चुनाव बाद हिंसा के मामले में हाइकोर्ट ने छह आरोपियों को दी जमानत

Updated at : 22 Feb 2025 11:23 PM (IST)
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चुनाव बाद हिंसा के मामले में हाइकोर्ट ने छह आरोपियों को दी जमानत

राज्य में वर्ष 2021 में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने वाले दिन ही भाजपा नेता उत्तम घोष की उनके घर के सामने हत्या कर दी गयी थी. चुनाव बाद हिंसा के एक मामले में सीबीआइ ने तृणमूल कांग्रेस के छह कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था. इन सभी आरोपियों ने जमानत के लिए हाइकोर्ट का रुख किया था, जिस पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने सभी छह आरोपियों को जमानत दे दी.

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कोलकाता.

राज्य में वर्ष 2021 में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने वाले दिन ही भाजपा नेता उत्तम घोष की उनके घर के सामने हत्या कर दी गयी थी. चुनाव बाद हिंसा के एक मामले में सीबीआइ ने तृणमूल कांग्रेस के छह कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था. इन सभी आरोपियों ने जमानत के लिए हाइकोर्ट का रुख किया था, जिस पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने सभी छह आरोपियों को जमानत दे दी. हालांकि, अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो निचली अदालत को जमानत रद्द करने का अधिकार होगा. हाइकोर्ट के न्यायाधीश देबांग्शु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर की खंडपीठ ने कहा कि राणाघाट कोर्ट आरोपी को 10 हजार रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत दे सकता है. यदि बाद में वे शर्तों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो निचली अदालत जमानत रद्द कर सकती है.

गौरतलब है कि भाजपा नेता उत्तम घोष नदिया के गंगनापुर में चुनाव बाद हुई हिंसा का शिकार हुए थे. उत्तम घोष के साथ-साथ तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उनके परिवार वालों को भी पीटा था. परिवार का आरोप है कि उत्तम घोष की हत्या राजनीतिक कारणों से सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने की है. उस घटना में तृणमूल के छह स्थानीय नेताओं शुकदेव विश्वास, सोमनाथ दत्ता, रवि विश्वास, धनंजय मंडल, श्यामल विश्वास और गोपाल छेत्री के नाम शामिल थे. उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआइ ने चुनाव बाद हिंसा मामले की जांच शुरू की. केंद्रीय जांच एजेंसी ने उत्तम घोष की हत्या के मामले में तृणमूल के छह कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया.

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने हाइकोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल चार साल से जेल में हैं. राज्य भर में चुनाव के बाद हुई हिंसा के संबंध में कई मामले दर्ज किये गये. सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में आरोपियों को जमानत दे दी है. परिणामस्वरूप, उनके मुवक्किलों को भी जमानत दी जानी चाहिए. आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि सीबीआइ ने उत्तम घोष की हत्या मामले की जांच पूरी कर ली है. उन्होंने आरोप पत्र भी प्रस्तुत कर दिया है. इस स्थिति में, उनके मुवक्किल जांच पर कोई प्रभाव नहीं डाल पायेंगे. इसके बाद अदालत ने प्रतिवादियों का अनुरोध स्वीकार करते हुए जमानत दे दी.

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