पांच दिन छान मारा जंगल, नहीं दिखा बाघ

Updated at : 22 Nov 2018 1:27 AM (IST)
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पांच दिन छान मारा जंगल, नहीं दिखा बाघ

जलपाईगुड़ी : इस महीने की 14 से 19 तारीख तक बक्सा बाघ परियोजना और गोरूमारा व जलदापाड़ा राष्ट्रीय पार्कों में सैंकड़ों की संख्या में वनकर्मियों ने बाघों की गिनती के लिये जंगल को खंगाल डाला. लेकिन एक भी बाघ दिखाई नहीं पड़ा. इन तीन जंगलों में करीब साढ़े तीन सौ वनकर्मियों और स्वंयसेवी संगठनों के […]

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जलपाईगुड़ी : इस महीने की 14 से 19 तारीख तक बक्सा बाघ परियोजना और गोरूमारा व जलदापाड़ा राष्ट्रीय पार्कों में सैंकड़ों की संख्या में वनकर्मियों ने बाघों की गिनती के लिये जंगल को खंगाल डाला. लेकिन एक भी बाघ दिखाई नहीं पड़ा. इन तीन जंगलों में करीब साढ़े तीन सौ वनकर्मियों और स्वंयसेवी संगठनों के सदस्यों ने लगातार पांच दिनों तक खाक छानी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
हालांकि वन अधिकारी उम्मीद छोड़ने को तैयार नहीं हैं. रॉयल बंगाल टाइगर इन जंगलों में हैं या नहीं, यह देखने के लिये और तीन सौ ट्रैप कैमरा लगा दिये गये हैं. अगले एक महीने तक इन कैमरों पर कड़ी नजर रखी जायेगी. वन अधिकारियों का कहना है कि इन कैमरों से ही अंतिम नतीजों पर पहुंचा जा सकेगा.
उल्लेखनीय है कि बीते साल दिसम्बर में नेउड़ावैली में एक ड्राइवर ने एक रॉयल बंगाल टाइगर की फोटो अपने कैमरे में कैद की थी. इसके बाद नेउड़ावैली जंगल में 40 जोड़ा ट्रैप कैमरे लगाये गये थे. इसका अच्छा नतीजा मिला. इस साल के फरवरी महीने में दो दिन के अंतराल पर एक बाघ की फोटो कैमरे में कैद हुयी.
इससे यह सबूत मिला कि उत्तर बंगाल के जंगलों में अभी रॉयल बंगाल टाइगर का नामो-निशान खत्म नहीं हुआ है. हालांकि इस बार नेशनल टाइगर कंजरवेशन ऑथरिटी ने बाघों की गिनती से नेउड़ावैली जंगल को बाहर रखा है. इस बार की गिनती में बाघ के साथ अन्य मांसाहारी और तृणजीवी जीवों के बीच गिनती की गयी है.
उत्तर बंगाल में खुले रूप में आखिरी बार किसी पूर्ण व्यस्क रॉयल बंगाल टाइगर को 2006 में देखा गया था. तब कूचबिहार के घोक्साडांगा इलाके में ट्रेन के धक्के से उसकी मौत हो गयी थी.
इसके बाद तमाम कोशिशों के बावजूद किसी बाघ को आमने-सामने से नहीं देखा जा सका. राज्य के वन्य जीवन शाखा के मुख्य वनपाल रविकांत सिन्हा ने कहा कि पूरे बंगाल में सुंदर वन को छोड़कर और कहीं भी बाघ को सीधे तौर पर नहीं देखा जा सका.
लेकिन हमलोग उम्मीद छोड़ने को तैयार नहीं हैं. बक्सा, जलदापाड़ा और गोरूमारा तीनों जगह और तीन सौ ट्रैप कैमरे लगा दिये गये हैं. अगले एक महीने तक इनसे मिलने वाली तस्वीरों पर नजर रखी जायेगी. इसके बाद ही हमलोग किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचेंगे.
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