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फिर ‘बेमियादी हड़ताल’ पर गये राज्य के जूनियर डॉक्टर

Updated at : 02 Oct 2024 1:07 AM (IST)
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फिर ‘बेमियादी हड़ताल’ पर गये राज्य के जूनियर डॉक्टर

राज्यभर के जूनियर डॉक्टर आरजी कर अस्पताल में एक प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या की घटना के मामले में पीड़िता को इंसाफ दिलाने और अस्पताल में सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों को लेकर फिर हड़ताल पर चले गये हैं.

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आरजी कर. दुर्गापूजा के दौरान चरमरा सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं

रातभर चली बैठक के बाद लिया हड़ताल का फैसला

अस्पतालों में सीनियर डॉक्टर कर रहे हैं मरीजों का इलाज

संवाददाता, कोलकाताराज्यभर के जूनियर डॉक्टर आरजी कर अस्पताल में एक प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या की घटना के मामले में पीड़िता को इंसाफ दिलाने और अस्पताल में सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों को लेकर फिर हड़ताल पर चले गये हैं. वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट के बनैर तले बेमियादी हड़ताल का एलान किया गया है. हड़ताल पर जाने से पहले सोमवार को पूरी रात जूनियर डॉक्टरों ने अपनी जनरल बॉडी (जीबी) की बैठक की. इसके बाद मंगलवार सुबह सात बजे 10 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल की घोषणा की गयी. सुरक्षा की मांग कर रहे डॉक्टरों के इस फैसले से राज्य सरकार के 28 मेडिकल कॉलेजों का कामकाज लगभग बंद हो गया. मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के दौरान काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. हालांकि, वरिष्ठ चिकित्सक पहले की तरह ही सामान्य रूप से सेवाएं दे रहे हैं. गौरतलब है कि इससे पहले जूनियर डॉक्टर 42 दिन हड़ताल पर रहे. लेकिन, काम पर लौटने के महज सात दिन बाद ही सरकारी अस्पतालों में फिर से गतिरोध पैदा हो गया.

राज्य सरकार का अनुरोध और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज करते हुए जूनियर डॉक्टरों ने इस बार हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है. जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सक व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिल रही है. जिसके कारण सागरदत्ता और रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज सहित ग्रामीण अस्पतालों में भी डॉक्टरों पर हमले हो रहे हैं. ऐसे में जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा. इस बीच, जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल के कारण मंगलवार सुबह से ही महानगर के सभी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य परिसेवा पर काफी असर पड़ रहा है. ऐसे में मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ डॉक्टर ड्यूटी रोस्टर बनाकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं. गौरतलब है कि पिछले शनिवार को जीबी बैठक के बाद जूनियर डॉक्टरों ने जरूरत पड़ने पर फिर से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी. सोमवार को सुप्रीम सुनवाई के बाद जूनियर डॉक्टरों ने फिर जीबी की बैठक की. आठ घंटे तक चली बैठक के अंत में चिकित्सकों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया. जूनियर डॉक्टरों के मुताबिक राज्य की ओर से सुरक्षा का आश्वासन तो दिया गया है पर सरकार ने सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की. उन्होंने सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की घटना को उजागर करते हुए एक बार फिर हड़ताल का आह्वान किया है.

क्या हैं जूनियर डॉक्टरों की मांगें

आरजी कर अस्पताल की पीड़िता को शीघ्र न्याय मिलेस्वास्थ्य विभाग को प्रशासनिक अक्षमता और भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. स्वास्थ्य सचिव को तुरंत हटाया जाये. राज्य के सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में केंद्रीकृत रेफरल प्रणाली लागू की जाये.

प्रत्येक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक डिजिटल बेड रिक्ति मॉनिटर स्थापित हो.

सभी सरकारी अस्पतालों में सीसीटीवी, ऑन-कॉल रूम और बाथरूम की आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जूनियर डॉक्टरों के निर्वाचित प्रतिनिधित्व के साथ प्रत्येक कॉलेज पर आधारित टास्क फोर्स का गठन किया जाये. अस्पतालों की सुरक्षा बढ़े, स्थायी महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाये

अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के सभी रिक्त पद तत्काल भरे जायें

थ्रेट कल्चर यानी छात्रों को धमकाने वाले गिरोहों को चिन्हित कर उन्हें दंडित करने के लिए हर मेडिकल कॉलेज में जांच समितियां स्थापित की जायें. राज्यस्तर पर भी एक जांच समिति बनायी जाये. हर मेडिकल कॉलेज में छात्र परिषद का चुनाव तुरंत कराया जाये. मेडिकल कॉलेजों में पैनिक बटन की व्यवस्था हो. प्रबंधन करने वाली सभी समितियों में छात्रों और जूनियर डॉक्टरों के निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल किये जायें. वेस्ट बंगाल मेडिकल काउंसिल में व्याप्त भ्रष्टाचार व अराजकता की जांच करायी जाये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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