गोरखालैंड को लेकर जल्द हो त्रिपक्षीय वार्ता : विनय तमांग

Published at :18 Oct 2017 8:54 AM (IST)
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गोरखालैंड को लेकर जल्द हो त्रिपक्षीय वार्ता : विनय तमांग

दार्जिलिंग: कोलकाता के नवान्न में सोमवार को आयोजित द्विपक्षीय वार्ता में जीटीए के प्रशासकीय बोर्ड की ओर से चेयरमैन विनय तामंग ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दो ज्ञापन सौंपे. ज्ञापन में एक तरफ जहां राज्य सरकार से केंद्र पर दबाव देकर गोरखालैंड के मसले पर जल्द त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने की मांग की गयी है, वहीं […]

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दार्जिलिंग: कोलकाता के नवान्न में सोमवार को आयोजित द्विपक्षीय वार्ता में जीटीए के प्रशासकीय बोर्ड की ओर से चेयरमैन विनय तामंग ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दो ज्ञापन सौंपे. ज्ञापन में एक तरफ जहां राज्य सरकार से केंद्र पर दबाव देकर गोरखालैंड के मसले पर जल्द त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने की मांग की गयी है, वहीं पार्वत्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मांगों की फेहरिस्त भी थमाई गई है.

साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि गोजमुमो यह मानता है कि पहाड़ की समस्याओं का स्थायी समाधान गोरखालैंड राज्य का गठन ही है. लेकिन इसके लिए वह खुद को कुशल प्रशासक के रूप में साबित करना चाहते हैं, ताकि गोरखालैंड राज्य संचालन के लिए गोजमुमो वास्तविक हकदार बन सके.

उन्होंने कहा कि गोरखालैंड राज्य की मांग सदियों पुरानी है. पहाड़ के सभी राजनैतिक दलों की यह मान्यता है कि गोरखालैंड राज्य की स्थापना ही समस्या का स्थायी समाधान है. लेकिन वह पहाड़ की बुनियादी समस्याओं की भी अनदेखी नहीं करना चाहते. इसीलिये पहाड़ के गोरखा समुदाय के हितों को देखते हुए विभिन्न मांगें राज्य सरकार के समक्ष रखी गई हैं. इसके लिये जीटीए की वर्तमान व्यवस्था को स्वायत्तता दिये जाने की भी उन्होंने वकालत की है. उन्होंने विमल गुरुंग और उनके सहयोगियों पर परोक्ष रुप से कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग हिंसक गतिविधियों के जरिये गोरखालैंड हासिल करने का ख्वाब देख रहे हैं. लेकिन विनय तामंग का मानना है कि गोरखालैंड राज्य का गठन केवल संविधान के दायरे में और शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मानते हुए हो सकता है. मुख्यमंत्री को भी इस बात का एहसास है कि पहाड़ की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए.

ज्ञापन के जरिये विनय तामंग ने बेमियादी बंद के दौरान मारे आंदोलनकारियों के परिवारवालों को सहयोग राशि, हत्या के मामलों की सीबीआई से जांच कराने, आंदोलनकारियों पर लगे सभी मामले वापस लेने, चाय श्रमिकों को बोनस का भुगतान करने, चाय बागान और सिन्कोना बागान के वनवासियों को पर्जा-पट्टा दिये जाने, चाय बागानों में न्यूनतम मजदूरी दर लागू करने, जीटीए, सरकारी और कैजुअल कर्मचारियों को जून, जुलाई और अगस्त माह के वेतन देने, सरकारी कर्मचारियों की सेवा में ब्रेक नहीं करने, व्यावसायिक व निजी वाहनों को वाहन टैक्स में आंदोलन की अवधि के लिये छूट देने, आईसीडीएस सहायिकाओं को गत तीन माह के मानदेय और बोनस देने के अलावा आंदोलनकारियों के खिलाफ उत्पीड़न बंद करने की मांग की गई है. इसके साथ ही अलकेमिस्ट समूह के मातहत धोतरे, कॉलेजवैली, पेशोक चाय बागानों को आंदोलन की अवधि के लिये वेतन व अन्य सुविधाओं का भुगतान की मांग की गई है.

दार्जिलिंग लौटे विनय तमांग

बागडोगरा. जीटीए प्रशासनिक बोर्ड के अध्यक्ष तथा गोजमुमो नेता विनय तमांग मंगलवार को दार्जिलिंग लौट गये हैं. दोपहर बाद कोलकाता से वह विमान द्वारा बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचे और यहां से सीधे अपने काफिले के साथ दार्जिलिंग रवाना हो गये. श्री तमांग दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखालैंड आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता गये थे.

जीटीए की एजी से ऑडिट की मांग

जीटीए प्रशासक की हैसियत से सौंपे गये ज्ञापन के जरिये विनय तमांग ने अस्थायी जीटीए को और भी सक्षम बनाने के लिये जीटीए 2011 अधिनियम के तहत धारा 26 के अनुसार 59 विभागों को प्रशासकीय, कार्यकारी और वित्तीय क्षमता संपन्न बनाने के लिये स्वायत्तशासन दिये जाने की मांग रखी गई है. इसके अलावा जीटीए में 2012-17 तक की अवधि के लिए एजी (महालेखाकार ) से ऑडिट कराने की मांग है. सभी बकाया फंड जल्द दिये जाने, जीटीए क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना, गोरखा सांस्कृतिक संस्थान और अनुसंधान केंद्र, सूचना व संस्कृति भवन की स्थापना, कालिम्पोंग में नर्सिंग ट्रेनिंग स्कूल को अपग्रेड करने, दार्जिलिंग जिला अस्पताल में सिटी स्कैन व डायलिसिस मशीन लगाने, सरकारी अस्पतालों की मरम्मत व व्यवस्था के लिए कोष आवंटन के अलावा स्वयंसेवी शिक्षकों को नियुक्ति के लिये विज्ञापन देने, प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति, प्राथमिक व उच्च विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों के खाली पदों को भरने और अशिक्षक कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरु करने की मांग की गई है. ज्ञापन में पहाड़ के विद्यार्थियों के लिये देश के आईटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग के लिये कोटा प्रदान करने, नेपाली भाषा में डब्लूबीसीएस की परीक्षा लेने की मांगें रखी गयी हैं.

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