जर्जर गोदामों में रखी जा रहीं सरकारी दवाइयां
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Aug 2017 8:47 AM (IST)
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सिलीगुड़ी. राज्य सरकार के तमाम दावों के बावजूद सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवा में ज्यादा बेहतरी नहीं हो सकी है. आज भी कई सरकारी अस्पतालों के नये भवन बन गये हैं या उनको अपग्रेड कर दिया गया है, लेकिन वहां एक तो चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है, दूसरे अत्याधुनिक उपकरण भी पर्याप्त संख्या […]
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सिलीगुड़ी. राज्य सरकार के तमाम दावों के बावजूद सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवा में ज्यादा बेहतरी नहीं हो सकी है. आज भी कई सरकारी अस्पतालों के नये भवन बन गये हैं या उनको अपग्रेड कर दिया गया है, लेकिन वहां एक तो चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है, दूसरे अत्याधुनिक उपकरण भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं. इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में उपयोग में लायी जानेवाली दवाओं का भंडारण भी सही तरीके से नहीं हो रहा है.
सिलीगुड़ी शहर के सेवक रोड के बगल में स्थित मुंशी प्रेमचंद कॉलेज संलग्न इलाके में सरकारी दवाओं को रखने के लिए कुछ गोदाम हैं जो जर्जर हो चुके हैं. वैसे भी ये गोदाम देखने में बाबा आदम के जमाने के लगते हैं. यहां भंडारित की गयी दवाएं उत्तर बंगाल के विभिन्न सरकारी अस्पतालों को भेजी जाती हैं. हालांकि ऐसे पुराने और जर्जर गोदामों में जीवनरक्षक दवाओं को रखे जाने को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. गोदाम परिसर झाड़ियों से भरा हुआ है. बरसों से इसकी सफाई नहीं हुई है. कहीं से ईंट गिरती है, तो कहीं से पलस्तर.
जीवन रक्षक दवाइयों व वैक्सिन के लिए फ्रिज का इंतजाम नहीं
गोदामों में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि गोदामों की वर्तमान दशा के बारे में शीर्ष अधिकारियों को जानकारी दी गयी है. एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बहुत सी जीवनरक्षक दवाइयां और वैक्सीन फ्रिज में रखनी पड़ती हैं. हालांकि तीन गोदामों में से एक भी गोदाम में फ्रिज नहीं है. इससे दवाओं को सुरक्षित रखने में मुश्किल आ रही है. गोदाम में खिड़कियों का अभाव है. एक-दो छोटी-छोटी खिड़कियां हैं भी तो उन्हें इस डर से खोला नहीं जाता है कि कहीं वे भरभराकर गिर न जाएं. जिस स्वास्थ्य विभाग के दवा के गोदामों की ऐसी जीर्ण दशा हो, वहां की स्वास्थ्य सेवा के बारे में कुछ कहना ही बेमानी है.
गोदाम में प्रवेश करता है बारिश का पानी
कर्मचारियों का कहना है कि इन गोदामों में कई जगह छेद हैं, जिससे होकर बारिश का पानी गोदाम के अंदर आ जाता है. इससे कीमती दवाएं नष्ट हो रही हैं. गोदाम के कर्मचारियों का कहना है कि इन्हीं बदहाल गोदामों में रखी दवाएं नियमित रूप से विभिन्न सरकारी अस्पतालों को भेजी जाती हैं. हालांकि दार्जिलिंग जिले के सीएमओ डॉ असित विश्वास का कहना है कि इन गोदामों का उपयोग आजकल नहीं हो रहा है.
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