इसके बाद तृणमूल पार्षदों ने निगम के कमिश्नर सोनम वांग्दी भुटिया से मुलाकात कर इस मामले की शिकायत की. विरोधी दल नेता रंजन सरकार ने इस मामले को लेकर माकपा मेयर अशोक भट्टाचार्य पर जोरदार हमला किया है. उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी नगर निगम अनाथ है. मेयर को शहर के प्रथम नागरिक का दर्जा दिया जाता है. जबकि सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य स्वयं को अमेरिका के राष्ट्रपति समझने लगे हैं. वे महीने के 15 दिन शहर के बाहर ही रहते हैं. विदेश दौरा भी करते हैं. शहर की कोई चिंता उन्हें नहीं है.
मेयर की देखादेखी निगम के कर्मचारी भी लापरवाह हो गये हैं. नियमानुसार कर्मचारियों को साढ़े दस बजे कार्यालय में पहुंच जाना चाहिए. जबकि गुरूवार को ग्यारह बजे तक 70 प्रतिशत कर्मचारी अनुपस्थित थे. उन्होंने कहा कि बायोमिट्रिक मशीन में ही घपला किया गया है. लेट लतीफी को छिपाने के लिए मशीन में समय देरी से सेट किया गया है. कर्मचारियों के नहीं आने से किसी काम से निगम आये लोगों को घंटो कतार में खड़ा रहना पड़ता है. इसके खिलाफ निगम के कमिश्नर से शिकायत की गयी हैं. दोषी कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्यवायी न किये जाने पर तीव्र विरोध किया जायेगा.

