सिलीगुड़ी: नक्सलबाड़ी में जमीन माफियाओं का बढ़ा आतंक, फूड फैक्ट्री की जमीन पर कर लिया कब्जा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Oct 2017 9:34 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी के निकट नक्सलबाड़ी इलाके में भू-माफिया का आंतक चरम पर है. इसके चलते पूंजीपति पलायन करने को मजबूर हैं. एक तरफ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूंजीपतियों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही हैं, तो वहीं तृणमूल से जुड़े कुछ भू-माफिया के तांडव से पूंजीपति निराश होकर लौट […]
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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी के निकट नक्सलबाड़ी इलाके में भू-माफिया का आंतक चरम पर है. इसके चलते पूंजीपति पलायन करने को मजबूर हैं. एक तरफ राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूंजीपतियों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही हैं, तो वहीं तृणमूल से जुड़े कुछ भू-माफिया के तांडव से पूंजीपति निराश होकर लौट रहे हैं.
हाल ही में नक्सलबाड़ी-सिलीगुड़ी एशियन हाइवे के किनारे नक्सलबाड़ी हाथीघीसा के बीच फूड फैक्ट्री की करीब साढ़े चार बीघा जमीन भू-माफिया ने अपने दखल में ले ली है. जमीन मालिक ने राज्य सत्ताधारी पार्टी के स्थानीय नेताओं सहित प्रशासन के मिलीभगत का आरोप लगाया है.
वर्ष 2016 के मध्य में नक्सलबाड़ी भू-माफियायों का स्वर्ग बन गया था. राज्य की सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोगों ने चाय बागान की काफी जमीन को अपने कब्जे में लिया था. मामला गरमाने के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आयी थी. इसके बाद भू-माफिया के लोग चाय बागान से निकल कर सरकारी और निजी जमीनों पर टूट पड़े. खास कर के पूंजी पतियों के जमीन को निशाने पर लिया जा रहा है. मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में सिलीगुड़ी के एक व्यवसायी राजेश मिंडा ने नक्सलबाड़ी के निकट हाथीघीसा इलाके में साढ़े दस बीघा जमीन खरीदी थी. इस जमीन पर एक फूड फैक्ट्री बनाने की योजनी थी.
जमीन से लगकर एशियन हाइवे गुजरने की वजह से जमीन की कीमत में कई गुणा इजाफा हुआ. लेकिन हाल ही में इलाके के कुछ जमीन माफियाओं ने उनकी साढ़े चार बीघा जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है. रजिस्ट्री लैंड को दखल करने पर भूमि व भूमि सुधार विभाग की गतिविधि पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.
जमीन हाथ से निकलतर देखकर पूंजीपति राजेश मिंडा ने जिला पुलिस अधीक्षक, सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस कमिश्नरेट, नक्सलबाड़ी थाना, ग्राम पंचायत, बीडीओ, सिलीगुड़ी महकमा शासक सहित सभी प्रशासनिक दफ्तरों के पास मामले की शिकायत की. लेकिन प्रशासन की चुप्पी भू-माफिया के साथ मिलीभगत को प्रमाणित करती है. जिला पुलिस प्रशासन की गतिविधि पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. राजेश मिंडा ने बताया कि भू-माफिया में राज्य की सत्ताधारी पार्टी के ही कई स्थानीय नेता शामिल है. प्रशासन में शिकायत करने के बाद सुलह-समझौते के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की मांग की गयी है. इसके साथ ही जान से मारने तक की धमकी दी जा रही है. हाई कोर्ट के निर्देश के बाद भी भू-माफिया ने जमीन में निर्माण कार्य जारी रखा है.
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