आरजी कर मामला: 48 घंटे के भीतर फिर से शुरू हो जांच, कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश

Published by : Ashish Jha Updated At : 21 May 2026 5:35 PM

विज्ञापन

आरजी कर अस्पताल

RG Kar case: कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष और न्यायमूर्ति शम्पा सरकार की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई हुई. सीबीआई ने अब तक क्या जांच की है, रिपोर्ट में क्या लिखा है, इन सभी मुद्दों पर आज चर्चा हुई. एक पीठ का गठन किया गया है.

विज्ञापन

RG Kar case: कोलकाता: आरजी कर मामले की फिर से जांच होगी. कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सख्त निर्देश दिया कि 48 घंटे के अंदर इस मामले की फिर से जांच की जाये. दरअसल आरजी कर मामले के मुख्य आरोपी संजय रॉय को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, लेकिन पीड़ित पक्ष की मांग है कि इस मामले की सही से जांच नहीं हुई है और कई ऐसे सवाल है जिनका उत्तर अब तक नहीं मिला है. तिलोत्तमा के माता-पिता, जो इस सब को लेकर असमंजस में हैं, जांच को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे थे. इस बार कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इसकी अनुमति दे दी है.

परिवार की मांग पर विचार

इस मामले की सुनवाई गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष और न्यायमूर्ति शम्पा सरकार की खंडपीठ में हुई. सीबीआई की अब तक की जांच, रिपोर्ट में क्या लिखा गया था, इन सभी मुद्दों पर आज चर्चा हुई. न्यायाधीशों ने इस बात पर विचार किया कि क्या जांच दोबारा शुरू की जानी चाहिए या नहीं. पीड़ित पक्ष के वकील की ओर से कहा गया कि निचली अदालत ने आरजी कर मामले के मुख्य आरोपी संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन सरकारी अस्पताल के अंदर उस रात वास्तव में क्या हुआ था, इस सवाल का अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है. अपराध ठीक कहाँ हुआ था? परिवार को पहले घटनास्थल देखने की अनुमति क्यों नहीं दी गई?

‘हर चीज की जांच चल रही है’

इस मामले के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए नए सिरे से जांच का आदेश दिया गया है. अदालत के आदेश पर सीबीआई की एक बेंच गठित की गई है, जिसमें सीबीआई के संयुक्त निदेशक (पूर्व) समेत तीन अधिकारी शामिल हैं. यह बेंच अगले 48 घंटों के भीतर फिर से जांच शुरू करेगी. घटना वाली रात के खाने से लेकर शव के अंतिम संस्कार और सबूतों को नष्ट करने तक, सभी पहलुओं की जांच की जाएगी.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

आपने एक साल और सात महीने में क्या किया

न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने आज सीबीआई से पूछा-आपने एक साल और सात महीने में क्या किया? आपकी रिपोर्ट में सिर्फ सीबीआई द्वारा की गई कार्रवाई का ही जिक्र है. न्यायमूर्ति शम्पा सरकार ने पूछा-चार्जशीट दाखिल करने के बाद 70-80 लोगों के बयान दर्ज किए गए. ऐसा करने से उन्हें क्या हासिल हुआ? सीबीआई के वकील ने कहा कि पुलिस जांच में कुछ गलतियां थीं, जिनका जिक्र रिपोर्ट में किया गया है.

घटनास्थल पर दोबारा जाएंगे अधिकारी

न्यायाधीश के स्पष्ट निर्देश थे-भोजन के समय से शुरू करें. घटना तक पहुँचें। उन कमियों (लापरवाही) पर फिर से काम करना शुरू करें, जिन्हें आपने स्वयं इंगित किया है. उन कमियों पर ध्यान केंद्रित करें. न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इसमें जनहित शामिल है, इसलिए कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर दोबारा जाएंगे.

Also Read: ‘इतनी गैरजिम्मेदाराना हरकत क्यों…’, हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी पर की कड़ी टिप्पणी

विज्ञापन
Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola