गोरखालैंड आंदोलन ने तोड़ी चाय उद्योग की कमर: 75 दिनों से बंद हैं पहाड़ के सभी चाय बागान

Published at :30 Aug 2017 8:18 AM (IST)
विज्ञापन
गोरखालैंड आंदोलन ने तोड़ी चाय उद्योग की कमर: 75 दिनों से बंद हैं पहाड़ के सभी चाय बागान

सिलीगुड़ी: पिछले ढाई महीने से लगातार जारी गोरखालैंड आंदोलन को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने बातचीत शुरू कर दी है. लेकिन दार्जिलिंग के चाय उद्योग का क्या होगा, यह सवाल हिलकोरे मार रहा है. दार्जिलिंग के चाय उद्योग को फिर से उबारने के लिए ज्वाइंट फोरम ने केंद्र सरकार से एक विशेष आर्थिक […]

विज्ञापन
सिलीगुड़ी: पिछले ढाई महीने से लगातार जारी गोरखालैंड आंदोलन को खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने बातचीत शुरू कर दी है. लेकिन दार्जिलिंग के चाय उद्योग का क्या होगा, यह सवाल हिलकोरे मार रहा है. दार्जिलिंग के चाय उद्योग को फिर से उबारने के लिए ज्वाइंट फोरम ने केंद्र सरकार से एक विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है. अलग राज्य गोरखालैंड की मांग को लेकर पहाड़ पर आंदोलन लगातार जारी है. पिछले 75 दिनों से पहाड़ पर चाय बागान बंद हैं.

पहाड़ के करीब 80 हजार चाय श्रमिक बेरोजगार हो गये हैं. पहाड़ के साथ देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना है. यहां बता दें कि दार्जिलिंग चाय का एक बड़ा बाजार विदेशों में हैं. दार्जिलिंग चाय विदेशी मुद्रा अर्जन का एक प्रमुख माध्यम है. जबकि इस बार फर्स्ट फ्लश और सेकेंड फ्लश दार्जिलिंग चाय का उत्पादन नहीं हो सका है.

चाय बागानों में 75 दिन काम नहीं होने से थर्ड फ्लश चाय उत्पादन पर भी संशय है. इस वर्ष दार्जिलिंग चाय का उत्पादन रत्ती भर भी नहीं हुआ है. इससे इस वर्ष दार्जिलिंग चाय का निर्यात नामुमकिन जैसा है. दार्जिलिंग चाय उद्योग की स्थिति देखकर विदेशों में इसकी मांग गिरने की भी संभावना जातायी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी बाजार में दार्जिलिंग चाय नहीं मिलने पर दूसरे देश चाय बाजार पर कब्जा कर लेंगे. जिसका दार्जिलिंग चाय उद्योग पर गहरा असर पड़ेगा. विदेशों में दार्जिलिंग चाय से देश की पहचान भी बनती है.

इसके अतिरिक्त दार्जिलिंग चाय निर्यात कर विदेशी मुद्रा अर्जित होती है. दार्जिलिंग चाय उद्योग पर गहरा रहे संकट का एक व्यापक असर देश की अर्थ व्यवस्था पर पड़ेगा. फिर भी केंद्र सरकार इस समस्या समाधान के लिए पहल नहीं कर रही है. इस समस्या को लेकर चाय श्रमिक संगठनों के ज्वाइंट फोरम ने आवाज उठायी है. मंगलवार को सिलीगुड़ी में एक बैठक की गयी. बैठक के बाद ज्वाइंट फोरम के संयोजक जिआउल आलम ने बताया कि दार्जिलिंग चाय उद्योग को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार को एक आर्थिक पैकेज देने की आवश्यकता है. अलग राज्य की समस्या पर राज्य सरकार और आंदोलनकारियों के बीच विचार-विमर्श का दौर शुरू हो चुका है. अब दार्जिलिंग चाय बागानों के मालिकों व श्रमिकों को भी आगे आना चाहिए.

उत्सव के माहौल में खामोश चाय श्रमिक
गणेश पूजा के साथ यहां उत्सव का माहौल शुरू हो चुका है. अगले महीने अंतिम सप्ताह में दुर्गोत्सव है. इस बार उत्सव में में चाय श्रमिक समाज निराश है. बीते 75 दिनों से पहाड़ के चाय बागान बंद है. श्रमिक आस लगाये घर में खामोश बैठे हैं. पहाड़ पर चाय बागान के मालिक पक्ष पूजा बोनस व अन्य सुविधाएं देने की स्थिति में नहीं है. बंद की वजह से चाय के फसल को नुकसान हो गया है. ज्वाइंट फोरम का कहना है कि यह आंदोलन इसी वर्ष नहीं बल्कि अगले वर्ष भी चाय उत्पादन को प्रभावित करेगा. इसके लिए केंद्र सरकार को पहल करनी चाहिए.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola