महिला आयोग का दावा : महिला कैदियों की संख्या में आयी कमी

Published at :07 Apr 2018 5:28 AM (IST)
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महिला आयोग का दावा : महिला कैदियों की संख्या में आयी कमी

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने सिलीगुड़ी सहित विभिन्न जेलों का किया दौरा ढांचागत सुविधाओं का लिया जायजा अधिकारियों के साथ भी की बैठक कहा : पिछले आठ महीने में नारी तस्करी नहीं सिलीगुड़ी. राज्य के विभिन्न जेलों में महिला कैदियों की संख्या में कमी आई है. इससे जाहिर है कि महिलाओं द्वारा अपराध के […]

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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने सिलीगुड़ी सहित विभिन्न जेलों का किया दौरा
ढांचागत सुविधाओं का लिया जायजा
अधिकारियों के साथ भी की बैठक
कहा : पिछले आठ महीने में नारी तस्करी नहीं
सिलीगुड़ी. राज्य के विभिन्न जेलों में महिला कैदियों की संख्या में कमी आई है. इससे जाहिर है कि महिलाओं द्वारा अपराध के मामले भी कम हुए हैं.
यह बातें राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नीला गांगुली ने कही है. शुक्रवार को उन्होंने सिलीगुड़ी केंद्रीय संशाधनागार का दौरा किया. उन्होंने जेल के दौरे के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि सिलीगुड़ी के साथ ही दार्जिलिंग, कलिम्पोंग तथा कर्सियांग के जेलों में महिला कैदियों की संख्या में काफी कमी आई है. यह एक अच्छा संकेत है.उन्होंने विभिन्न जेलों का दौरा कर महिला कैदियों से बातचीत भी की है और उन की विभिन्न समस्याओं पर गौर करने का आश्वासन दिया है.
श्रीमती गांगुली ने आगे बताया कि वह अपने उत्तर बंगाल के दौरे के दौरान एक ओर जहां विभिन्न जेलों का निरीक्षण करने पहुंचीं वहीं उन्होंने विभिन्न चाय बागानों का भी दौरा किया है. उन्होंने चाय श्रमिकों के साथ बातचीत की है और उनकी समस्याएं सुनी है. महिला आयोग की अध्यक्ष ने माना कि चाय श्रमिकों की काफी समस्याएं हैं . इसके लिए राज्य सरकार के साथ-साथ चाय बागान मालिकों को भी पहल करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि चाय श्रमिकों में जानकारी की कमी है.
राज्य सरकार ने चाय श्रमिकों के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है.र संभवत: जानकारी के अभाव में चाय श्रमिक इन योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. इसके लिए राज्य सरकार को भी पहल करनी होगी. चाय बागान मालिक तथा चाय श्रमिकों से संबंधित विभिन्न ट्रेड यूनियन के नेताओं को चाय बागान में जाकर श्रमिकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देनी होगी. राज्य सरकार भी इस दिशा में पहल कर सकती है. चाय श्रमिकों को जब सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलेगी तो वह इसका लाभ भी उठा सकेंगे.
श्रीमती गांगुली ने उत्तर बंगाल में नारी तस्करी के मामले में भी कमी आने की बात कही. उन्होंने कहा कि पिछले 8 महीने के दौरान सरकारी तौर पर नारी तस्करी के मामले दर्ज नहीं हुए हैं. ऐसे महिलाओं के साथ जोर जबरदस्ती करने की छिटपुट घटनाएं हो सकती है.
उन्होंने आगे कहा कि कई बार इस क्षेत्र की महिलाएं अपनी मर्जी से काम के लिए देश के विभिन्न भागों में जाती हैं. ऐसे मामलों को नारी तस्करी का रूप नहीं दिया जा सकता. जो महिलाएं काम के लिए बाहर जाती हैं वह स्वेच्छा से ही जाती हैं. जोर जबरदस्ती बाहर ले जाने के मामले कम पाए गए हैं. यह अलग बात है कि काम पर जाने के बाद कुछ युक्तियां तथा महिलाएं नारी तस्करी गिरोह की शिकार हो गई हैं. कई बार ऐसा भी देखा गया है कि महिलाएं काम के लिए बाहर तो गई हैं, लेकिन लौटकर नहीं आई हैं. इस तरह की शिकायतें जब थाने में दर्ज कराई जाती है तो पुलिस मामले की जांच करती है.
अगर महिला आयोग में भी कोई मामला आएगा तो वह इसकी जांच करेंगी. इससे पहले उन्होंने सिलीगुड़ी जेल के अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की. उन्होंने जेल में महिला कैदियों की विभिन्न समस्याओं पर अधिकारियों से बातचीत की. उनकी राय के आधार पर वह राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपेंगी. जेल दौरे के दौरान श्रीमती गांगुली ने कई महिला कैदियों से भी बातचीत की. महिला कैदियों को जेल में रहने में कोई परेशानी ना हो इसके लिए ढांचागत सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए. इस पर भी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने जोर दिया है .
उन्होंने कहा कि कोलकाता जाकर वह शीघ्र ही राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगी उल्लेखनीय है कि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष पिछले कुछ दिनों से उत्तर बंगाल दौरे पर हैं. उन्होंने सिलीगुड़ी आने से पहले डुवार्स के कई चाय बागानों का दौरा भी किया था. उन्होंने चाय बागान श्रमिकों के साथ बातचीत भी की थी.
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