Netaji Subhash Chandra Bose : सुभाष चंद्र बोस की मौत की जांच के अनुरोध वाली जनहित याचिका खारिज

Netaji Subhash Chandra Bose : सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की है कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा है. न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की प्रमाणिकता की जांच की जानी आवश्यक है.
Netaji Subhash Chandra Bose : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के मामले की जांच के अनुरोध वाली जनहित याचिका खारिज कर दी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत हर चीज का समाधान नहीं है. पीठ ने कहा, सरकार चलाना अदालत का काम नहीं है.
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा
शीर्ष अदालत ने इससे पहले याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि याचिका में उन नेताओं के खिलाफ लापरवाही पूर्वक और गैरजिम्मेदाराना आरोप लगाए गए हैं जो अब जीवित नहीं हैं. सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की है कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा है. न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की प्रमाणिकता की जांच की जानी आवश्यक है.
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कोर्ट ने याचिका को किया खारिज
न्यायालय ने याचिकाकर्ता पिनाक पाणि मोहंती से पूछा कि उन्होंने जनहित में और लोगों के मानवाधिकारों के लिए क्या काम किया है. मोहंती ने अपनी याचिका में कहा है कि वह ‘वर्ल्ड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन (इंडिया)’ के कटक जिला सचिव हैं. सरकार ने इससे पहले एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत मांगी गयी सूचना के जवाब में बताया था कि नेताजी की मृत्यु 1945 में ताइवान में एक विमान दुर्घटना में हुई थी.
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By Shinki Singh
10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.
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