ममता बनर्जी 40 लाख रुपए लेकर उतरीं थीं नंदीग्राम में, सबसे हाई-प्रोफाईल चुनाव में खर्च किये 21.88 लाख

Updated at : 05 Apr 2026 9:36 AM (IST)
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Mamata Banerjee Election Expenses West Bengal Elections

Mamata Banerjee Election Expenses: पश्चिम बंगाल की चीफ मिनिस्टर 40 लाख रुपए लेकर चुनाव के मैदान में उतरीं. उन्होंने सबसे हाई प्रोफाईल सीट पर चुनाव लड़ने के लिए इनमें से मात्र 21.88 लाख रुपए खर्च किये. नतीजा यह हुआ कि ममता बनर्जी चुनाव हार गयीं. नंदीग्राम विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी के चुनाव खर्च का पूरा विश्लेषण यहां पढ़ें.

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Mamata Banerjee Election Expenses: बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में नंदीग्राम सिर्फ राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं थी. एक मुख्यमंत्री और उनके बेहद करीबी रहे पांच विभागों के मंत्री के बीच जंग थी. इसलिए जमकर पैसे खर्च हुए. चुनाव खर्च के ऑफिशियल स्टेटमेंट बताते हैं कि ममता बनर्जी ने इस सीट पर कुल 21,88,135 रुपए खर्च किये. उनके पास चुनाव लड़ने के लिए 40.01 लाख रुपए का पर्याप्त फंड था.

नंदीग्राम में ममता बनर्जी ने किस मद में कितने खर्च किये

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को ममता बनर्जी ने चुनाव खर्च का जो ब्योरा सौंपा था, उसके मुताबिक, नंदीग्राम में बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने कुल 21,88,135 रुपए खर्च किये. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा पब्लिक मीटिंग और रैली पर गया. इन दोनों मद में कुल 19,58,435 रुपए का खर्च ममता बनर्जी ने दिखाया. नयनिका इंटरप्राइजेज ने उनकी सभाओं के बिल भरे थे.​

Mamata Banerjee Election Expenses: खर्च का ब्योरा

ममता बनर्जी के चुनाव खर्च में सबसे बड़ा ‘बिल’ भीड़ और मंच ने बनाया. इसमें रैली, जनसभा और छोटी-बड़ी बैठकें शामिल हैं. खर्च का विवरण संक्षिप्त में यहां देखें.

खर्च का विवरणराशि (रुपए में)
उम्मीदवार के इस्तेमाल के लिए वाहन आदि पर खर्च46,200 रुपए
प्रचार करने वाले कार्यकर्ताओं और एजेंट के मद में खर्च1,83,500 रुपए
कुल घोषित चुनाव खर्च21,88,135 रुपए

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चुनाव लड़ने के लिए पैसे कहां-कहां से मिले दीदी को

नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए ममता बनर्जी को कई जगहों से पैसे मिले. इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को चुनाव खर्च के संबंध में जो एफिडेविट ममता बनर्जी ने सौंपे थे, उसके मुताबिक, चुनाव लड़ने के लिए उनके पास कुल 40.01 लाख रुपए थे. इसमें से उन्होंने 21.88 लाख रुपए खर्च किये. उन्होंने कुल फंड के 50 प्रतिशत से कुछ अधिक पैसे खर्च किये. पूरा विवरण नीचे देखें.

कहां से आया फंडकितने रुपए मिले
ममता बनर्जी का अपना फंड5,01,000 रुपए
AITC ने चुनाव खर्च के लिए दिये25,00,000 रुपए
व्यक्ति, कंपनी, फर्म, संगठन आदि से मिली राशि10,00,000 रुपए
चुनाव लड़ने के लिए उपलब्ध कुल फंड40,01,000 रुपए

दीदी के लिए मोटरसाइकिल, टोटो और कार से प्रचार

नंदीग्राम में जमीन पर प्रचार के लिए मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा (टोटो) और कारों का नेटवर्क खड़ा किया गया. इसके खर्च का विवरण इस प्रकार है.

  • 100 रुपए प्रतिदिन की दर से 60 मोटरसाइकिल किराये पर ली गयीं.
  • 700 रुपए प्रतिदिन की दर से 54 टोटो (ई-रिक्शा) का इस्तेमाल किया गया.
  • 1200 रुपए प्रतिदिन की दर से 2 कार चुनाव प्रचार के लिए किराये पर ली गयीं.

इन वाहनों का इस्तेमाल बूथस्तर के कार्यकर्ताओं, प्रचार सामग्री और छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाओं तक उम्मीदवार की जानकारी पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हुआ. नंदीग्राम जैसी ग्रामीण-अर्धशहरी सीट पर यह ‘मोबिलिटी नेटवर्क’ चुनावी रणनीति का जरूरी हिस्सा था.

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पर्ची बांटने वालों और बूथ कार्यकर्ताओं पर खर्च

नंदीग्राम में ममता बनर्जी के लिए पर्चा बांटने से लेकर घर-घर संपर्क के लिए सैकड़ों लोगों की टीम लगायी गयी.

  • 355 लोगों को प्रतिदिन 200 रुपए की दर से काम पर रखा गया. इन्हें पर्ची बांटने जैसी ग्राउंड एक्टिविटी में लगाया गया था.
  • 1065 प्रचारकों को अलग-अलग दिन और इलाकों में प्रचार के लिए लगाया गया. इन्हें 100 रुपए प्रति दिन के हिसाब से भुगतान किया गया.

लोकल नेटवर्क पर आधारित था ममता बनर्जी का कैंपेन

यह दिखाता है कि नंदीग्राम में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सबसे बड़ी नेता ममता बनर्जी का प्रचार मॉडल बड़े स्टार कैंपेन की बजाय ‘लो-कॉस्ट, हाई-वॉल्यूम’ मानदेय पर काम करने वाले लोकल नेटवर्क पर आधारित था.​

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चुनाव लड़ने के लिए भाई से मिला 10 लाख का उपहार

नंदीग्राम में चुनाव लड़ने वाली ममता बनर्जी के खर्च के ब्योरे में एक और अहम बात दर्ज है. ममता बनर्जी के भाई अमित बनर्जी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए 10 लाख रुपए उपहार में दिये थे. यह रकम ‘व्यक्ति/परिवार से प्राप्त’ मद में दर्ज है.

नयनिका इंटरप्राइजेज ने किस मद में किया भुगतान

नंदीग्राम में होने वाली जनसभाओं और बैठकों के खर्च का भुगतान नयनिका इंटरप्राइजेज नामक फर्म ने किया. पंडाल, साउंड, लाइट, स्टेज और लॉजिस्टिक जैसी सेवाओं के भुगतान इसी संस्था के माध्यम से दिखाये गये.

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नामांकन के बाद बढ़ा प्रचार का खर्च

नंदीग्राम में 10 मार्च से 2 मई 2021 तक इतने पैसे खर्च किये गये. 10 मार्च को नामांकन और प्रचार शुरू होने के बाद रैलियों, वाहनों और प्रचारक मानदेय पर खर्च तेजी से बढ़ा. कुल मिलाकर बंगाल चुनाव 2021 की सबसे हाई प्रोफाईल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर करीब 54 दिन तक चले प्रचार अभियान पर मुख्यमंत्री ने 21.88 लाख रुपए खर्च किये.

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Mithilesh Jha

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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