चाय श्रमिकों का उत्तरकन्या अभियान फिर फेल, दोनों पक्षों के बीच जमकर हुई धक्का-मुक्की
Updated at : 10 Aug 2018 4:08 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : न्यूनतम मजदूरी तय नहीं होने से गुस्साए चाय श्रमिकों के उत्तरकन्या अभियान को पुलिस ने एक बार फिर से फेल कर दिया है. इस सप्ताह सोमवार को त्रिपक्षीय बैठक फेल होने के बाद चाय श्रमिकों ने मंगलवार से 3 दिनों के लिए चाय बागान बंद का आह्वान किया है पिछले 3 दिनों से […]
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सिलीगुड़ी : न्यूनतम मजदूरी तय नहीं होने से गुस्साए चाय श्रमिकों के उत्तरकन्या अभियान को पुलिस ने एक बार फिर से फेल कर दिया है. इस सप्ताह सोमवार को त्रिपक्षीय बैठक फेल होने के बाद चाय श्रमिकों ने मंगलवार से 3 दिनों के लिए चाय बागान बंद का आह्वान किया है पिछले 3 दिनों से चाय बागान में कोई काम-काज नहीं हो रहा है.
आज बंद के अंतिम दिन सिलीगुड़ी के हिल कार्ट रोड के निकट स्थित इंटक कार्यालय से चाय श्रमिकों ने उत्तरकन्या अभियान के तहत एक रैली निकालने की कोशिश की. जिसे पुलिस ने निकलने से पहले ही रोक दिया.इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर धक्का मुक्की हुई. इससे पहले भी पिछले 2 दिनों से चाय श्रमिक उत्तरकन्या अभियान के तहत रैली निकालने की कोशिश कर रहे हैं.
पुलिस किसी भी रैली को सफल नहीं होने दे रही है . बुधवार को बागडोगरा, माटीगाड़ा, घोषपुकुर, नक्सलबाड़ी आदि इलाके से चाय श्रमिक रैली लेकर उत्तरकन्या पहुंचना चाह रहे थे. उत्तरकन्या को पहले से ही सुरक्षा के दृष्टिकोण से किले में तब्दील कर दिया गया है. आज बृहस्पतिवार को भी चाय श्रमिकों ने जब रैली निकालने की कोशिश की तो उनको पुलिस ने रोक दिया. दिन के करीब 12:30 बजे इंटक कार्यालय से यह रैली निकलनी थी. उससे पहले ही भारी संख्या में इंटक कार्यालय के आस-पास पुलिस बल की तैनाती कर दी गई.
एक तरह से पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया. इंटक नेता आलोक चक्रवर्ती के नेतृत्व में यह रैली निकलनी थी. वह तथा काफी संख्या में चाय श्रमिक इंटक कार्यालय से रैली लेकर जैसे ही हिल कार्ट रोड की ओर बढ़े पुलिस ने उनको रोक दिया. इस दौरान पुलिस के साथ चाय श्रमिकों की झड़प भी हुई. स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा. तब हिलकार्ट रोड इलाके में अफरा-तफरी मच गयी. आखिरकार चाय श्रमिक रैली नहीं निकाल पाए.
राज्य सरकार पर बोला हमला
इंटक नेता आलोक चक्रवर्ती ने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की है और राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला है. श्री चक्रवर्ती ने कहा है कि राज्य में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है. श्रमिकों के गणतांत्रिक अधिकार को कुचला जा रहा है. लोकतंत्र में अपनी मांगे मंगवाने के लिए रैली निकालना श्रमिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है. जिसे राज्य की वर्तमान सरकार कुचल रही है.
इससे पहले कभी भी राज्य में इस तरह की कोशिश नहीं की गई थी. उन्होंने कहा कि 34 वर्ष के वाम मोर्चा के शासनकाल में कभी भी रैली आदि निकालने पर पुलिस ने रोक नहीं लगाई. अब तो ना केवल रैली निकालने पर रोक लगाई जा रही है बल्कि बल प्रयोग भी किया जा रहा है. पुलिस तथा प्रशासन की धमकियां दी जा रही है.
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 3 दिनों से चाय बागान बंद को खुलवाने की पुलिस ने काफी कोशिश की. जिसके लिए चाय श्रमिकों को धमकियां तक दी गई. श्री चक्रवर्ती ने कहा कि चाय श्रमिकों की वाजिब मांग पूरी करनी होगी.
मजदूरी में भारी असमानता
श्री चक्रवर्ती ने कहा कि वर्तमान में चाय श्रमिकों को मात्र 172 रूपये प्रतिदिन की मजदूरी दी जा रही है.इतने कम पैसे में महंगाई के इस जमाने में चाय श्रमिक अपने परिवार के साथ कैसे गुजारा कर सकते हैं. जबकि चाय उद्योग के अधीन आने वाली बॉटलीफ फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी वर्ष 2017 में ही बढ़ा दी गई.
उन्होंने चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी कम से कम 300 रूपये तय करने की मांग की. श्री चक्रवर्ती ने कहा की बॉटलीफ फैक्ट्रियों के श्रमिकों को प्रतिदिन 256.50 रूपये की मजदूरी दी जा रही है. 2017 में राज्य सरकार ने यह फैसला लिया. फिर बागान में काम करने वाले चाय श्रमिकों की क्या गलती है. वर्ष 2017 से ही चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी तय हो जानी चाहिए थी. बॉटलीफ फैक्ट्री के मजदूर तथा चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों के वेतन एवं भत्ते में काफी फर्क है.
चाय श्रमिकों को सिर्फ 172 रूपये प्रतिदिन मिलते हैं. हां 5 प्रतिशत हाउसिंग, 9 राशन तथा 2 प्रतिशत राशि मेडिकल के लिए है. बॉटलीफ फैक्ट्री के मजदूरों को हालांकि यह सुविधा नहीं मिलती. उसके बाद भी चाय बागान में काम करने वाले श्रमिक तथा बॉटलीफ फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी में काफी फर्क है.
राज्य सरकार ने वर्ष 2017 में जिस तरह से बॉटलीफ फैक्ट्री के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी 256. 50 रूपये तय की थी, उसी तरह से चाय बागान श्रमिकों के लिए भी न्यूनतम मजदूरी कम से कम 226.50 रूपये कर देना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. चाय श्रमिकों के अधिकारों को दबाया जा रहा है.
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