सिलीगुड़ी : गोरखालैंड है जरूरी : विमल गुरुंग

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मुझे छोड़कर बने साझा मंच, पर आंदोलन हो
अलग राज्य की मांग जिंदा रखने के लिए छिपा हूं
गोरामुमो अपने 1986 के आंदोलन को याद करे
कोई आगे नहीं आया, तो गोरखालैंडवाले देखते रह जायेंगे
सिलीगुड़ी : गोजमुमो के भूमिगत नेता विमल गुरुंग ने एक बार फिर से अलग गोरखालैंड राज्य के लिए आंदोलन छेड़ने की अपील की है. किसी अज्ञात स्थान पर छिपे इस नेता ने शुक्रवार को एक और ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी करके पहाड़ के सभी राजनीतिक दलों से एक होकर ज्वाइंट फोरम बनाने और गोरखालैंड की मांग को लेकर लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया. करीब पांच मिनट के ऑडियो टेप में विमल गुरुंग ने साफ कहा है कि वह राज्य सरकार की दमनकारी नीति से डरे नहीं हैं. वह सरकार और पुलिस से भाग कर अपनी जान नहीं बचाना चाहते, बल्कि गोरखालैंड की मांग को जिंदा रखने के लिए जीवित रहना चाहते हैं.
विमल गुरुंग ने कहा कि उन्होंने हमेशा जनता और गोरखा जाति के लिए काम किया. वह भी चाहते, तो आंदोलन नहीं करके जीटीए चीफ बने रहते.
लेकिन मिट्टी और जाति के लिए उन्होंने अपने पद पर बने रहने से अच्छा गोरखालैंड आंदोलन करना समझा. उन्होंने पहाड़ के सभी राजनीतिक दलों खासकर गोरामुमो तथा गोरखा लीग से आगे आने की अपील की. उन्होंने कभी अपने सहयोगी रहे डॉ हर्क बहादुर छेत्री से भी गोरखालैंड के लिए आंदोलन संगठित करने का आह्वान किया.
उन्होंने कहा कि गोरखालैंड की मांग काफी पुरानी है. 1200 से ज्यादा लोग इस आंदोलन में शहीद हो चुके हैं. अगर गोरखालैंड की मांग पूरी नहीं हुई तो यह शहादत बेकार चली जायेगी.
उन्होंने गोरामुमो को वर्ष 1986 के आंदोलन की भी याद दिलायी. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि गोरामुमो ने ही 1986 में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग पर आंदोलन किया था. एक बार फिर समय आ गया है कि गोरामुमो अन्य पार्टियों के साथ आगे आये और गोरखालैंड आंदोलन को नये सिरे से संगठित करे.
जारी किये गये ऑडियो के मुताबिक, विमल गुरुंग गोरखालैंड आंदोलन का नेता भी नहीं रहना चाहते हैं. उन्होंने कहा है कि पहाड़ के सभी राजनीतिक दल एक हों. विमल गुरुंग को छोड़कर एक संयुक्त फोरम का गठन करें और गोरखालैंड आंदोलन की मांग को लेकर लड़ाई करें.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार बोडोलैंड की मांग कर रहे आंदोलनकारियों से इन दिनों बातचीत कर रही है, जबकि गोरखालैंड आंदोलनकारियों से बातचीत की कोई पहल नहीं की जा रही है.
क्योंकि कोई आंदोलन का नेतृत्व करनेवाला नहीं है. इसी वजह से भारत सरकार किसी से बातचीत नहीं कर पा रही है. किसी न किसी को आगे आकर आंदोलन का नेतृत्व करना होगा. नहीं तो जिस तरह से तेलंगाना बन गया, उसी तरह से बोडोलैंड भी बन जायेगा और गोरखालैंड की मांग करनेवाले लोग बस देखते रह जायेंगे.
विमल गुरुंग ने कहा है कि वह गोरखा जाति की लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्हें अपनी जान की परवाह नहीं है. पिछले साल उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से गोरखालैंड आंदोलन की शुरुआत की थी. लेकिन राज्य सरकार ने आंदोलन को कुचलने का काम किया. उनके ऊपर झूठे मुकदमे लाद दिये गये. उनके समर्थकों को पुलिस ने गोलियां मारीं.
कई घरों में आग लगा दी गयी. उनके कई समर्थकों को जेल में बंद कर दिया गया है. वह पुलिस से नहीं डरते हैं. लेकिन गोरखालैंड का आंदोलन जिंदा रहे, इसीलिए वह जीवित रहना चाहते हैं. राज्य सरकार एनकाउंटर के बहाने उन्हें जान से मारने की कोशिश कर रही है. इसी कारणवश छिपकर रह रहे हैं. गोजमुमो नेता ने अपने कुछ पुराने साथियों पर भी हमला बोला है.
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें धोखा दिया और आज अपनी झोली में भरने में लगे हुए हैं. उनका इशारा कभी अपने निकटतम सहयोगी रहे तथा वर्तमान में जीटीए चेयरमैन विनय तमांग की ओर था. विमल गुरुंग ने कहा कि ऐसे लोगों ने सिर्फ उन्हें नहीं, बल्कि पूरी गोरखा जाति को धोखा दिया है.
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