बंगाल चुनाव 2026: इलेक्शन कमीशन से टीएमसी की मांग- रद्द हो दिलीप घोष की उम्मीदवारी, जानें क्या है पूरा मामला

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को शिकायत की कॉपी सौंपतीं तृणमूल कांग्रेस की नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य व अन्य.
Dilip Ghosh Threat Case: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के बीच टीएमसी ने दिलीप घोष के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत की है. आरोप है कि भाजपा नेता ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कालीघाट की जनता को हिंसा की धमकी दी है. टीएमसी ने घोष के खिलाफ FIR और सुरक्षा की मांग की है. पढ़ें पूरी खबर.
Dilip Ghosh Threat Case: पश्चिम बंगाल में चुनाव का ऐलान होने के बाद तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. राजनीतिक दलों की रंजिश इतनी बढ़ गयी है कि अभी से बात खून-खराबे तक आ गयी है. तृणमूल कांग्रेस ने 18 मार्च 2026 को दिल्ली में चुनाव आयोग के पास 5 पन्नों की एक विस्तृत शिकायत सौंपी है. पार्टी का दावा है कि दिलीप घोष ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) नेताओं और आम जनता के खिलाफ ‘हिंसा’ की सार्वजनिक धमकी दी है. यह आदर्श आचार संहिता (MCC) का सीधा उल्लंघन है.
क्या है पूरा मामला?
TMC ने एक वीडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए कहा है कि इसमें दिलीप घोष कथित तौर पर बांग्ला भाषा में धमकी देते दिख रहे हैं. कथित तौर पर दिलीप घोष ने कहा कि अगर मंत्री डॉ शशि पांजा के घर पर हमला हो सकता है, तो कालीघाट और विधायक मदन मित्रा के आवास पर भी ऐसे हमले हो सकते हैं.
तृणमूल कार्यकर्ताओं को पीटने के लिए बाहरी लोगों की जरूरत नहीं
कथित तौर पर घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को पीटने के लिए बाहरी लोगों की जरूरत नहीं है, उनके कार्यकर्ता पूरे बंगाल में उन्हें ‘ठीक’ करने के लिए तैयार हैं. शिकायत में कहा गया है कि घोष की टिप्पणियां कालीघाट और चेतला जैसे इलाकों के मतदाताओं को डराने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हैं.
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दिलीप घोष का बयान केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि हिंसा की एक सोची-समझी चेतावनी है. यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और आयोग को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.
डेरेक ओ ब्रायन, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य, तृणमूल कांग्रेस
TMC की चुनाव आयोग से 5 बड़ी मांगें
- भाजपा नेता दिलीप घोष को तुरंत नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा जाये.
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दिलीप घोष पर मामला दर्ज किया जाये.
- दिलीप घोष को चुनाव के दौरान हिंसा भड़काने वाले बयान देने से रोका जाये.
- विधायक डॉ शशि पांजा, मदन मित्रा और कालीघाट-चेतला क्षेत्र की जनता के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाये.
- सोशल मीडिया और न्यूज एजेंसियों से विवादित वीडियो हटाने और घोष से माफी मंगवाने का आदेश दिया जाये.
‘अनैतिक प्रभाव’ और भ्रष्टाचार का आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि यह आचरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) के तहत ‘अनुचित प्रभाव’ की श्रेणी में आता है. पार्टी का तर्क है कि शारीरिक चोट की धमकी देना एक भ्रष्ट आचरण है. यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है.
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By Mithilesh Jha
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