हिम्मत का तृणमूल से लेना-देना नहीं : गौतम

Updated at : 07 Aug 2018 2:16 AM (IST)
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हिम्मत का तृणमूल से लेना-देना नहीं : गौतम

सिलीगुड़ी : ‘सुख के सब साथी दुख में न कोय’ कहावत को दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस ने चरितार्थ कर दिया है. भूमाफिया के आरोप में गिरफ्तारी होते ही सिलीगुड़ी के हैवीवेट तृणमूल नेता जय प्रकाश चौहान उर्फ हिम्मत सिंह से पार्टी के नेता मंत्रियों ने किनारा कर लिया है. हांलाकि उसके बयान पर सभी की […]

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सिलीगुड़ी : ‘सुख के सब साथी दुख में न कोय’ कहावत को दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस ने चरितार्थ कर दिया है. भूमाफिया के आरोप में गिरफ्तारी होते ही सिलीगुड़ी के हैवीवेट तृणमूल नेता जय प्रकाश चौहान उर्फ हिम्मत सिंह से पार्टी के नेता मंत्रियों ने किनारा कर लिया है. हांलाकि उसके बयान पर सभी की निगाहें टिकी हुयी है.
सोमवार को राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने साफ कहा कि दार्जिलिंग जिला तृणमूल की सूची में जय प्रकाश चौहान उर्फ हिम्मत का नाम कहीं नहीं है. पार्टी के दूसरे नेता भी हिम्मत से रिश्ता नकार रहे हैं.
राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से निर्देश मिलते ही सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस भूमाफिया से जुड़े लोगों की सूची बनाकर अभियान पर उतरी है. पुलिस ने अबतक 28 लोगों को गिरफ्तार किया है. जबकि जमीन की हेराफेरी में शामिल कई लोगों ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है.
अब तक के अभियान में भूमाफिया के दो बड़ी मछलियों 46 नंबर वार्ड के हैवीवेट तृणमूल नेता जय प्रकाश चौहान उर्फ हिम्मत व पाथरघाटा ब्लॉक युवा तृणमूल अध्यक्ष शंभू वर्मन उर्फ राहुल पुलिस की गिरफ्त में है. इन दोनों को रिमांड पर लेकर पुलिस विभिन्न तथ्य उगलवाने में लगी हुयी है. इनके द्वारा ही भूमाफिया अन्य बड़ी मछलियों को राडार में लाने की कोशिश पुलिस कर रही है. हिम्म्त की गिरफ्तारी के बाद से दार्जिलिंग जिला तृणमूल के कई नेता शहर छोड़ चुके हैं.
पार्टी के अन्य नेताओं ने भी काटी कन्नी, कई साथी अचानक सिलीगुड़ी से हुए गायब सत्तारूढ़ पार्टी के साथ रहकर बढ़ाया अपना साम्राज्य
ऐसे हिम्मत सिंह को राजनीतिक गलियारा शुरू से ही भाता रहा है. वह सत्तारूढ़ पार्टी के साथ रहकर वह अपना सम्राज्य बढ़ाते चला गया. उसने अपनी राजनीति की शुरूआत कांग्रेस से की. वर्ष 2013 में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गया.
तब उत्तर बंगाल विकास मंत्री व वर्तमान में राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव ने तृणमूल का झंडा थामकर उसे पार्टी में शामिल किया था . आरोप है कि उसके बाद से ही जय प्रकाश की हिम्मत काफी बढ़ गयी. चंपासारी, देवीडांगा, मिलन मोड़ व दागापुर सहित शहर के कई हिस्सों में सरकारी व निजी जमीन पर अवैध कब्जा करना उसका धंधा बन गया.
साथ कारोबार करनेवालों की उड़ी नींद
कुछ काफी परेशान दिख रहे हैं. कुछ नेता तो पुलिस की कार्यवायी व हिम्मत के बयान पर टकटकी लगाये बैठे हैं. हिम्मत के बाद अब किसकी बारी है, यह सोच कर भूमाफिया से जुड़े लोगों के पसीने छूट रहे हैं. क्योंकि पुलिस रिमांड पर हिम्मत से कड़ाई के साथ पूछताछ की जा रही है. इसी वजह से उसके साथ काम करने वाले तथा संरक्षण देने वालों की नींद उड़ी हुयी है.उसके कई साथी अचानक सिलीगुड़ी से गायब हो गए हैं.
2015 में हिम्मत सिंह तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरा
जमीन की विक्री कर उसने करोड़ो की संपत्ति बनायी. सत्ताधारी पक्ष के कई दिग्गजों का हाथ सिर पर होने की वजह से ही पुलिस भी जय प्रकाश को नजर अंदाज कर रही थी. लेकिन इस बार मुख्यमंत्री का निर्देश पाते ही पुलिस ने अपनी सूची में जय प्रकाश का नाम सबसे उपर रखा.
गिरफ्तारी के बाद से जय प्रकाश चौहान के करीबी दार्जिलिंग जिला तृणमूल के नेताओं ने सिर्फ दूरियां नहीं बढ़ाई, बल्कि उसके साथ रिश्ते को भी नकार रहे हैं. कई नेताओं का कहना है कि पार्टी सदस्य के तौर पर जानते थे. व्यक्तिगत तौर पर जय प्रकाश के साथ उनका कोई रिश्ता नहीं है. जबकि वर्ष 2015 के सिलीगुड़ी नगर निगम चुनाव में जय प्रकाश चौहान को तृणमूल के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरा गया था.
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