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केंद्र ने राजनीतिक प्रतिशोध में सोनाली को भेजा था देश से बाहर

6 Dec, 2025 11:55 pm
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केंद्र ने राजनीतिक प्रतिशोध में सोनाली को भेजा था देश से बाहर

तृणमूल नेताओं ने बताया कि सोनाली और उनके परिवार को धमकी दी गयी थी कि लौटने पर गोली मार दी जायेगी.

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कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस ने सोनाली बीबी को विदेशी बताकर देश से बाहर भेजने की घटना को केंद्र की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया. शनिवार को यहां तृणमूल भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य और डाॅ शशि पांजा ने कहा कि सोनाली की घर वापसी ने केंद्र सरकार का पूरा षड्यंत्र बेनकाब कर दिया है. दोनों नेताओं के अनुसार भाजपा की बंगाल विरोधी जमींदार मानसिकता के कारण एक गर्भवती बंगाली महिला को जबरन देश निकाला गया और महीनों तक विदेशी जमीन पर अनिश्चितता में भटकाया गया. नेताओं ने आरोप लगाया कि देर रात दिल्ली पुलिस ने सोनाली को घर से घसीट कर निकाला, आंखों पर कपड़ा बांधा और परिवार सहित अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार छोड़ आया. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने इसे महज संदेह के आधार पर जायज ठहराने की कोशिश की, जबकि यह पूरी तरह राजनीतिक बदले की कार्रवाई थी. तृणमूल नेताओं ने बताया कि सोनाली और उनके परिवार को धमकी दी गयी थी कि लौटने पर गोली मार दी जायेगी. संवाददाता सम्मेलन में नेताओं ने कहा कि अदालत ने केंद्र के अवैध कदमों को साफ तौर पर उजागर कर दिया है. अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल्दबाजी में प्रक्रिया का उल्लंघन किया और जिस डिपोर्टेशन आदेश को आधार बनाया गया था, वह अब इतिहास के कूड़े में फेंक दिया गया है. नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि केंद्र की जांच प्रक्रिया इसी स्तर की है, तो उसकी विश्वसनीयता किस आधार पर खड़ी है. तृणमूल ने बताया कि सोनाली का आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, 1952 की जमीन के दस्तावेज, जन्म प्रमाणपत्र और गांव में पीढ़ियों से स्थापित निवास के कागजात उपलब्ध थे. यहां तक कि 2002 की मतदाता सूची में भी सोनाली के माता-पिता के नाम दर्ज हैं. इसके बावजूद केंद्र ने इन दस्तावेजों को नहीं माना. तृणमूल ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने फर्जी दावा किया कि सोनाली 1998 में भारत आयी थी, जबकि उनका जन्म ही 2000 में हुआ था. पार्टी ने इसे गहरी राजनीतिक साजिश बताया. नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के अनुसार यदि पिता की नागरिकता पर कोई प्रश्न न हो, तो बच्चों की नागरिकता स्वतः तय होती है. फिर भी केंद्र ने नियमों की अनदेखी कर सोनाली को देश से निकाल दिया. तृणमूल के अनुसार भाजपा असल में अवैध घुसपैठ रोकने में रुचि नहीं रखती, बल्कि बंगाल के लोगों को बदनाम और अपमानित करने की रणनीति पर चल रही है. केवल राज्य सरकार के प्रयासों से ही सोनाली की घर वापसी संभव हुई. राज्य प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड ने उनके परिवार के साथ खड़े होकर हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की और न्याय सुनिश्चित किया. तृणमूल ने भाजपा पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप भी लगाया. पार्टी ने कहा कि भाजपा अवैध घुसपैठ का मुद्दा उठाती है, जबकि उनकी ही पार्टी का एक पंचायत सदस्य सुभाषचंद्र मंडल भारत और बांग्लादेश दोनों देशों में वोटर पहचान पत्र रखता है और दोनों जगह मतदान भी करता है. इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कब जवाब देंगे? पार्टी ने रानाघाट के भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार के उस बयान पर भी हमला बोला, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा बंगाल में सत्ता में आयी, तो भारत और बांग्लादेश एक हो जायेंगे और सीमा समाप्त हो जायेगी. तृणमूल ने पूछा कि यदि अनधिकृत घुसपैठ ही वास्तविक चिंता है, तो तथाकथित पहचान सत्यापन अभियान केवल बंगाल में ही क्यों चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मेघालय, असम और त्रिपुरा भी सीमावर्ती राज्य हैं, लेकिन भाजपा वहां ऐसे अभियान चलाने से डरती है. तृणमूल ने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन वाली त्रिपुरा पूर्वोत्तर का सबसे आसान घुसपैठ गलियारा बन गया है, जहां सिर्फ अक्तूबर, 2025 में 22 बांग्लादेशी पकड़े गये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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