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West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले युद्ध स्तर पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूची से जुड़ी सुनवाई प्रक्रिया में यौनकर्मियों, किन्नरों और कुछ आदिवासी समूहों को चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है. निर्वाचन आयोग ने इन वर्गों की कानूनी और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नया निर्देश जारी किया है. इसका उद्देश्य उनके मतदान के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
सामाजिक और कानूनी रूप से पिछड़े वर्गों के लोग वोट देने से नहीं रहेंगे वंचित
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी नये निर्देश का मुख्य मकसद सामाजिक और कानूनी रूप से पिछड़े वर्गों को मतदाता सूची में शामिल करना है. खासकर वैसे लोगों को, जिनको दस्तावेजों की वजह से वोटर लिस्ट में शामिल होने में दिक्कतें आ रहीं हैं. आयोग ने कहा है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए सुनवाई के समय कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य था.
West Bengal SIR: आवश्यक दस्तावेज के बिना भी वोटर लिस्ट में शामिल होंगे नाम
आयोग का कहना है कि कई बार देखा गया है कि यौनकर्मियों, किन्नरों और आदिवासी समुदाय के लोग जरूरी दस्तावेजों के अभाव में मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करा पा रहे थे. इसलिए चुनाव आयोग ने नये नियम जारी किये हैं. इसके अनुसार, यदि इन वर्गों के मतदाताओं के पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं भी हैं, तब भी उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकेगा.
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आयोग की पहल की सामाजिक संगठनों ने की सराहना
आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों में निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) या संबंधित जिला अधिकारी पूछताछ और सत्यापन के माध्यम से मतदाता की पहचान सुनिश्चित करेंगे. यानी दस्तावेजों की कमी अब वोटर आईडी और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में बाधा नहीं बनेगी. आयोग की इस पहल की कई सामाजिक संस्थाओं ने सराहना की है.
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