नौसेना में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले बिहार के तीन लोग गिरफ्तार, जलपाईगुड़ी में थी फर्जी प्रवेश परीक्षा

Published at :27 Nov 2017 9:32 AM (IST)
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नौसेना में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले बिहार के तीन लोग गिरफ्तार, जलपाईगुड़ी में थी फर्जी प्रवेश परीक्षा

जलपाईगुड़ी : नौसेना में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करनेवाले तीन युवकों को जलपाईगुड़ी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गिरोह से जुड़ी दो युवतियों को पुलिस ने मामले में गवाह बनाया है. गिरफ्तार तीन लोगों में दिव्यांशु मित्र, अमरीश यादव और प्रमोद कुमार शामिल हैं. दिव्यांशु मिश्र का घर बिहार के दरभंगा में […]

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जलपाईगुड़ी : नौसेना में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करनेवाले तीन युवकों को जलपाईगुड़ी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है. गिरोह से जुड़ी दो युवतियों को पुलिस ने मामले में गवाह बनाया है. गिरफ्तार तीन लोगों में दिव्यांशु मित्र, अमरीश यादव और प्रमोद कुमार शामिल हैं. दिव्यांशु मिश्र का घर बिहार के दरभंगा में है, जबकि बाकी दो आरोपी बिहार के जाले थाना क्षेत्र के बसंत गांव के रहनेवाले हैं.

इन लोगों ने एक फर्जी संस्था खोलकर नौसेना में नियुक्ति के लिए जलपाईगुड़ी के पूर्वांचल उच्च विद्यालय में फर्जी प्रवेश परीक्षा आयोजित कर रखी थी. इस परीक्षा में शामिल होने के लिए असम से 100 से अधिक परीक्षार्थी भी पहुंच गये थे. रविवार को जब ये विद्यार्थी बताये गये परीक्षा केंद्र पर पहुंचे तो स्कूल का गेट बंद मिला.

इसी बीच, उन्हें पता चला कि पुलिस ने प्रवेश परीक्षा के आयोजकों को पकड़ लिया है. अपने साथ धोखाधड़ी के बारे में जब उन्हें पता चला, तो वे भी जलपाईगुड़ी कोतवाली थाना पहुंचे. असम के पल्टन बाजार की रहनेवाली एक बीकॉम छात्रा कविता कुमारी ने बताया कि असम की एक दुकान से फॉर्म लेकर उसने नौसेना में नौकरी के लिए आवेदन किया था. आवेदन के समय 300 रुपये का बैंक ड्राफ्ट लिया गया था.

दिल्ली के द्वारका स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेरिटाइम एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड नामक एक संस्था की ओर से परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी किया गया. इसमें एक फोन नंबर भी दिया हुआ था. वहां से फोन करके यह भी बताया गया कि परीक्षा देने आने के समय 950 रुपये साथ लेकर आना होगा. रविवार की सुबह जब हमलोग परीक्षा केंद्र पहुंचे, तो अपने साथ धोखाधड़ी होने का पता चला. असम के ही लाहालपात्र गांव से आये रवि दास और विश्वजीत दास नामक दो परीक्षार्थियों ने बताया कि हमें कभी अंदाजा नहीं हुआ कि आवेदन मंगाने वाली संस्था फर्जी है.

गिरफ्तार युवकों में से दिव्यांशु मिश्र खुद को संस्था का डायरेक्टर बताता है, लेकिन वह खुद उच्च माध्यमिक तक ही पढ़ा हुआ है. पूछताछ में पता चला कि आरोपियों का इरादा परीक्षा के बाद रिजल्ट निकालने का था और इसके बाद सफल परीक्षार्थियों को दिल्ली बुलाकर नियुक्ति पत्र देने के लिए तीन-तीन लाख रुपये वसूलने का था. इसके बाद इनकी योजना चंपत हो जाने की थी.

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