अंग्रेजी को दरकिनार कर हिंदी में आगे बढ़ना असंभव

Updated at : 25 Sep 2018 2:37 AM (IST)
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अंग्रेजी को दरकिनार कर हिंदी में आगे बढ़ना असंभव

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी महाविद्यालय के छात्र संसद और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ‘हिंदी का समकाल और हिंदी दिवस’ विषय पर संगोष्ठी तथा ‘हिंदी का अकादमिक भविष्य’ विषय पर विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिता के रूप में परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया. सिलीगुड़ी कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर सुजीत घोष […]

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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी महाविद्यालय के छात्र संसद और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ‘हिंदी का समकाल और हिंदी दिवस’ विषय पर संगोष्ठी तथा ‘हिंदी का अकादमिक भविष्य’ विषय पर विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिता के रूप में परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया.
सिलीगुड़ी कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर सुजीत घोष ने हिंदी के वर्तमान परिदृश्य को पश्चिम बंगाल के संदर्भ में सरकार की ओर से वरीयता प्राप्त पहलू के रूप में स्थापित किया और आगे कहा कि उत्तर बंगाल में हिंदी माध्यम के महाविद्यालयों की स्थापना भविष्य के प्रति हमें आशान्वित करती है.
छात्र संसद के साधारण संपादक अभिजीत बनर्जी ने कहा कि महाविद्यालय में किसी भी तरह के हिंदी भाषा और साहित्य से संबंधित आयोजन महाविद्यालय ही नहीं सिलीगुड़ी क्षेत्र के लिए गौरव की बात है. छात्र संसद की ओर से उन्होंने हर सहयोग का आश्वासन दिया. मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित बानरहट कार्तिक उरांव हिंदी गवर्मेंट कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ अभिजीत सिंह ने कहा कि हिंदी का समकाल यदि चुनौतियां के साथ है, तो कई नई-नई आशाओं से समृद्ध भी है.
बशर्ते अपने हिंदी के समकाल को अंग्रेजी के साथ देखना हमारा लक्ष्य हो. भारत जैसे देश में प्रत्येक राज्य की अपनी भाषाओं के साथ हिंदी अवश्य ही चुनौतीपूर्ण स्थिति में है. अंग्रेजी के साथ भी यही स्थिति है. ऐसे में अंग्रेजी को दरकिनार कर हिंदी में आगे बढ़ पाना संभव नहीं दिखता.रोजगार की दिशा में अध्यापकीय क्षेत्र में अनुवादक, हिंदी अधिकारी जैसे क्षेत्र में बहुत बड़ी संभावनाएं हैं.इसलिए हिंदी का समकाल अवश्य ही हमें भविष्य के प्रति आशान्वित करता है.
विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर अजय कुमार साव ने कहा कि हिंदी का समकाल आजादी पूर्व राष्ट्रीय आयाम से अधिक व्यावहारिक धरातल पर रोजगार की ओर उन्मुख होने के कारण नित नई चुनौतियों का सामना कर रहा है.पत्रकार डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह,इरफान ए आजम,साहित्यकार देवेंद्र नाथ शुक्ल ने भी अपने विचार प्रकट किये. प्रोफेसर रहीम मियां ने हिंदी के वैश्विक समकाल के समक्ष चुनौती प्रकट की.
इस अवसर पर आयोजित काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता के वर्ग ‘क’ में सिलीगुड़ी मॉडल हाई स्कूल के ही 3 छात्रों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान क्रमशः पूजा कुमारी गुप्ता, चेतना शर्मा और अभिषेक झा को प्राप्त हुआ. काव्य आवृत्ति की वर्ग ख प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अभिषेक सिंह, द्वितीय स्थान दीपाली उरांव एवं तृतीय स्थान दीपा मिश्रा को प्राप्त हुआ.
विद्यालय के प्रतिभागियों के बीच आयोजित वक्तव्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सूर्यमणि ठाकुर, द्वितीय स्थान स्मृति झा तृतीय स्थान विनीता साहनी, डॉ राजेंद्र प्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल की छात्राओं को प्राप्त हुए. महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच ‘हिंदी का अकादमिक भविष्य’ विषय पर आयोजित समूह चर्चा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान ईसरत अंजुम, द्वितीय स्थान रश्मि भट्ट एवं तृतीय स्थान नेहा साह को प्राप्त हुआ.
स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता में सर्वोत्तम प्रस्तुति के लिए ईसरत अंजुम को सम्मान से नवाजा गया. श्रुतलेख प्रतियोगिता के वर्ग क में प्रथम स्थान शारदा शिशु तीर्थ की छात्रा ज्योति कुमारी, द्वितीय स्थान भी शारदा शिशु तीर्थ की छात्रा आकृति झा एवं तृतीय स्थान भारती हिंदी विद्यालय के छात्र अमरेस रावत को मिला.
इस अवसर पर डॉ राजेंद्र प्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल की प्रधानाध्यापिका संचिता देवनाथ, डॉ वंदना गुप्ता, अरुणाअंशु शर्मा, डॉ मुन्नालाल प्रसाद, कवयित्री बबीता अग्रवाल, शिक्षक महेश पासवान, चतुरानन झा उपस्थित रहे. कार्यक्रम का कुशल एवं सफल संचालन शिक्षक दीपू शर्मा एवं मनीषा गुप्ता ने किया.
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