सिलीगुड़ी : पिकनिक पर पाबंदी से नववर्ष के रंग में पड़ा भंग, बैकुंठपुर के छोटे दुकानदार परेशान

Updated at : 02 Jan 2019 2:46 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : पिकनिक पर पाबंदी से नववर्ष के रंग में पड़ा भंग, बैकुंठपुर के छोटे दुकानदार परेशान

सिलीगुड़ी : नये साल पर लोग खुशियां मनाते हैं. पूरा वर्ष शांति और समृद्धि से गुजरे,इसके लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं. मंगलवार को नया साल 1 जनवरी के दिन जहां लोग विभिन्न स्थानों पर अपने स्तर पर जश्न मना रहे थे,वहीं दूसरी बैकुंठपुर जंगल संलग्न इलाके में दुकान लगाने वाले छोटे-छोटे कारोबारी घोर गम […]

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सिलीगुड़ी : नये साल पर लोग खुशियां मनाते हैं. पूरा वर्ष शांति और समृद्धि से गुजरे,इसके लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं. मंगलवार को नया साल 1 जनवरी के दिन जहां लोग विभिन्न स्थानों पर अपने स्तर पर जश्न मना रहे थे,वहीं दूसरी बैकुंठपुर जंगल संलग्न इलाके में दुकान लगाने वाले छोटे-छोटे कारोबारी घोर गम में डूबे हुए थे.

कारण इनके सामने रोजी-रोटी का संकट जो पैदा हो गया है.इस साल बैकुंठपुर जंगल इलाकों में पिकनिक पर रोक लगने से यहां पिकनिक करने वाले नहीं आये.
साल के दो से तीन महीने तक इस इलाके के लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए पिकनिक पार्टियों पर ही निर्भर रहते हैं. इस साल पिकनिक के रोक के कारण यहां सन्नाटा छाया हुआ है. पिकिनक पार्टियों के नहीं आने से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है. व्यापारियों की मानें तो जनवरी के एक महीने उनका व्यापार काफी अच्छा चलता है. इसके अलावा फरवरी मार्च में भी काफी लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं.
इस साल अचानक वन विभाग की रोक से छोटा फाफरी, फाराबाड़ी, नेपाली बस्ती, साहुडांगी का इलाका सुनसान है. इन सभी इलाकों में वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा गहम निगरानी की जा रही है.जनवरी महीना आते ही पिकनिक का सीजन शुरु हो जाता है. सर्दियों के मौसम में प्राकृतिक के हसीन वादियों का लुत्फ उठाने के लिए लोग जंगल की ओर वनभोज के लिए निकल पड़ते है.
हांलाकि इस दौरान अपना आपा खोकर लोग कुछ ऐसा भी कर बैठते हैं जिसकी वजह से जंगली जानवारों के साथ आम लोगों को समस्या उठानी पड़ती है. दो वर्ष पहले तो पिकनिक मनाने गए एक युवक की बैकुंठपुर जंगल के फाराबाड़ी इलाके में हत्या कर दी गयी थी. जिसके बाद वन विभाग और पुलिस की ओर से अन्य पिकनिक स्पॉटों पर निगरानी रखी जाने लगी थी.
लेकिन इस वर्ष अचानक वन विभाग ने बैकंठपुर जंगल के कुछ इलाकों में पिकनिक मामने पर पूरी तरह से रोक लगा दी. इसका उद्देश्य वन्यप्राण की रक्षा के साथ ही प्राकृतिक संपदा को बर्बाद होने से बचाना भी है. इसके अलावा असमाजिक गतिविधियों पर रोक लगाना भी एक मकसद है.
जहां पिकनिक पर रोक लगी है,उन सभी इलाकों में वन कर्मियों द्वारा गश्ती जारी है.वन विभाग के इस फैसले से बैकंठपुर जंगल के सालूगाड़ा डिवीजन छोटा फापरी स्थित पिकनिक स्पॉट के व्यापारी श्यामल विश्वास, बबलू राय, सुशील राय तथा अन्य ने बताया कि इस इलाके में 40 से भी अधिक दुकानदार हैं.
जिनकी आधी कमाई पिकनिक के एक दो महीने पर ही निर्भर करती है. पहले यहां पिकनिक मनाने लाखों लोग आते थे. 20-25 दिसंबर से ही लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता था. इस वर्ष नये साल से पहले वन विभाग के फैसले से इलाका सुनसान है.
उन्होंने बताया कि पिकनिक बंद होने से केवल उन्हें ही नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि स्वनिर्भर समूह की 100 से भी अधिक महिलाएं तथा युवक बेरोजगार हो गए हैं.पिकनिक के दिनों में हर कोई पानी सालपत्ता, थाली, ग्लास आदि बेचकर अपना रोजगार चलाता था. अब तो सारी उम्मीदें ही टूट गयी है. बोहनी तक नहीं हो रही है. उनका परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है.
क्या कहती हैं डीएफओ
इस मामले को लेकर डीएफओ उमा रानी से बात करने पर उन्होंने बताया कि पिकनिक मनाने वाले जाने-अंजाने प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाते है. जिसे ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने यह रोक लगायी. पूरे इलाके में पिकनिक पर पाबंदी है.
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