22 चिकित्सकों के स्थान पर सिर्फ सात से चल रहा काम
Updated at : 01 Aug 2018 1:32 AM (IST)
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कालियागंज : कालियागंज स्टेट जनरल अस्पताल शुरू से ही डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है. जहां एक ओर राज्य में बड़े-बड़े सुपर स्पेशलिटी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज बन रहे है. वहीं अन्य अस्पतालों की तरह कालियागंज स्टेट जेनरल अस्पताल भी चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी की कमी से जूझ रहा है. जानकारी मिली है कि […]
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कालियागंज : कालियागंज स्टेट जनरल अस्पताल शुरू से ही डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है. जहां एक ओर राज्य में बड़े-बड़े सुपर स्पेशलिटी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज बन रहे है. वहीं अन्य अस्पतालों की तरह कालियागंज स्टेट जेनरल अस्पताल भी चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी की कमी से जूझ रहा है.
जानकारी मिली है कि 2009 के स्वास्थ्य विभाग के लिखित निर्देश के अनुसार कालियागंज स्टेट जेनरल अस्पताल में 22 चिकित्सकों का पद सृजित है. जबकि इस अस्पताल में सिर्फ सात चिकित्सकों से ही काम चलाया जा रहा है. मरीजों के अतिरिक्त दबाव से परेशान होकर चार विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इस अस्पताल से छुट्टी की मांग को लेकर अधीक्षक प्रकाश राय के पास अपील की है. अस्पताल सूत्रों से पता चला है कि राज्य स्वास्थ्य विभाग से बार-बार अपील के बाद भी इसपर कोई कार्यवाही नहीं की गयी.
इस अस्पताल में जहां सात से आठ जनरल फिजिशियन रहने की बात है, वहीं सिर्फ एक ही फिजिशियन से काम चलाया जा रहा है. इस अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 300 प्रसूता मरीज व 500 आउटडोर मरीज पहुंचते है. लेकिन यहां आज तक इसीजी व आईसीटीसी की सुविधा नहीं है. एकमात्र ब्लड स्टोरेज यूनिट कर्मी व मेडिकल ऑफिसर के अभाव में बंद पड़ा है. उसपर यहां से एक अनुभवी चिकित्सक डॉ. भूपेश बर्मन को जिला स्वास्थ्य अधिकारी बनाकर कुनोर ब्लॉक स्वास्थ्य केंद्र में तबादला कर दिया गया है. इससे समस्या और बढ़ गया है.
कालियागंज स्टेट जनरल अस्पताल के रोगी कल्याण समिति तथा नगरपालिका चेयरमैन कार्तिक पाल ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को अवगत कराया है. हालांकि मरिजों का कहना है कि ये बातें वर्षों से सुनने को मिल रही है. लेकिन जमीनी तौर पर कुछ भी काम नहीं होता.
यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को ज्यादातर रेफर कर दिया जाता है. दिन पर दिन मरीजों का दबाव बढ़ रहा है. वहीं सभी विभागों में चिकित्सकों की संख्या घटती जा रही है. लोगों का आरोप है कि बड़ी कोई दुर्घटना हो या बड़ी बिमारी या फिर प्रसूता महिला अस्पताल प्रबंधन तुरंत रायगंज जिला अस्पताल में रेफर करके अपनी पलड़ा झाड़ लेते है.
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