गुणग्राही बनें, सोच सकारात्मक रखें : सतपालजी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Dec 2017 7:38 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : बाहरी कर्मकांडों से मन की चंचलता समाप्त नहीं होती. मन को वश मे करने के लिए तत्त्वज्ञान और आत्मज्ञान आवश्यक है. हमें गुणग्राही होना चाहिए और सोच सकारात्मक रखनी चाहिए. हमारे ऋ षि-मुनि, मनीषी सभी सकारात्मक सोचवाले रहे हैं. यही कारण है कि उनकी छवि को घर में रख कर हम पूजा करते […]
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सिलीगुड़ी : बाहरी कर्मकांडों से मन की चंचलता समाप्त नहीं होती. मन को वश मे करने के लिए तत्त्वज्ञान और आत्मज्ञान आवश्यक है. हमें गुणग्राही होना चाहिए और सोच सकारात्मक रखनी चाहिए. हमारे ऋ षि-मुनि, मनीषी सभी सकारात्मक सोचवाले रहे हैं. यही कारण है कि उनकी छवि को घर में रख कर हम पूजा करते हैं. ये बातें सद्भावना सम्मेलन के पहले दिन भक्तों को संबोधित करते हुए सतपालजी महाराज ने कहीं.
महाराज जी ने कहा कि हरि का भजन केवल मनुष्य योनि में ही हो सकता है. संसार मे अनेक योनियां हैं, वे केवल भोग योनियां हैं. सुबह से शाम तक उन योनियों मे जीव केवल पेट के लिए लगा रहता है. उन योनियों मे जीव न तो कर्म कर सकता है न ही भगवान का भजन कर सकता है. भजन सिर्फ मनुष्य योनि में संभव है. शनिवार को सम्मेलन का शुभारंभ सतपालजी महाराज ने दीप जलाकर किया. मंच में उनके साथ दिव्य परिवार के सदस्य भी आसीन थे, जहां सभी का फूल माला और खादा से अभिनन्दन किया गया.
सम्मेलन में संस्था के सांस्कृतिक विभाग के कलाकारों द्वारा विभिन्न भाषाओं मे भजन- कीर्तन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किये गये. विभिन्न तीर्थस्थानों से आये साधु-संतों में राजस्थान से आयी महात्मा कौशल बाई, नेपाल से आयी महात्मा पुनित बाई और महात्मा चमेली बाईजी ने भी सम्मेलन को संबोधित किया.
शनिवार को सुबह से ही सद्भावना सम्मेलन परिसर अत्यन्त व्यस्त रहा. सुबह दस बजे सतपालजी ने मानव सेवा दल की परेड का निरीक्षण किया और स्वयंसेवकों से सलामी ली. ड्रिल और बैंड का प्रदर्शन भी किया गया. मानव सेवा दल के इस प्रदर्शन से प्रसन्न सतपालजी ने कहा कि देश सेवा के लिए युवाओं को इसी तरह आगे आना चाहिए. बच्चे एक खेत के समान हैं. उनके जीवन में जो बोओगे आगे वही पाओगे. सद्भावना सम्मेलन से बच्चों के अंदर वह अच्छे संस्कार रोपित करना चाहते हैं, ताकि वे देश के अच्छे नागरिक बन सकें.
सतपालजी ने मानव धर्म मन्दिर मे नयी गौशाला का भी उद्घाटन किया. इसके बाद उन्होंने अपने भक्तों को चरण दर्शन का सौभाग्य प्रदान किया. आश्रम में आये भक्तों ने मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा प्रकाशित साहित्य और उत्पादित आयुर्वेदिक औषधियों व अन्य उत्पादों की खरीदारी की.
मन को वश में करने के लिए तत्वज्ञान और आत्मज्ञान आवश्यक
हरि का भजन केवल मनुष्य कर सकता है
अन्य योनियां तो केवल पेट भरने के लिए हैं
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