बर्खास्त शिक्षिका को उच्च प्राथमिक विद्यालय में नियुक्त करने का हाइकोर्ट ने दिया आदेश
Published by : SUBODH KUMAR SINGH Updated At : 12 Jul 2025 1:17 AM
कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयाेग (एसएससी) की भूमिका पर नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी फटकार लगायी है.
संवाददाता, कोलकाता.
कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयाेग (एसएससी) की भूमिका पर नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी फटकार लगायी है. हाइकोर्ट ने एक शिक्षिका को नयी नियुक्ति के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने का मौका न दिये जाने पर फटकार लगाते हुए कहा कि योग्य अभ्यर्थियों के लिए शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश सौगत भट्टाचार्य ने एसएससी से नदिया की शिक्षिका नाहिदा सुल्ताना को उच्च प्राथमिक विद्यालय में फिर से नियुक्त करने का आदेश दिया और साथ ही स्कूल सेवा आयोग को उनके नौकरी ज्वाइन करने की समय सीमा बढ़ाने का निर्देश दिया. गौरतलब है कि 2020 में नदिया की नाहिदा सुल्ताना झुरुली को हाइकोर्ट के आदेश पर आदर्श विद्यापीठ में कक्षा नौ-10 के इतिहास विभाग में शिक्षिका के पद पर नियुक्त किया गया था. हालांकि, वह नियुक्ति 2016 की एसएससी प्रक्रिया के आधार पर हुई थी, जिसे बाद में कलकत्ता हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रद्द कर दिया गया था. बताया गया है कि नाहिदा सुल्ताना अपर प्राइमरी नियुक्ति प्रक्रिया में भी मेरिट लिस्ट में शामिल थी. 20 दिसंबर 2020 को हाइकोर्ट के आदेश पर आयोग ने उसे काउंसलिंग के लिए बुलाया था. उस समय चूंकि वह नौवीं-10वीं कक्षा में कार्यरत थी, इसलिए उसने नियमानुसार 90 दिन का समय मांगा था. लेकिन आयोग ने समय-सीमा बढ़ाने की मांग को व्यावहारिक रूप से नजरअंदाज कर दिया. इसके बाद तीन अप्रैल, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नाहिदा सुल्ताना की भी नौकरी चली गयी. फिर, इसके बाद नादिया सुल्ताना ने अपर प्राइमरी की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आवेदन किया, लेकिन आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं आया.
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में मामले की सुनवाई में नाहिदा सुल्ताना के वकील आशीष कुमार चौधरी ने कहा कि भले ही सुप्रीम कोर्ट ने पूरे पैनल को रद्द कर दिया है, लेकिन शीर्ष अदालत ने उसके लिए अपनी पुरानी नौकरी पर लौटने का रास्ता खुला रखा है. लेकिन एसएससी ने मौका देने से इनकार करते हुए उसे नियुक्ति से वंचित कर दिया, जो यह पूरी तरह से अवैध है.
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