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बोकारो में हाथियों का आतंक, एक और युवक की मौत, ढाई दर्जन गांव दहशत में

25 Jan, 2026 2:50 pm
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Bokaro Elephant Attack

पीड़ित परिवारों को ढांढस बांधते विधायक

Bokaro Elephant Attack: बोकारो जिले के गोमिया वन क्षेत्र में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है. महुआटांड़ इलाके में युवक करमचंद सोरेन की हाथी हमले में मौत हो गई. 75 दिनों में पांच लोगों की जान जा चुकी है और कई गांव दहशत में हैं.

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Bokaro Elephant Attack, बोकारो (राम दुलार पंडा) : बोकारो के गोमिया में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. गोमिया वन क्षेत्र के महुआटांड़ इलाके में बीते शनिवार की देर रात हाथियों ने एक और युवक जान ले ली. घटना कंडेर पंचायत के दरहाबेड़ा गांव की है. मृतक का नाम करमचंद सोरेन का है, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी. हाथियों ने मृतक के घर को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया.

इससे पहले हाथियों ने कब मचाया था तांडव ?

इससे पहले 18 जनवरी की रात कंडेर पंचायत के सिमराबेड़ा महतो टोला के पास मुख्य सड़क पर हाथियों ने तांडव मचाया था. हाथियों ने चलती ओमनी कार पर हमला करके चालक, सब्जी विक्रेता रवींद्र दांगी को मौत के घाट उतार दिया था. लगातार हो रही इन घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.

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मंत्री ने मुआवजा दिलाने का दिया भरोसा

शनिवार रात की घटना की सूचना मिलते ही सूबे के मंत्री सह स्थानीय विधायक योगेंद्र प्रसाद घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने मृतक के परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की और ढांढस बंधाया. मंत्री ने सरकारी प्रावधान के तहत चार लाख रुपये का मुआवजा जल्द से जल्द दिलाने का भरोसा दिया. मौके पर उन्होंने वन विभाग के वरीय अधिकारियों से फोन पर बात करके हाथियों के उत्पात पर तत्काल रोक लगाने के उपाय करने के निर्देश दिये.

75 दिनों में कितने लोगों की गयी जान ?

पिछले करीब ढाई महीने में हाथी के हमलों से इस क्षेत्र में रहने वाले पांच लोगों की जान जा चुकी है. 10 नवंबर की रात तिलैया रेलवे अंडरपास के पास पूर्व मुखिया बालेश्वर महतो के पुत्र प्रकाश कुमार महतो और टूनक महतो के पुत्र चरकू महतो की मौत हुई थी. 16 नवंबर की रात सांझो देवी नामक महिला हाथी हमले का शिकार बनी. 18 जनवरी को रवींद्र दांगी और अब दरहाबेड़ा में करमचंद सोरेन की जान चली गई.

हाथियों की वजह से कितने गांव प्रभावित ?

हाथियों के आतंक से तिरला, होन्हें, कंडेर, बारीडारी, बड़कीपुन्नू, महुआटांड़, टीकाहारा, केंदुआ, चोरगांवां, कुंदा, खखंडा, मुरपा समेत करीब ढाई दर्जन गांव-टोले प्रभावित हैं. हाथियों ने घर, चहारदीवारी, वाहन और फसलों को नुकसान पहुंचाकर ग्रामीणों की कमर तोड़ दी है. लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है. लोग रात में घर से निकलने से डर रहे हैं. अब लोगों की नजरें प्रशासन और वन विभाग पर टिकी है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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