यह चाय बागान चालू नहीं हो सका. इसीलिये पिछले तीन माह से ये कर्मचारी अंधेरे में रहने को जैसे अभिशप्त हैं.

चाय बागान के बड़ा बाबु सुशांत दास ने बताया कि उन्हें बिजली विभाग के अधिकारी ने स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बताया. पता नहीं इस मुसीबत से कब छुटकारा मिलेगा. बागान जिस संगठन से जुड़ा है उस टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डुवार्स शाखा सचिव राम अवतार शर्मा ने कहा कि बागान श्रमिक अधिनियम के अनुसार इन कर्मचारियों को कनेक्शन देने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है. उन्होंने इस संबंध में प्रशासन को पत्र दिया था. वह भी चाहते हैं कि इन कर्मचारियों को बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित हो.

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