बंगाल में डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट : अब होल्डिंग सेंटर्स में रहेंगे घुसपैठिये, शुभेंदु सरकार ने कर ली पूरी तैयारी

West Bengal Holding Centres Suvendu Adhikari
West Bengal Holding Centres: पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध घुसपैठियों के लिए जिलों में होल्डिंग सेंटर्स तैयार किये हैं. इन केंद्रों में भोजन, आवास और चिकित्सा की सुविधाएं होंगी. मालदा और मुर्शिदाबाद में ऑपरेशन शुरू हो चुका है. जानें कैसे काम करेगी नयी डिपोर्टेशन नीति.
West Bengal Holding Centres: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही घुसपैठ के खिलाफ शुरू हुआ ‘महा-अभियान’ अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों में होल्डिंग सेंटर्स (Holding Centres) बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है.
होल्डिंग सेंटर्स में ठहरने की उच्चस्तरीय व्यवस्था
इन केंद्रों का उद्देश्य उन लोगों को अस्थायी रूप से रखना है, जिन्हें संदिग्ध घुसपैठिया माना गया है या जिनकी नागरिकता की जांच चल रही है. खास बात यह है कि सरकार ने इन केंद्रों को जेल की बजाय ‘सुविधा केंद्रों’ के रूप में तैयार किया है, जहां रहने वाले लोगों के लिए भोजन, चिकित्सा और ठहरने की उच्चस्तरीय व्यवस्था की गयी है.
क्या हैं होल्डिंग सेंटर्स? जेल से कैसे हैं अलग?
सरकार ने कहा है कि ये केंद्र जेल नहीं हैं, बल्कि एक ट्रांजिट पॉइंट हैं. यहां रहने वाले संदिग्ध नागरिकों को पौष्टिक भोजन, साफ बिस्तर और 24 घंटे चिकित्सा सहायता दी जायेगी. इन केंद्रों में किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकेगा. इस दौरान उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जायेगा. केंद्रों की निगरानी के लिए सीसीटीवी (CCTV) कैमरे, पुलिस बल और सिविल डिफेंस के जवानों को तैनात किया गया है.
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मालदा और मुर्शिदाबाद में ‘ऑपरेशन’ शुरू
राज्य के सीमावर्ती जिलों में इन केंद्रों ने काम करना शुरू भी कर दिया है. मालदा जिले के इंग्लिश बाजार के सरकारी प्रशिक्षण केंद्र की एक मंजिल को होल्डिंग सेंटर बनाया गया है. यहां हाल ही में पकड़े गये 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है. मुर्शिदाबाद के लालगोला में ‘पद्म भवन’ में दूसरा केंद्र सक्रिय है. यहां जाली दस्तावेजों के साथ पकड़े गये लोगों को शिफ्ट किया गया है. केंद्र में प्रवेश से पहले सभी का मेडिकल टेस्ट किया जा रहा है, ताकि संक्रमण या बीमारी का खतरा न रहे.
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डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति का हिस्सा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार घुसपैठ पर ‘जीरो टॉलरेंस’ रखेगी. डिटेक्ट (Detect) के तहत संदिग्धों की पहचान की जायेगी. डिलीट (Delete) का मतलब है अवैध तरीके से वोटर लिस्ट में शामिल लोगों के नामों को हटाना. और डिपोर्ट (Deport) का मतलब है दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सीधे बीएसएफ (BSF) को सौंपना, ताकि उन्हें उनके देश वापस भेजा जा सके.
पड़ोसी देशों से आये अल्पसंख्यकों को CAA का कवच
सरकार ने दोहराया है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ चुके पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है. वे CAA के तहत सुरक्षित हैं.
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West Bengal Holding Centres: विपक्ष और सरकार का रुख
बीजेपी सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रही है, तो विपक्षी दल टीएमसी (TMC) ने मांग की है कि इस प्रक्रिया में किसी भी भारतीय नागरिक को परेशान नहीं किया जाना चाहिए. सरकार का कहना है कि वे केवल गृह मंत्रालय (MHA) के उन दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं, जिन्हें पिछली सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था.
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By मिथिलेश झा
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