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भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं

Updated at : 21 Feb 2026 10:29 PM (IST)
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भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं

भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया या अवधारणा नहीं है. यह असल में जालसाजों द्वारा जांच अधिकारियों का रूप धारण करके आम लोगों को डरा-धमकाकर पैसे ऐंठने का एक धोखाधड़ी भरा हथकंडा है.

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कोलकाता.

भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया या अवधारणा नहीं है. यह असल में जालसाजों द्वारा जांच अधिकारियों का रूप धारण करके आम लोगों को डरा-धमकाकर पैसे ऐंठने का एक धोखाधड़ी भरा हथकंडा है. इस संबंध में कलकत्ता हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवब्रत उपाध्याय ने प्रभात खबर के ऑनलाइन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2025 के अंत में इस बढ़ते खतरे को गंभीरता से लिया.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआइ को निर्देश दिया कि वह बिना किसी राज्य की पूर्व सहमति के पूरे देश में इन मामलों की स्वतंत्र जांच करे. इस कानूनी कार्रवाई की शुरुआत अंबाला के एक बुजुर्ग जोड़े की शिकायत के बाद हुई थी, जिनसे जाली अदालती आदेशों और फर्जी न्यायिक हस्ताक्षरों का उपयोग करके एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गयी थी. इन धोखाधड़ी के मामलों से अब तक 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी नुकसान हो चुका है.

न्यायालय ने इसके साथ ही आरबीआइ, दूरसंचार विभाग और राज्य की साइबर इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का भी आदेश दिया है. वर्तमान में कोई विशिष्ट डिजिटल अरेस्ट कानून मौजूद नहीं है. ये शातिर घोटालेबाज सीआरपीसी (अब बीएनएस) के तहत समन प्रक्रियाओं की अस्पष्टताओं का सीधा फायदा उठाते हैं. अदालत ने स्पष्ट किया है कि ये कृत्य न्यायिक प्रणाली के विश्वास पर एक बड़ा हमला है और इन्हें सामान्य साइबर अपराधों से ऊपर उठकर अधिक सख्ती से संभालने की जरूरत है. राज्यों को डेटा साझा करने का भी आदेश दिया गया है, ताकि इस खतरे की संगठित प्रकृति को नष्ट किया जा सके.

सवाल : लीज की अवधि खत्म होने के बाद पट्टेदार ने 25 वर्षों के लिए लीज के माध्यम से व्यवसाय करने के लिए दे दिया है. मैं पुन: उसे पाना चाहता हूं, क्या करूं?

-अनिमेष साव, कमरहट्टी

जवाब : लीज दाता व लीज ग्रहिता, दोनों की आपसी सहमति के आधार पर लीज का दस्तावेज बनता है. सहमति होने के बाद ही आपने लीज पर बिजनेस करने के लिए जमीन दी है और उसकी समय सीमा जब तक है, वह उस पर अपना बिजनेस जारी रखेगा. लीज की अवधि खत्म होने के बाद स्वतः लीज ग्रहिता का दावा खत्म हो जायेगा. अगर लीज दाता चाहे, तो उसकी अवधि बढ़ा सकता है और नहीं, तो वह संपत्ति वापस ले सकता है.

सवाल : मेरी पुश्तैनी जमीन है, जो सेल डीड के माध्यम से खरीदी गयी है. उक्त जमीन के कुछ अंश पर दूसरा व्यक्ति जबरन दावा कर रहा है. सेल डीड में प्रस्तावित नक्शा भी संलग्न है जिसमें क्षेत्रफल अंकित है. क्या दूसरा व्यक्ति मेरी जमीन पर दावा कर सकता है?

-नंदिनी सिंह, नैहाटी

जवाब : आपका सेल डीड पहले का बना है और बाद में दूसरा व्यक्ति अगर उपरोक्त सेल डीड में अंकित नक्शा के अंदर दावा करता है, तो बिना दस्तावेज का सही नहीं होगा. विवाद खत्म कराने व जमीन की मापी कराने के लिए सीओ के यहां आवेदन दे सकते हैं या फिर एसडीओ के यहां आवेदन दे सकते हैं. सरकारी स्तर से जमीन की मापी होगी व विवाद का समाधान हो जायेगा.

सवाल : मेरे पिता चार भाई हैं. बाकी तीन भाई मिलकर मेरे पिता को जमीन में हिस्सा नहीं दे रहे हैं. हिस्से की मांग करने पर झगड़ा शुरू हो जाता है. हमें क्या करना चाहिए?

-संतोष शर्मा, कमरहट्टी

जवाब : पुश्तैनी जमीन पर सभी का बराबर हिस्सा होता है. अपनी जमीन का हिस्सा पाने के लिए सिविल जज की अदालत में सभी वैध दस्तावेजों के साथ ओरिजनल सूट दाखिल करें. वंशावली के सभी हिस्सेदारों को प्रतिवादी बनायें, चाहे लड़का हो या लड़की. सभी को समान हक पुश्तैनी जमीन में प्राप्त है. आपके पिता का भी अन्य भाइयों की तरह जमीन पर हक है.

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BIJAY KUMAR

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By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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