बंगाल में मुस्लिम वोटरों से अधिक कटे हिंदू वोटरों के नाम, SIR पर तृणमूल कांग्रेस का नया खुलासा

वोटर लिस्ट
SIR in Bengal: तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने घुसपैठिये व रोहिंग्याओं को ढूंढ़ते हुए सबको लाइन में खड़ा कर दिया है. गरीब हिंदुओं को भी इस परेशानी से नहीं बख्शा गया.
मुख्य बातें
SIR in Bengal: कोलकाता. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया में इस बार बंगाल में 91 लाख लोगों के नाम कट चुके हैं. हालांकि निर्वाचन आयोग ने यह जानकारी प्रकाशित नहीं की है कि इसमें कितने हिंदू व मुस्लिमों के नाम हैं. लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि जिनके नाम कटे हैं, उनमें 63 फीसदी हिंदू शामिल हैं. भाजपा ने इस आंकड़े पर सवाल उठाया. भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग ने कोई ऐसा आंकड़ा प्रकाशित नहीं किया है.
करीब 63 फीसदी हिंदू वोटरों के नाम कटे
तृणमूल के मुताबिक एसआइआर के पहले चरण में जिन 58 लाख लोगों के नाम कटे थे, उसमें 44 लाख हिंदू थे. उस चरण में करीब साढ़े 13 लाख मुस्लिम समुदाय के नाम काटे गये थे. दूसरे चरण में लिस्ट से साढ़े पांच लाख नाम काटे गये थे. इसमें करीब पांच लाख 28 हजार हिंदू थे. करीब 13 हजार मुस्लिम समुदाय के थे. तीसरे चरण में, यानी विचाराधीन श्रेणी में करीब 27 लाख नाम कटे थे. इस चरण में मुस्लिम समुदाय के 17 लाख 50 हजार नाम कटे हैं. तृणमूल का दावा है कि यदि कुल मिलाकर हिसाब किया जाये, तो करीब 63 फीसदी हिंदू व 35 फीसदी मुस्लिम समुदाय के नाम इसमें शामिल हैं.
क्या कहना है तृणमूल प्रवक्ता का
तृणमूल के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने गुरुवार को बताया कि भाजपा ने घुसपैठिये व रोहिंग्याओं को ढूंढ़ते हुए सबको लाइन में खड़ा कर दिया है. गरीब हिंदुओं को भी इस परेशानी से नहीं बख्शा गया. आंकड़े बताते हैं कि 57 लाख में ज्यादा हिंदू नाम वोटर लिस्ट से हटा दिये गये हैं. अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि कई संगठनों ने एसआइआर सूची को डिजिटाइज किया है. पहले दो चरण में जो नाम कटे थे, बूथ स्तरीय हिसाब हमारे पास है. इन आंकड़ों को पाने के लिए स्पेस रिसर्च की जरूरत नहीं है.
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क्या कहना है भाजपा प्रवक्ता का
भाजपा प्रवक्ता राजर्षि लाहिड़ी ने तृणमूल के बताये आंकड़ों की असलियत पर कहा कि चुनाव आयोग ने यह जानकारी प्रकाशित नहीं की है. फिर तृणमूल को यह कहां से मिली. क्या तृणमूल के झंडे तले आंदोलन कर रहे बीएलओ ने यह जानकारी तृणमूल को दी? हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने यह साफ तौर पर नहीं बताया कि उसे यह जानकारी कहां से मिली है.
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लेखक के बारे में
By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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