तृणमूल विधायक प्रदीप मजूमदार के लिए दुर्गापुर सीट बचाना चुनौती, भाजपा की नजर दो प्रतिशत वोट पर

Pradeep Majumdar
Durgapur Purba : पश्चिम बंगाल के सबसे ज्यादा इंडस्ट्रियलाइज्ड शहरी सेंटर में से एक दुर्गापुर के इस सीट पर इस बार बेहद कड़ा मुकाबला होने की बात कही जा रही है. दुर्गापुर पूर्व एक ऐसी सीट है जहां पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस बेहद कम फासले से जीत दर्ज की थी. पिछली बार दो प्रतिशत मत से पीछे रही भाजपा की नजर इस बार जीत पर है.
मुख्य बातें
Durgapur Purba :कोलकाता. पश्चिम बर्धमान जिले में आनेवाली दुर्गापुर पूर्व सीट एक जनरल कैटेगरी की विधानसभा सीट है. दुर्गापुर पूर्व सीट से तृणमूल विधायक प्रदीप मजूमदार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में से एक माने जाते हैं. ममता बनर्जी ने उन्हें अपनी कैबिनेट में महत्वपूर्ण विभाग दे रखा है. बंगाल की राजनीति में उनकी पहचान केवल एक राजनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक कृषि विशेषज्ञ और कुशल प्रशासक के रूप में भी है. आगामी विधानसभा चुनाव में इस सीट को बरकरार रखना प्रदीप मजूमदार के लिए बड़ी चुनौती है.
2019 से भाजपा दे रही चुनौती
बंगाल में कभी कांग्रेस और वामदलों का गढ़ रहे इस चुनाव क्षेत्र पर आज बेशक तृणमूल का कब्जा है, लेकिन भाजपा 2019 से लगातार तृणमूल कांग्रेस को चुनौती दे रही है. पिछले चुनाव में जीत का अंतर और बढ़त कम रही है, 2026 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच एक दिलचस्प और करीबी मुकाबला देखने को मिल सकता है. लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन मौजूद है, लेकिन जब तक यह बड़ी वापसी नहीं करता, तब तक इसके निर्णायक होने की उम्मीद नहीं है. भाजपा दुर्गापुर पूर्व में अपनी पहली जीत के लिए वोट न देने वाले वोटरों को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखेगी. इस महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल सीट पर एक फोटो फिनिश की संभावना है.
कांग्रेस और लेफ्ट का रहा है गढ़
दुर्गापुर असेंबली सीट 1962 में बनी थी. शुरुआती दौर में, 1972 तक पांच चुनाव हुए, जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने 1967, 1969 और 1971 में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस ने 1962 और 1972 में सीट जीती. 1977 से 2006 तक इस सीट पर लेफ्ट फ्रंट का दबदबा रहा. माकपा ने पांच बार और भाकपा ने एक बार जीत हासिल की. तृणमूल कांग्रेस ने 2006 में यह सिलसिला खत्म कर दिया. 2011 से, दुर्गापुर पूर्व में कड़े मुकाबले हुए हैं. 2011 में, तृणमूल कांग्रेस के निखिल कुमार बनर्जी ने माकपा की अल्पना चौधरी को 8,566 वोटों से हराया था.
माकपा और तृणमूल में रहा है मुकाबला
2016 में माकपा ने यह सीट फिर से जीत ली. माकपा के संतोष देबराय ने तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप मजूमदार को 9,131 वोटों से हराया. 2021 में यह सीट वापस तृणमूल कांग्रेस के पास आ गई. लेकिन, इस चुनाव में तृणमूल की जीत से अधिक चर्चा भाजपा की चुनौती को लेकर हुई. तृणमूल उम्मीदवार ने महज 3,746 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. भाजपा दूसरे स्थान पर रही, जबकि दशकों तक इस इलाके को अभेद रखनेवाली माकपा काफी पीछे तीसरे स्थान पर चली गयी. ममता बनर्जी ने प्रदीप मजूमदार को अपनी कैबिनेट में जगह दी और उन्हें बंगाल का ग्रामीण विकास और कृषि विभाग का मंत्री बनाया.
| नाम | वोट |
|---|---|
| प्रदीप मजूमदार | 79,303 |
| दिप्तांशु चौधरी | 75,557 |
| विजेता पार्टी का वोट % | 41.2 % |
| जीत अंतर % | 2 % |
2021 में की राजनीति में इंट्री
पश्चिम बंगाल के ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र के नीति निर्माता प्रदीप कुमार मजूमदार का झुकाव हमेशा से कृषि और ग्रामीण विकास की ओर रहा है. राजनीति में सक्रिय रूप से आने से पहले, उन्होंने कृषि क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए पहचान बनाई थी. वह लंबे समय तक पश्चिम बंगाल सरकार में मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार के रूप में कार्य कर चुके हैं. 2021 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और दुर्गापुर पूर्व सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े. उनकी साफ-सुथरी छवि और जमीनी स्तर पर पकड़ ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया. ममता बनर्जी ने उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को देखते हुए, उन्हें राज्य सरकार में अत्यंत महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी. वर्तमान में, वह पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री के साथ-साथ कृषि विभाग का कार्यभार भी संभाल रहे हैं. राज्य के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है.
प्रदीप मजूमदार किस राजनीतिक दल से संबंधित हैं?
वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सदस्य हैं.
वर्तमान में उनके पास कौन से मंत्रालय हैं?
उनके पास वर्तमान में ‘पंचायत और ग्रामीण विकास’ विभाग तथा ‘कृषि’ विभाग की जिम्मेदारी है.
वह किस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं?
वे पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर पूर्व (Durgapur Purba) निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं.
राजनीति में आने से पहले उनका मुख्य कार्य क्या था?
वह मुख्य रूप से एक कृषि विशेषज्ञ थे और पश्चिम बंगाल सरकार में कृषि सलाहकार के रूप में कार्यरत थे.
उन्होंने अपना पहला चुनाव कब जीता?
उन्होंने अपना पहला महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव वर्ष 2021 में जीता था.
ममता के विश्वसनीय सहयोगियों में से एक
मजूमदार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत है. पश्चिम बंगाल विधानसभा की आधिकारिक जानकारी और अन्य सार्वजनिक दस्तावेजों के अनुसार वे कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के गहरे जानकार हैं. उनके पास कृषि प्रबंधन में लंबा अनुभव है, जिसका लाभ आज पश्चिम बंगाल के किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिल रहा है. मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ‘कृषक बंधु’ जैसी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया है. वे अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करते हैं और सरकारी योजनाओं के अंतिम छोर तक पहुँचने की निगरानी करते हैं. प्रदीप मजूमदार आज की तारीख में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अत्यंत विश्वसनीय सहयोगियों में गिने जाते हैं.
प्रदीप मजूमदार की महत्वपूर्ण बातें
- कृषि विशेषज्ञ: राजनीति में आने से पहले वे कृषि क्षेत्र के गहरे जानकार रहे हैं.
- मुख्यमंत्री के सलाहकार: उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ उनके आधिकारिक कृषि सलाहकार के रूप में वर्षों तक काम किया.
- विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र: वे दुर्गापुर पूर्व सीट से विधायक हैं.
- दोहरे विभाग का प्रभार: उनके पास वर्तमान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास और कृषि जैसे दो सबसे महत्वपूर्ण विभाग हैं.
- नीति निर्माता: पश्चिम बंगाल की कृषि योजनाओं और ग्रामीण विकास की रूपरेखा तैयार करने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है.
- वर्तमान भूमिका: पश्चिम बंगाल सरकार में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री.
- निर्वाचन क्षेत्र: दुर्गापुर पूर्व (Durgapur Purba) विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.
- राजनीतिक दल: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के वरिष्ठ नेता.
- विशेषज्ञता: राजनीति में आने से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रमुख कृषि सलाहकार रहे.
- उपलब्धि: 2021 के विधानसभा चुनाव में भारी मतों से जीत हासिल कर पहली बार विधायक बने.
- मुख्य फोकस: ग्रामीण बुनियादी ढांचा, कृषि सुधार और किसान कल्याण योजनाएं.
ककक
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लेखक के बारे में
By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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