दिनदहाड़े करीब दस फीट दूर से गैंडे को मारी थी गोली

Published at :09 Feb 2018 3:41 AM (IST)
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दिनदहाड़े करीब दस फीट दूर से गैंडे को मारी थी गोली

पूछताछ में तस्करों ने किया कई तथ्यों का खुलासा अरूणाचल निवासी आरोपी रिभा पेशे से है शिकारी वन विभाग के अधिकारियों की भी उड़ी नींद जलपाईगुड़ी : शिकारी ने मादा गैंडे को बेहद करीब से गोली मारी थी. गैंडे की हत्या के मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों से पूछताछ में वन विभाग को पता चला […]

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पूछताछ में तस्करों ने किया कई तथ्यों का खुलासा

अरूणाचल निवासी आरोपी रिभा पेशे से है शिकारी
वन विभाग के अधिकारियों की भी उड़ी नींद
जलपाईगुड़ी : शिकारी ने मादा गैंडे को बेहद करीब से गोली मारी थी. गैंडे की हत्या के मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों से पूछताछ में वन विभाग को पता चला है कि शार्प शूटर ने मात्र 10 फीट की दूरी से गैंडे को गोली मारी थी. हत्या में थ्री-नॉट-थ्री राइफल का इस्तेमाल किया गया था. सबसे हैरानी वाला जो तथ्य सामने आया है कि शिकारियों ने दिन दहाड़े मादा गैंडे को गोली मारी थी. इसलिये यह सवाल भी शिद्दत से उभरा है कि आखिर दिन में हत्या की घटना वनकर्मियों की कड़ी निगरानी के बीच कैसे हो गयी? इसको लेकर वन विभाग के उच्च अधिकारी पशोपेश में हैं. उल्लेखनीय है कि शिकार के आरोपी सभी छह को मदारीहाट इलाके से एक बस से गिरफ्तार किया गया था. मंगलवार को इनकी गिरफ्तारी के साथ इनके पास से गैंडे की सींग और हत्या में प्रयुक्त आग्नेयास्त्र भी बरामद किये गये. गिराह में एक शिक्षक समेत तृणमूल के एक कार्यकर्ता के भी संलिप्त पाये गये हैं.
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल शार्प शूटर अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले का निवासी मारतो रिभा पेशेवर शिकारी है. वह केवल दस फीट दूर से किसी वन्य पशु को मारने की कुव्वत रखता है. उसने पूछताछ में कबूल किया है कि बचपन से ही उसने वन्य पशुओं की हत्या का काम शुरु कर दिया था. इस बार वह मोटी रकम के एवज में गैंडे के शिकार के लिये लाया गया था. तीन माह पूर्व ही हत्या का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था. डुवार्स के बानरहाट में यह योजना बनी थी. उस योजना में तृणमूल के आरोपी नेता भी शामिल थे. शिकारियों ने तय किया कि कुहासे के चलते उन्हें रात में शिकार करने में परेशानी हो सकती है. इसलिये उन्होंने दिन दोपहर को ही हत्या करने की योजना बनायी. इसके साथ ही वन विभाग में वन रक्षकों की कमी पर एक बार और ध्यान गया है. अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश में हैं कि आखिर थ्री-नॉट-थ्री की गोली इन शिकारियों के हाथ कैसे लगी.
राज्य के मुख्य वनपाल (वन्य प्राणी) रविकांत सिन्हा ने बताया कि इस घटना के बाद जलदापाड़ा के अलावा गोरुमारा, बक्सा, महानंदा, बक्सा, महानंदा समेत उत्तर बंगाल के सभी वनांचलों में निगरानी तेज करने के निर्देश दिये गये हैं. स्थानीय लोगों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. गौरतलब है कि संयुक्त निगरानी में शिथिलता आने से ही काठ तस्करी के साथ शिकारी गिरोहों की गतिविधियां बढ़ गयी हैं. विभाग अपने खाली पदों को भरने के अलावा स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से निगरानी में सहयोग पर भी जोर दे रहा है.
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