एसआईआर के बीच खुद को वैध मतदाता साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग

एसआईआर से बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग मतदाता हो रहे परेशान.
SIR Controversy in Bengal: बंगाल चुनाव 2026 से पहले जारी एसआईआर की सुनवाई के दौरान लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खुद को वैध मतदाता साबित करने के लिए बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग मतदाताओं को संघर्ष करना पड़ रहा है. कैसे-कैसे वोटर सुनवाई के लिए आ रहे हैं, यहां देखें.
Table of Contents
SIR Controversy in Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण में ब्लॉक कार्यालयों में तनाव है. यहां बुजुर्ग, दिव्यांग और संवेदनशील मतदाता शारीरिक परेशानियों, लंबी यात्राओं और आजीविका का नुकसान सहते हुए यह साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं कि वे देश के ‘वैध’ मतदाता हैं. पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में, सुनवाई केंद्रों पर इस प्रक्रिया से जुड़े गहन भावनात्मक मुद्दों को महसूस किया जा सकता है.
ऑक्सीजन मास्क लगाकर सुनवाई के लिए पहुंचे 80 साल के बुजुर्ग
ऑक्सीजन मास्क लगाकर रिश्तेदारों द्वारा लाये जा रहे 80 साल के बुजुर्ग, कार्यालय के फर्श पर रेंगकर पहुंचते दिव्यांग और मतदाता सूची से नाम हटाये जाने से डरे दिहाड़ी मजदूर तक ने प्रशासनिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच एक बढ़ते अंतर को उजागर किया है.
16 दिसंबर को जजारी हुई थी मसौदा मतदाता सूची
निर्वाचन आयोग ने पहले चरण के एसआईआर के बाद 16 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की थी. इसमें 58 लाख से अधिक नाम हटाये जाने के बाद मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गयी. दूसरे चरण की शुरुआत 27 दिसंबर को हुई. इसमें 1.67 करोड़ मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच हो रही है. इनमें से 1.36 करोड़ को तार्किक विसंगतियों के कारण चिह्नित किया गया है. 31 लाख के रिकॉर्ड में समस्या है.
स्नेहलता ने कहा- मैं क्यों इतना पैसा खर्च करूं और कष्ट सहूं…
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम मेदिनीपुर के डेबरा ब्लॉक में 87 वर्षीय स्नेहलता भक्त 32 किलोमीटर की यात्रा करके एसआईआर कार्यालय पहुंचीं. उनकी नाजुक हालत देख ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) बाहर आये. उन्होंने बाहर में ही उनके दस्तावेजों की जांच की और उन्हें वाहन में लौटने की अनुमति दे दी. स्नेहलता भक्त ने कहा- मैं क्यों इतना पैसा खर्च करूं और कष्ट सहूं. सिर्फ यह साबित करने के लिए कि मैं एक मतदाता हूं?
SIR Controversy in Bengal: झरना को कंधे पर उठाकर लाये थे उनके भाई
पास ही में गंभीर रूप से बीमार और चलने में असमर्थ झरना दास (65) को उनके भाई कंधे पर उठाकर सुनवाई केंद्र तक लाये. झरना के भाई ने कहा- अगर हम नहीं आते, तो उनका नाम हटा दिया जाता. इस डर के कारण हमें लगता है कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है.
दृष्टिहीन दीपांकर दास बोले- बहुत ध्यान से चलता हूं, फिर भी आना पड़ा
स्नेहलता और झरना ही नहीं, जन्म से दृष्टिहीन दीपांकर दास भी ऐसे ही एक वोटर हैं. हालांकि, उनका नाम 2002 की मतदाता सूची में था. उन्होंने कहा- मैं देख नहीं सकता. बहुत ध्यान से चलता हूं. फिर भी, मुझे आना पड़ा.
150 किलोमीटर की यात्रा करके आये रिटायर्ड कर्मचारी
दक्षिण कोलकाता के गरफा से एक केंद्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी ने 2002 की सूची में अपना नाम गायब होने के बाद लगभग 150 किलोमीटर यात्रा की. उन्होंने कहा- अधिकारियों ने अच्छा व्यवहार किया, लेकिन इस उम्र में इतनी लंबी यात्रा करना बहुत मुश्किल है.
दिहाड़ी मजदूर को छोड़ना पड़ा अपना काम
दिहाड़ी मजदूरी करने वालों को इस सुनवाई के लिए अपना काम छोड़ना पड़ा है. नारायणगढ़ के एक मिस्त्री श्यामल कोटल ने सुनवाई में शामिल होने के लिए काम छोड़ दिया. कहा- मेरे परिवार का गुजारा मेरी दैनिक मजदूरी पर निर्भर है. अगर मेरा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाता, तो वह इससे भी बुरा होता.
80 प्रतिशत दिव्यांग को भी सुनवाई के लिए बुलाया
पुरुलिया के बलरामपुर में, जन्म से 80 प्रतिशत दिव्यांग श्याम सिंह सरदार को सुनवाई के लिए बुलाया गया था. ब्लॉक कार्यालय के फर्श पर रेंगते हुए श्याम सिंह सरदार को पहुंचना पड़ा, क्योंकि वहां व्हीलचेयर नहीं थी. उन्होंने कहा- कम से कम हम जैसे लोगों के लिए घर पर सुनवाई की व्यवस्था की जानी चाहिए थी. यह असहनीय उत्पीड़न है.
नोटिस में भौतिक रूप से बुलाया जाता है सुनवाई के लिए
एक ओर निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के मामले में सुनवाई घर पर होगी. फिर भी संवेदनशील मतदाताओं को बुलाये जाने के मामले बार-बार सामने आने से कार्यान्वयन में खामियां उजागर हुई हैं. इस दौरान परिवारों को मौखिक आश्वासन मिलता है, लेकिन लिखित नोटिस में भौतिक रूप से पेश होने के लिए कहा जाता है.
टीएमसी और भाजपा में एसआईआर पर छिड़ा है विवाद
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इन मुद्दों को उठाते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर के कारण वास्तविक मतदाता वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले वोट देने से वंचित हो सकते हैं. हालांकि, भाजपा का कहना है कि यह पुनरीक्षण मतदाता सूची में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है. इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.
इसे भी पढ़ें
बंगाल की जनता के लिए आशा की किरण है एसआईआर, बोले शुभेंदु अधिकारी
एसआईआर प्रक्रिया ‘अमानवीय’, कल कोर्ट में दाखिल करूंगी याचिका, ममता बनर्जी की धमकी
टीएमसी सांसद देव और उनके परिवार को एसआईआर सुनवाई का नोटिस, बंगाल की राजनीति गरमायी
SIR सुनवाई में राजनीतिक हस्तक्षेप पर चुनाव आयोग सख्त, जारी कर दिया ये फरमान
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




