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जलपाईगुड़ी : 14 नवंबर से फिर शुरू हो रही बाघों की गिनती

बक्सा में लगाये जायेंगे 300 अतिरिक्त ट्रैप कैमरे 240 गणनाकर्मी 760 वर्ग किमी जंगल खंगालेंगे जलपाईगुड़ी : पिछले साल राष्ट्रीय स्तर पर एकसाथ हुई बाघों की गणना के बाद अब फिर से बाघों की गिनती शुरू होने जा रही है. यह गिनती मुख्य रूप से बक्सा बाघ परियोजना क्षेत्र में केंद्रित होगी. साथ ही जलदापाड़ा […]

बक्सा में लगाये जायेंगे 300 अतिरिक्त ट्रैप कैमरे
240 गणनाकर्मी 760 वर्ग किमी जंगल खंगालेंगे
जलपाईगुड़ी : पिछले साल राष्ट्रीय स्तर पर एकसाथ हुई बाघों की गणना के बाद अब फिर से बाघों की गिनती शुरू होने जा रही है. यह गिनती मुख्य रूप से बक्सा बाघ परियोजना क्षेत्र में केंद्रित होगी. साथ ही जलदापाड़ा और गोरूमारा नेशनल पार्कों में भी गिनती की जायेगी. उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में बाघों के अस्तित्व के एक-दो प्रमाण मिलने के बाद केंद्रीय बाघ संरक्षण संस्था ‘नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी’ (एनटीसीए) के निर्देश पर यह सर्वे शुरू होने जा रहा है.
गौरतलब है कि एनटीसीए डुआर्स के अभयारण्यों में बाघों को बसाने के पूर्व सुनिश्चित होना चाहता है कि यहां पहले से बाघ हैं या नहीं. पिछले बार के सर्वे के बाद एनटीसीए ने बताया था कि इस क्षेत्र में मुश्किल से तीन बाघ हो सकते हैं. हालांकि उनके निवास स्थान के बारे में कोई पक्का सबूत फिलवक्त तक नहीं मिल सका है. बाघों की गिनती के क्रम में ही बक्सा बाघ परियोजना जंगल में 300 अतिरिक्त ट्रैप कैमरे भी लगाये जायेंगे.
बक्सा बाघ प्रकल्प के रेंजर शुभंकर सेनगुप्त ने बताया कि इस बार एक माह तक चलनेवाले सर्वे में 760 वर्ग किलोमीटर के बक्सा जंगल के कोने-कोने को छान मारा जायेगा. इसमें ऐसे घने जंगलों तक भी जाया जायेगा जहां आम तौर पर पालतू पशु वगैरह भी नहीं जाते हैं. कुल 80 टीमों में शामिल 240 गणनाकर्मी तीन-तीन के समूह में गणना का काम करेंगे. इनके पास अत्याधुनिक जीपीएस, दूरबीन और कैमरे होंगे.
इस बार की खासियत है कि पैदल ही यह काम पूरा किया जायेगा. कुनकी हाथियों की मदद बिल्कुल नहीं ली जायेगी. इस दौरान बाघ का मल और पंजों की छाप इकट्ठी की जायेगी. पेड़ों के तनों पर बाघ के नाखून से बने खरोंच के निशान खोजे जायेंगे.
एक प्रश्न के उत्तर में उत्तर बंगाल के वन्य प्राणी डिवीजन के प्रधान मुख्य वनपाल उज्ज्वल घोष ने बताया कि इस बीच हमें कैमरा ट्रैप के जरिये नेउड़ा वैली में अभूतपूर्व सफलता मिली है.
जिस बाघ को अन्य तरीकों से वहां नहीं देखा जा सका, उसे कैमरे ने कैद कर लिया. इसलिए इस बार बड़े पैमाने पर ट्रैप कैमरे लगाये जायेंगे. इससे घने वनों में सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी. शुभंकर सेनगुप्त ने बताया कि मानव संसाधन की कमी के चलते यह सर्वे हमारे लिए बड़ी चुनौती है. हालांकि सभी संबधित पक्ष अगर तालमेल से काम करें तो सफलता जरूरी मिलेगी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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