SIR Tribunal से लोगों की बढ़ी उम्मीद, सीमावर्ती पंचायतों में तैयार हुआ ‘वार रूम’,कटे वोटरों के नाम जोड़ने की पहल

वोटर कार्ड
SIR Tribunal: मतदाता सूची में नाम गायब होने से परेशान लोगों के लिए SIR ट्रिब्यूनल आखिरी उम्मीद है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मतदाता के नाम में गड़बड़ी के मामले को सुलझाने के लिए इस ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है.
मुख्य बातें
SIR Tribunal: कोलकाता/बशीरहाट. बशीरहाट दक्षिण विधानसभा के सीमावर्ती शांकचूड़ा-बागुंडी ग्राम पंचायत में मतदाता सूची से कटे 1400 वोटरों के नाम दोबारा जोड़ने की पहल शुरू की गयी है. इस पहल का नेतृत्व ग्राम पंचायत प्रधान गोलाम मोस्तफा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रशिक्षित आइटी कर्मियों की एक टीम बनायी गयी है, जो लैपटॉप के जरिए पूरी रात ट्रिब्यूनल में ऑनलाइन आवेदन करेगी. उद्देश्य यह है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हट गये हैं, उन्हें फिर से सूची में शामिल कराया जा सके. ट्रिब्यूनल में आवेदन की यह प्रक्रिया पूरी रात जारी रहेगी. इसके लिए सोलादाना इलाके में एक अस्थायी ‘वार रूम’ भी तैयार किया गया है, जहां से पूरे अभियान की निगरानी और संचालन किया जायेगा.
SIR Tribunal का पहला फैसला
ट्रिब्यूनल ने अभी तक अपना काम शुरू नहीं किया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब तक सिर्फ एक ही मामले का निपटारा हुआ है. फरक्का से कांग्रेस उम्मीदवार मोहताब का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने का फैसला आने के बाद लोगों की उम्मीद और बढ़ गयी है. मोहताब का नाम वोटर लिस्ट से गायब था, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है. सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट में भी उनके भाग्य का फैसला नहीं हुआ था. पासपोर्ट जमा करने के बाद भी उनका नाम सूची में नहीं आया. उनका नाम हटाए गए के रूप में दिखाया गया था.
मंगलवार से पहले सुझला लें मामला
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि मालदा से कांग्रेस उम्मीदवार मोहताब शेख का मामला 6 अप्रैल से पहले सुलझा लिया जाए. सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवज्ञानम ने रविवार को अपने आवास पर सुनवाई की. मोहताब भी वहां मौजूद थे. फैसला वहीं लिया गया. उनके पास पासपोर्ट था, जिसके चलते मोहताब के नामांकन में कोई बाधा नहीं आई. सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि चुनाव आयोग को शाम 8 बजे तक एक अतिरिक्त सूची प्रकाशित करके मोहताब शेख का नाम मालदा के वैध मतदाता के रूप में घोषित करना होगा.
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सभी दस्तावेज होने के बावजूद कैसे कटा नाम
सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश ने उस दिन मोहताब के सभी दस्तावेजों की जांच की. उन्हें 2012 में वोटर कार्ड मिला था. उन्हें 2016 में आधार कार्ड मिला था. उनके पास आधार कार्ड भी है. इसके बावजूद, यह सवाल उठा कि अंतिम सूची से उनका नाम कैसे छूट गया. मोहताब के वकीलों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय एसआईआर से संबंधित सभी मामलों की सुनवाई कर रहा है, इसलिए उम्मीदवार के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय से संपर्क किया. सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि मोहताब के मामले का न्यायाधिकरण में शीघ्र निपटारा किया जाए.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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