अनूठी पहल: हरियाली के दूत ''गाछ पागला'' बाबा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Oct 2017 9:29 AM (IST)
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कालियागंज: ग्लोबल वार्मिंग क्या होता है? कार्बन उत्सर्जन रोकने के उपाय क्या हैं? इन सवालों का जवाब वह नहीं जानते. पर उन्हें इतना जरूर पता है कि भविष्य को बचाना है तो हरियाली जरूरी है. इसलिए उन्होंने पेड़ लगाने को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है. सड़कों के किनारे पेड़ लगाने का उन्हें जुनून […]
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कालियागंज: ग्लोबल वार्मिंग क्या होता है? कार्बन उत्सर्जन रोकने के उपाय क्या हैं? इन सवालों का जवाब वह नहीं जानते. पर उन्हें इतना जरूर पता है कि भविष्य को बचाना है तो हरियाली जरूरी है. इसलिए उन्होंने पेड़ लगाने को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है. सड़कों के किनारे पेड़ लगाने का उन्हें जुनून है. इसके बदले में वह सरकार, प्रशासन या समाज से कुछ नहीं चाहते.
उनकी एक ही चाहत है कि पेड़ बचे रहें, कोई उन पर कुल्हाड़ी न चलाये. इस शख्स को लोग ‘गाछ पागला’ (पेड़ के पीछे पागल) के नाम से जानते हैं. इनका असली नाम नारायण सरकार है और वह उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज ब्लॉक के जोगीपुकुर गांव के रहनेवाले हैं. जीवन के कई साल उन्होंने अकेले, बिना किसी मदद के पेड़ लगाते और उनकी सेवा करते बिताये हैं.
60 साल की उम्र पार कर चुके नारायण सरकार बिना किसी पारिश्रमिक के बीते 20 सालों से पेड़ लगा रहे हैं. अभी तक वह एक लाख से अधिक पौधे रोप चुके हैं. इसमें आम, कटहल, जामुन, लीची, बरगद, पीपल, कदंब समेत कई तरह के पेड़ शामिल हैं. नारायण बाबू तीसरी कक्षा तक पढ़े हुए हैं और पेशे से किसान हैं. उनके प्रयास से इलाके में हरियाली काफी बढ़ी है. वह कहते हैं, बीते 20 सालों से सड़कों के किनारे पेड़ लगाने का काम कर रहा हूं. मेरे लगाये बहुत से पेड़ सड़क किनारे देखे जा सकते हैं. मनोहरपुर से जोगीपुकुर जाने के रास्ते में करीब पांच किलोमीटर तक मैंने बड़ी संख्या में पेड़ दोनों किनारे पर लगाये हैं. इसके अलावा मनोहरपुर, रामकृष्णपुर समेत आसपास के इलाके में 50 हजार से अधिक पेड़ मैंने लगाये हैं. इनमें से बहुत से पेड़ बचे हुए हैं और बहुत से बदमाशों ने काट लिये. अपनी आंखों के सामने पेड़ कटते नहीं देख पाता हूं. कभी-कभी लोगों से झगड़ा भी हो जाता है. कभी-कभी सोचता हूं कि आखिर यह सब मैं किसके लिए कर रहा हूं. लेकिन फिर सबकुछ भूल अपने अंतर्मन की बात सुन पेड़ लगाने में जुट जाता हूं. मैं चाहता हूं कि भावी पीढ़ियां स्वस्थ और सुबल रहें, इसीलिए सारा प्रयास है. नारायण बाबू केवल खुद पेड़ नहीं लगाते, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.
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