दहशत, हिंसा, आपदा और बिछोह दे गया 2017

Published at :01 Jan 2018 8:24 AM (IST)
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दहशत, हिंसा, आपदा और बिछोह दे गया 2017

रायगंज. वर्ष 2017 का अवसान हो गया और नववर्ष 2018 का आगमन एक नयी उम्मीद व उत्साह लेकर आया है. लेकिन बीते वर्ष को विदा करते हुए उत्तर दिनाजपुर जिलावासी उन पलों को नहीं भूले, जिन्होंने उन्हें दहशत, आपदा और बिछोह का एहसास कराया. 2017 में इतना कुछ हुआ कि इसे भुलाना जिले के लोगों […]

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रायगंज. वर्ष 2017 का अवसान हो गया और नववर्ष 2018 का आगमन एक नयी उम्मीद व उत्साह लेकर आया है. लेकिन बीते वर्ष को विदा करते हुए उत्तर दिनाजपुर जिलावासी उन पलों को नहीं भूले, जिन्होंने उन्हें दहशत, आपदा और बिछोह का एहसास कराया. 2017 में इतना कुछ हुआ कि इसे भुलाना जिले के लोगों के लिए आसान भी नहीं है. अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि 2018 शुभ-शुभ गुजरे.
दहशत
जनवरी, 2017 की सुबह के सात बजे की बात है. रायगंज शहर की इंदिरा कॉलोनी की निवासी नतून पोद्दार की नींद एक भीषण दहाड़ से उचट गयी. खिड़की खोली तो सामने तेंदुआ देखकर होश काफूर हो गया. बाघ-बाघ का शोर मच जाने के बाद लोगों की अपार भीड़ जुटी. डुआर्स से 200 किमी दूर इस क्षेत्र में तेंदुए के दर्शन से लोग हैरत में थे. लोगों के शोर शराबे से राह भटक आया तेंदुआ भी चकित था.
वह भी असमंजस में पड़ कभी इस घर में तो कभी उस घर में दौड़ लगाता रहा. सूचना मिलने पर पशु प्रेमी संगठन पिपल फॉर ऐनिमल के सदस्य मौके पर पहुंचे. मच्छरदानी के सहारे उसे पकड़ने के फेर में संगठन के चार सदस्य गंभीर रूप से जख्मी हुए. आखिर में तेंदुआ एक खाली कमरे में घुस गया जिसके बाद उसे वनकर्मियों ने पिंजरे में कैद कर लिया. तब जाकर तेंदुए का आतंक समाप्त हुआ. बाद में वनकर्मियों ने उसे सुकना के जंगल में ले जाकर छोड़ा.
9 जुलाई, 2017 चोपड़ा में समाज विरोधियों की गोली से एक भाजपा कार्यकर्ता की मौत के प्रतिवाद में जिले में हड़ताल थी. गैरसरकारी वाहनों का परिचालन ठप था. शहर में सन्नाटा पसरा हुआ था. रायगंज का नगरपालिका बस स्टैंड सुनसान. इसी मौके का फायदा उठाते हुए समाज विरोधियों ने चार आदिवासी महिलाओं से सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया.
इस जघन्य अपराध के विरोध में आदिवासियों ने 14 जुलाई को शहर में सशस्त्र प्रतिवाद रैली निकाली. नगरपालिका बस स्टैंड इलाके में जैसे ही रैली पहुंची वहां आदिवासियों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने वहां जमकर कोहराम मचाया. आईएनटीटीयूसी के कार्यालय को फूंक दिया गया. उग्र भीड़ ने स्टैंड में रखी मोटरसाइकिलों और चौपहिया वाहनों तक को आग के हवाले कर दिया. इस सामूहिक हिंसा के प्रतिवाद में 15 जुलाई को अघोषित बंद के चलते रायगंज शहर में दूसरे रोज भी सन्नाटा पसरा रहा. जातीय हिंसा व नफरत के माहौल ने इस शहर को ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर बंगाल को हिलाकर रख दिया.
हिंसा
14 मई 2017 को रायगंज नगरपालिका चुनाव को लेकर शहर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. अचानक रायगंज के कोरोनेशन हाई स्कूल में दो विरोधी गुटों के संघर्ष से शहर गर्म हो उठा.
बम व गोलियों की तड़तड़ाहट से शहर दिन भर कांपता रहा. पुलिस के सामने ही बम व गोलियों से डरकर मतदाता भागने पर मजबूर हुए. यहां तक कि इस तांडव के चलते नगरपालिका के चेयरमैन मोहित सेनगुप्त भी अपना वार्ड छोड़कर बाहर आने को मजबूर हुए. कांग्रेस और वाममोर्चा ने वोट बॉयकाट कर दिया, लेकिन भाजपा अंत तक मैदान में डटी रही. भाजपा के महिला मोर्चा ने धिक्कार रैली निकालकर कानून व व्यवस्था पर सवाल खड़े किये. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस तरह का मतदान उन्होंने पहले कभी नहीं देखा.
प्राकृतिक आपदा
14 अगस्त 2017 की सुबह पहाड़ में लगातार बारिश के चलते उत्तर बंगाल में बाढ़ का संकट सामने था. तीस्ता, तोर्षा, महानंदा जैसी नदियां खतरे के निशान से उपर बह रहीं थीं. जिले के इस्लामपुर महकमा का वृहद इलाका बाढ़ की चपेट में था. बाढ़ ने करणदिघी, इस्लामपुर, चोपड़ा समेत अनगिनत गांव जलमग्न हो गये. हजारों लोग बेघर हो गये.
तब कुलिक नदी उफनाकर बांध के समानांतर बह रही थी. लोग अपने अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की तलाश में इधर-उधर भागने लगे. बांध में दरार के चलते नदी का पानी शहर में घुस आया. शहर के 10 वार्ड जलमग्न हो गये. एनएच-10 के उपर से बाढ़ का पानी बह रहा था.
आवागमन ठप हो जाने से सामान्य जीवन पर विराम सा लग गया. इटाहार ब्लॉक का अधिकतर हिस्सा जलमग्न हो गया. इस प्राकृतिक आपदा से करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया. हालांकि प्रशासन बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने में नाकाम रहा लेकिन स्वयंसेवी संगठन पीड़ितों की मदद को जी जान से जुटे रहे. भोजन व शिविरों का प्रबंधन किया गया.
बिछोह : करीब नौ साल से दिल्ली के अपोलो अस्पताल के केबिन में भर्ती पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रियरंजन दासमुंशी का 20 नवंबर को निधन हो गया. इससे जिले में शोक की ऐसी लहर चली जिससे लगा कि उत्तर दिनाजपुर ने अपने एक अभिभावक सरीखे नेता को खो दिया. 7 जुलाई, 2008 को चुनाव बाद उनके गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर उन्हें विशेष विमान से दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया. कोमा की हालत में बाद में उन्हें अपोलो अस्पताल में स्थानांतरित किया गया.
उसके बाद से नौ साल तक वे 2605 नंबर केबिन में ही अंतिम समय तक रहे. प्रियरंजन दासमुंशी के निधन को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदेश व देश के लिये एक विराट क्षति बताया. 21 नवंबर की शाम को हेलीकाप्टर से कोलकाता लाये जाने पर अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिये रायगंज और कालियागंज की सड़कों पर लोगों की भीड़ उमड़ी. रायगंज के बंदर श्मशानघाट में राष्ट्रीय सम्मान के साथ प्रियदा का दाह संस्कार हुआ.
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