सिलीगुड़ी के जनता नगर में छायीं परिस्कार बउदी

Published at :03 Feb 2018 5:43 AM (IST)
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सिलीगुड़ी के जनता नगर में छायीं परिस्कार बउदी

सिलीगुड़ी : एक नाबालिग छात्रा की हत्या को लेकर सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन वार्ड नंबर 44 स्थित जनता नगर इन दिनों चर्चा में है. यहां पुलिस की पहरेदारी जारी है और दिन ही बड़े पुलिस अधिकारियों और नेताओं का आना जाना जरूरी है. पूरे सिलीगुड़ी में जनता नगर का नाम इसी गलत वजहों से […]

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सिलीगुड़ी : एक नाबालिग छात्रा की हत्या को लेकर सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन वार्ड नंबर 44 स्थित जनता नगर इन दिनों चर्चा में है. यहां पुलिस की पहरेदारी जारी है और दिन ही बड़े पुलिस अधिकारियों और नेताओं का आना जाना जरूरी है. पूरे सिलीगुड़ी में जनता नगर का नाम इसी गलत वजहों से चर्चा में है. इस इलाके का माहौल अभी भी तनावपूर्ण है और लोग डरे सहमे हैं.अधिकांश लोग अपने घरों में ही रह रहे हैं और किसी से बातचीत करना भी पसंद नहीं करते. इस माहौल के बीच भी जनता नगर की एक महिला ऐसी भी है जो रोज सुबह कुदाल लेकर नाले की सफाई के लिए निकल पड़ती हैं. पूरे इलाके के लोग बनको ‘परिस्कार बउदी’ कहते हैं.

परिस्कार बउदी एक बांग्ला शब्द है. हिंदी में आप इसको साफ-सफाई वाली भाभी कह सकते हैं. लम्बे समय से इलाके की साफ सफाई की जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठाने के कारण इलाका वासियों ने उन्हें परिस्कार बउदी की उपाधि दी है. ऐसे उनका नाम कल्पना दास है. वह सिलीगुड़ी नगर निगम के 44 नंबर वार्ड के जनता नगर में लगभग 30 सालों से रह रही है. उनके पति स्वपन दास पेशे से व्यवसायी है. कल्पना दास लम्बे समय से अपने इलाके की साफ-सफाई का बहुत ख्याल रखती हैं. इलाके में कचरा नजर आते ही हाथों में कुदाल लेकर सफाई करने निकल पड़ती है. साफ सफाई अब उनका नशा बन चुका है. उन्होंने बताया कि वे जबसे यहां रहती है तभी से यहां की सफाई खुद करती हैं.

गंदगी दिखते ही सफाई में जुट जाती हैं कल्पना दास
नगर निगम के सफाईकर्मी कम ही नजर ही नहीं आते है. महीने में एक-आध बार आते है, तो भी सफाई अच्छे से नहीं करते है. वार्ड पार्षद से शिकायत करने का भी कोई फायदा नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि अपने घर के आसपास के नालों में कचरा देखते ही कुदाल लेकर वह खुद ही सफाई कर देती है. श्रीमती दास ने बताया कि पहले वह अपने आसपास गंदगी बर्दाश्त नहीं कर पाती थीं. वह जब भी गंदगी देखतीं उसको साफ कर देती थी. धीरे-धीरे घर से शुरू हुआ यह दायरा बढ़ता गया.
अब तो आलम यह है कि रास्ता चलते भी गंदगी पर नजर पड़ जाये तो पहली कोशिश उसके सफाई की होती है.उन्होंने कहा कि शुरू में परिवार वालों को थोड़ा अटपटा लगा,लेकिन धीरे-धीरे सभी लोग उनका सहयोग करने लगे. उन्होंने आमलोगों से भी साफ-सफाई के प्रति जागरूक रहने की अपील की है और कहा है कि उनका यह अभियान आगे भी जारी रहेगा.
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