इस बार तीस्ता में मिलीं मरी मछलियां, प्रशासन परेशान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 Jan 2018 4:27 AM (IST)
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संग्रह करने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़ जिला मत्स्य विभाग ने शुरू की जांच जांच के लिए भेजे गये पानी के नमूने जलपाईगुड़ी : एक बार फिर तीस्ता में बड़ी तादाद में मरी मछलियां मिलने से प्रशासन के माथे पर बल पड़ गया है. सोमवार को पहली बार यह घटना सामने आयी जबकि मंगलवार […]
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संग्रह करने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़
जिला मत्स्य विभाग ने शुरू की जांच
जांच के लिए भेजे गये पानी के नमूने
जलपाईगुड़ी : एक बार फिर तीस्ता में बड़ी तादाद में मरी मछलियां मिलने से प्रशासन के माथे पर बल पड़ गया है. सोमवार को पहली बार यह घटना सामने आयी जबकि मंगलवार तक प्रशासन इस बारे में अंधेरे में ही रहा. मंगलवार को इसकी जानकारी मीडिया के जरिये मिली तो जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ही मामले की जांच के आदेश दिये. जलपाईगुड़ी सदर ब्लॉक के मंडलघाट जीपी अंतर्गत तीस्ता के मोहना के पार नदी के 12 नंबर स्पॉर बांध संलग्न तीस्ता के दो किमी के दायरे में मरी मछलियों को तैरते हुए लोगों ने देखा. उसके बाद तो स्थानीय लोगों ने मरी मछलियों का संग्रह करना शुरु किया.
कई लोगों को तो इन विषाक्त पानी से मरी मछलियों को बाजार ले जाकर बेचा भी. कुल कितनी मछलियां मरी हैं इसका पक्का हिसाब तो मत्स्य विभाग के पास नहीं है लेकिन एक सामान्य आकलन के मुताबिक उस रोज 60-75 किलो मरी मछलियों का संग्रह किया गया है. उल्लेखनीय है कि कीटनाशकों का प्रयोग कर वर्ष 2011, 2012, 2015 के मई में जलपाईगुड़ी शहर संलग्न करला नदी में कीटनाशक एंडोसलफान का प्रयोग कर काफी तादाद में मछलियां मरी थीं. उस समय करला नदी की सफाई कर उसमें तीस्ता बैरेज से पानी छोड़ा गया था. नदी का पानी सामान्य होने में उस समय कई माह लगे थे.
जिलाधिकारी रचना भगत ने बताया कि उन्होंने मत्स्य विभाग को कहा है ताकि मृत मछलियों और पानी का नमूना जांच के लिये भेजा जाये. पूरे मामले की जांच के लिये कहा गया है. मरी मछलियों को बाजार में न बेचा जाये इसके लिये मत्स्य विभाग को जरूरी प्रचार के लिये कहा गया है. वहीं, जिला मत्स्य विभाग के सहायक प्रभारी आशीष साहा ने बताया कि मौके पर विशेषज्ञों को भेजा गया है. मृत मछलियों और विषाक्त पानी के नमूने का संग्रह किया गया है. स्थानीय बाजार में प्रचार भी किया गया है ताकि कोई मरी हुई मछलियां नहीं खरीदे. जलपाईगुड़ी जिला मत्स्य उत्पादक उन्नयन निगम के कार्यकारी अधिकारी सोमनाथ चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने अपने एक सहयोगी अधिकारी के साथ जाकर घटनास्थल का जायजा लिया है. नमूनों का संग्रह किया गया है.
जानकारी अनुसार मंगलवार की सुबह यह खबर फैली कि 12 नंबर अस्थायी बांध के पास काफी संख्या में मरी मछलियां तैर रही हैं. मौके पर जाकर देखा गया कि बांध के पत्थर के दोगे में मृत बाम, टाकी, फोली, एक से डेढ़ किलो की बोआल, बोरोली, बाटा मछलियां अटकी हैं जिन्हें स्थानीय लोग संग्रह कर रहे हैं. उस रोज 15-18 किलो मृत मछलियों का संग्रह किया गया. गोमस्तपाड़ा के मछुआरे मिन्टू दास ने बताया कि सोमवार की सुबह छह बजे से इस इलाके में दो किमी नदी के दायरे में मृत मछलियां तैरती हुई देखीं गयीं. सोमवार की सुबह से लेकर मंगलवार की दोपहर 12 बजे तक करीब 45-50 किलो मछलियों का संग्रह किया गया. उन्होंने कहा कि जिन्होंने मछलियों को इस तरह बेरहमी से मारा है उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिये. ऐसे लोगों के चलते उनके जैसे मछुआरों की जीविका संकट में है. एक अन्य मछुआरे जयनुल हक ने बताया कि सेामवार को बहुत से लोग तीस्ता से करीब साढ़े तीन किलो वजन की बोआल, 100-150 किलो वजन की कांकड़ा मछलियों का संग्रह किया है. गोमस्तपाड़ा के ही निवासी रंजीत राय ने बताया कि सोमवार की सुबह से ही बहुत से लोगों ने इन मरी मछलियों को जलपाईगुड़ी स्टेशन बाजार में जाकर बेचा है. लेकिन जब मंगलवार को जाकर देखा गया तो पत्थरों के दोगे से सड़ी हुई मछलियों की गंध मिल रही थी.
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