आनंदपुर अग्निकांड: 12 घंटे बाद भी उठ रहा धुंआ, लापता लोगों की संख्या बढ़कर 16 हुई

Updated at : 26 Jan 2026 2:14 PM (IST)
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आनंदपुर अग्निकांड: 12 घंटे बाद भी उठ रहा धुंआ, लापता लोगों की संख्या बढ़कर 16 हुई

दमकल कर्मी

Anandapur Fire: 12 दमकल इंजनों को तैनात करने के बावजूद दमकलकर्मी आग के स्रोत तक नहीं पहुंच पाए हैं. धुआं अब भी उठ रहा है. वैसे दमकल कर्मियों का दावा है कि आग पर काबू पा लिया गया है.

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Anandapur Fire: कोलकाता: आनंदपुर में लगी आग पर 12 घंटे बाद काबू पा लिया गया, लेकिन धुआं अभी भी उठ रहा है. रविवार देर रात आनंदपुर की एक मशहूर मोमो फैक्ट्री में आग लग गयी थी. बाद में पता चला कि गोदाम में सिर्फ मोमो ही नहीं, बल्कि एक डेकोरेटर कंपनी के कर्मचारी भी काम कर रहे थे. उस कारखाने में भीषण आग लग गई. शुरू में लापता लोगों की संख्या तीन मानी जा रही थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, लापता लोगों की संख्या बढ़ती गयी. अब तक 16 लोगों के लापता होने की सूचना है, जिसमें तीन सुरक्षाकर्मी हैं. उन तीन लोगों की मौत हो चुकी है. लापता हुए इन 13 कर्मचारियों में से तीन मोमो नामक कंपनी के कर्मचारी हैं.

कोलकाता में बढ़ रही अगलगी की घटना

पिछले कुछ दिनों में कोलकाता शहर में एक के बाद एक आग लगने की घटनाएं घटी हैं. इनमें सबसे भयावह घटना आनंदपुर स्थित कारखाने में लगी आग है. पूरी फैक्ट्री कल रात से जल रही है. अब तक कारखाने के सामने लगी आग पर आंशिक रूप से काबू पा लिया गया है, लेकिन अंदर आग बुझाना संभव नहीं हो पाया है. 12 दमकल इंजनों को तैनात करने के बावजूद दमकलकर्मी आग के स्रोत तक नहीं पहुंच पाए हैं. धुआं अब भी उठ रहा है. वैसे दमकल कर्मियों का दावा है कि आग पर काबू पा लिया गया है. शुरुआत में खबर आई थी कि मोमो के तीन कर्मचारी कल रात कारखाने में नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे. आग लगने के समय वे गोदाम में फंस गए थे. हालांकि, एक मजदूर के परिवार ने शिकायत करते हुए कहा है-पिछली बार जब मेरे दामाद ने फोन किया, तो उसने कहा कि कारखाने का गेट बाहर से बंद कर दिया गया था.

परिजन के चेहरे पर दहशत

इस हादसे के बाद कोलकाता में मातम पसरा हुआ है. पुलिस ने अब तक आधिकारिक तौर पर यह संख्या घोषित नहीं की है. इसलिए, अंतिम संख्या को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पंकज हलदर उन श्रमिकों में से एक थे जो कल रात मोमो संगठन के कर्मचारी के रूप में कारखाने में रात्रि शिफ्ट में काम कर रहे थे. आज पंकज के दादाजी जलते हुए कारखाने के सामने इंतजार कर रहे हैं. उनकी आंखों और चेहरे पर भय स्पष्ट दिखाई दे रहा है. वह यह कल्पना भी नहीं कर पा रहा है कि किन परिस्थितियों में वह अपने भाई को बचाएगा. उसने स्थानीय मीडिया से आज कहा- मेरा भाई नहीं मिल रहा है. न तो अग्निशमन विभाग और न ही पुलिस ने कोई सूचना दी है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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