बोनस श्रमिकों के घाव पर नमक-जैसा : ज्वाइंट फोरम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Oct 2018 1:20 AM (IST)
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दार्जिलिंग : शहर के जज बाजार स्थित माकपा कार्यालय में सोमवार को ज्वाइंट फोरम की ओर से एक बैठक का आयोजन किया गया. जेबी तमांग की अध्यक्षता में संपन्न हुये इस बैठक में गोरामुमो, माकपा, क्रामकपा, हिल कांग्रेस, जन आंदोलन पार्टी और गोर्खा लीग के श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे. इस बैठक में श्रमिकों […]
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दार्जिलिंग : शहर के जज बाजार स्थित माकपा कार्यालय में सोमवार को ज्वाइंट फोरम की ओर से एक बैठक का आयोजन किया गया. जेबी तमांग की अध्यक्षता में संपन्न हुये इस बैठक में गोरामुमो, माकपा, क्रामकपा, हिल कांग्रेस, जन आंदोलन पार्टी और गोर्खा लीग के श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे. इस बैठक में श्रमिकों के पूजा बोनस को लेकर चर्चा की गयी.
बैठक के बाद माकपा श्रमिक संगठन के नेता एवं पूर्व सांसद समन पाठक ने कहा कि पिछले साल 2017 में हुये आंदोलन के कारण 104 दिनों के बंद ने पहाड़ के चाय श्रमिकों की आर्थिक अवस्था पर कड़ा चोट किया था. इस चोट के घाव को भरने के लिये ज्वाइंट फोरम ने 20 प्रतिशत पूजा बोनस की मांग करके कम से कम महलम लगाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन गोजमुमो का श्रमिक संगठन दार्जिलिंग तराई डुआर्स प्लांटेशन लेबर यूनियन ने कोलकाता की बैठक में 15 प्रतिशत पूजा बोनस का समर्थन करके श्रमिकों के घाव एवं चोट पर मिर्ची-नमक डालने का कार्य कर दिया. इसकी जानकारी देते हुये श्री पाठक ने कहा कि चाय बागान श्रमिकों के पूजा बोनस को लेकर बैठक बुलाने की मांग ज्वाइंट फोरम ने किया था.
इस सभी विषयों पर फोरम ने दार्जिलिंग टी एसोसिएशन को दो-दो बार पत्राचार किया. जिसके तहत तीन अक्टूबर को कोलकाता के डालफिन रूम में बैठक बुलाया गया था. पहाड़ के अन्य राजनीतिक दलों व श्रमिक संगठनों को बैठक में भाग लेने से रोकने के लिये दो अक्टूबर को दोपहर करीब दो बजे के आसपास पत्र मिला. फिर भी ज्वाइंट फोरम ने श्रमिकों के हित में हर प्रकार की समस्याओं को भूलकर कोलकाता की बैठक में पहुंचे और मालिक पक्ष के समक्ष अपनी बात रखने का कार्य किया.
उन्होंने बताया कि बैठक में मालिक पक्ष ने पिछले 2017 के 104 दिनों के बंद का जिक्र करते हुये 8.33 फीसदी से ज्यादा पूजा बोनस देने से साफ इंकार कर दिया. जबकि ज्वाइंट फोरम ने 20 प्रतिशत से कम पूजा बोनस स्वीकार नहीं करने का पक्ष रखा. जिसके बाद पहले दिन का बैठक बिना किसी निर्णय के असफल हो गया. चार अक्टूबर की बैठक में पुन: ज्वाइंट फोरम ने 20 प्रतिशत बोनस की मांग को दुहराया.
मालिक पक्ष भी 8.33 फीसदी ही देने की बात करने लगे. इन्हीं बातों पर रात 10 बजे गोजमुमो का श्रमिक संगठन दार्जिलिंग तराई डुआर्स प्लांटेशन लेबर यूनियन के एक नेता ने बैठक में 15 प्रतिशत बोनस देने की मांग रखी. इसके बाद उपस्थित लोगों ने ताली बजाकर उनकी बातों का स्वागत किया. परंतु ज्वाइंट फोरम ने उक्त प्रस्ताव का विरोध करते हुये बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गये.
श्री पाठन ने बताया कि पूजा बोनस के समझौता पत्र में ज्वाइंट फोरम के किसी भी नेता का हस्ताक्षर नहीं है. उन्होंने कहा कि बंद के दौरान हुये श्रमिकों के क्षतिपूर्ति का राज्य सरकार और जीटीए को भुगतान करना होगा. इस बारे में ज्वाइंट फोरम ने जीटीए चेयरमैन विनय तमांग के साथ भेंट करके बातचीत करने का निर्णय भी लिया है.
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