सिलीगुड़ी : तमाम कोशिशों के बाद भी दलालराज कायम
Updated at : 30 Sep 2018 9:09 AM (IST)
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उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज. छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी नहीं बनी बात सिलीगुड़ी : लगातार अभियान के बाद भी उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल से दलालों का आतंक जड़ से समाप्त नहीं हुआ है. इतने दवाब के बाद भी दलाल राज सक्रिय रहने चलने से मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों पर भी सवाल […]
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उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज. छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी नहीं बनी बात
सिलीगुड़ी : लगातार अभियान के बाद भी उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल से दलालों का आतंक जड़ से समाप्त नहीं हुआ है. इतने दवाब के बाद भी दलाल राज सक्रिय रहने चलने से मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं दूसरी ओर उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के आस-पास कुकुरमुत्ते की तरह पैथोलॉजी लैब उग आये हैं. दलालों को चिन्हित कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल परिसर में इनके प्रवेश पर पाबंदी लगाने व लैब पर नियंत्रण की तरकीब मेडिकल कॉलेज प्रबंधन खोजने में जुटी है.
इस दौर में स्वास्थ और शिक्षा का व्यवसाय काफी तेजी से बढ़ रहा है. शिक्षा के भी अधिक स्वास्थ व्यवसाय फल-फूल रहा है. ऐसे में निजी अस्पताल, नर्सिंगहोम व पैथोलॉजी लैब के व्यवसाय को बढ़ाने के लिए इनके प्रबंधन तरह-तरह के फॉर्मूले अपना रहे हैं. इसी के तहत ये लोग अपना एजेंट तैयार करते हैं.
एंबुलेंस चालक से लेकर सरकारी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में लोगों को तैनात किया जाता है. ये लोग मरीज व उनके परिवार को सरकारी अस्पतालों की परिसेवा व फजीहत दर्शा कर मरीजों व उनके परिवार को भड़का कर निजी अस्पताल या नर्सिंगहोम में भर्ती कराते हैं. इसके अतिरिक्त सरकारी अस्पतालों में इलाजरत मरीजों का टेस्ट वगैरह निजी लैब में करवाने को मजबूर करते हैं. हांलाकि सरकारी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में परिसेवा के लिए थोड़ी सी भाग-दौड़ से इनकार नहीं किया जा सकता है.
कई बार चिकित्सकों, कर्मचारियों की लापरवाही का मामला भी सामने आता है. बल्कि इन दलालों को मरीजों से कोई हमदर्दी नहीं होती, बस कमीशन के लिए काम करते हैं. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज है. यहां सिर्फ उत्तर बंगाल से ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार व सिक्किम के अलावा नेपाल, भूटान व बांग्लादेश के भी मरीज इलाज के लिए आते हैं.
उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के आस-पास लैब का एक बाजार सा बन गया है. बल्कि दवा दुकानों में भी लैब खोल लिए गये हैं. जबकि मेडिकल कॉलेज के आस-पास चल रहे कई लैब की रिपोर्ट चिकित्सक स्वीकार तक नहीं करते हैं. इन लैब की रिपोर्ट की सत्यता पर भी सवाल खड़ा है. हांलाकि स्वास्थ विभाग इन पर किसी भी प्रकार की कार्यवायी अब तक नहीं कर पायी है. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन डा. रूद्रनाथ भट्टाचार्य ने बताया कि दलालों को जड़ से समाप्त करने में कुछ समय लगेगा.
इनके खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. छह से अधिक दलालों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है. इन्हें चिन्हित कर मेडिकल कॉलेज परिसर में इनके प्रवेश पर पाबंदी लगाने के लिए सीसीटीवी लगाने का निर्णय लिया गया है. प्रवेश द्वार, कोरीडोर, टिकट काउंटर, आपातकाल विभाग आदि में सीसीटीवी की संख्या बढ़ायी जा रही है.
कुकुरमुत्ते की तरह फैल रहे लैब की बात को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी रिपोर्ट की सत्यता पर कतई विश्वास नहीं किया जा सकता है. इन पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ विभाग व जिला स्वास्थ विभाग से विचार-विमर्श किया जायेगा. नियम का उल्लंघन कर पनप रहे लैब के खिलाफ भी कार्यवायी होगी.
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